अंबिकापुर। लिव इन में रह रही गर्भवती युवती फांसी लगा ली, जिससे गर्भस्थ बच्चे और मां की मौत हो गई। युवती ने ऐसा कदम क्यों उठाया, इसका पता नहीं चल पाया है। घर से ऐसा कोई सुसाइड नोट भी नहीं मिला है, जिससे खुदकुशी का कारण स्पष्ट हो सके। युवती के माता-पिता का कहना है कि उनकी लड़की को गांव के पास का ही एक लड़का भगाकर ले गया था, इसके बाद लड़की उनके संपर्क में नहीं थी। गर्भवती पुत्री की मौत को लेकर स्वजन संदेह व्यक्त कर रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक कोतवाली थाना क्षेत्र के ग्राम खैरबार की साक्षी मिंज व लगभग एक किलोमीटर के फासले पर स्थित ग्राम अमेराडुगु निवासी स्कूल वेन चालक रोहित एक्का एक-दूसरे को पसंद करते थे। लगभग छह माह पहले युवक उसे भगाकर ले गया था, इसके बाद दोनों एक साथ रह रहे थे। इस बीच युवती 5 माह की गर्भवती हो गई। लड़की का अपने घर में आना-जाना नहीं होता था, और वह अपने पिता सहित अन्य लोगों का मोबाइल नंबर ब्लॉक कर दी थी, जिस कारण इनसे बातचीत पूरी तरह से बंद था। रविवार को रोहित एक्का व उसके स्वजन घर में नहीं थे। शाम को जब उसके पिता कमिल एक्का घर पहुंचे, तो दरवाजा बाहर से बंद था। काफी आवाज लगाने पर भी दरवाजा नहीं खुला और बहू की कोई प्रतिक्रिया अंदर से नहीं आई, तो वे खिड़की से झांककर देखे तो वह फांसी के फंदे पर झूल रही थी। शोर-शराबा करते हुए वे इसकी जानकारी स्कूल की ओर गए पुत्र रोहित एक्का को दिए। खिड़की के रास्ते से अंदर जाकर रवाजा खोलने के बाद फांसी के फंदे को काटकर उसे नीचे उतारे। लड़की की मौत का एहसास होने पर वे उसे अस्पताल नहीं ले गए थे। रोहित का कहना है कि उनके बीच ऐसा कोई विवाद भी नहीं हुआ था, जो फांसी लगाने का कारण बने। सूचना मिलने पर पुलिस ने देर रात मृतिका के शव को मेडिकल कॉलेज अस्पताल के मर्च्युरी में रखवा दिया था। सोमवार को न्यायिक अधिकारी के मौजूदगी में युवती के शव का पंचनामा, पोस्टमार्टम कराया गया। घटना से मृतिका के माता-पिता व्यथित हैं। इनका कहना है कि बिना किसी कारण कोई फांसी पर नहीं लटकेगा। दोनों अपनी पसंद और इच्छा से एक साथ रह रहे थे। अगर लड़की फांसी लगा थी, तो इसकी सूचना चंद दूरी पर स्थिति घर में आकर दे सकते थे। पुलिस दोनों पक्षों के मौजूदगी में मृतिका के शव को पोस्टमार्टम के बाद स्वजन के सुपुर्द कर दी है।
गांव के लोगों से मिली सूचना
मृतिका के पिता सदाराम, मां विराजो, ममेरा भाई नितिन एक्का का कहना है कि साक्षी कब फांसी लगाई, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। शाम को 5 बजे गांव के अन्य लोगों के माध्यम से पता चला साक्षी फांसी पर लटक गई है। जब वे मौके पर पहुंचे, तो उनकी लड़की को फांसी के फंदे से उतारकर जमीन पर रखा गया था। रात 10 बजे तक उसे कोई अस्पताल लेकर नहीं गया। इनका सवाल है कि बेटी के खुदकुशी की सूचना उन्हें देने की जरूरत क्यों महसूस नहीं की गई? अगर बेटी को अस्पताल नहीं ले जाना था, तो बिना पुलिस को सूचना दिए फांसी के फंदे से उसे क्यों उतारा गया? बंद कमरे को पुलिस की मौजूदगी के बिना क्यों खोला गया?

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