अंबिकापुर। सेंट्रल जेल अंबिकापुर के बैरक में बीते दिनों मोबाइल व गांजा मिलने का मामला प्रकाश में आया था। इसकी जांच जेल अधीक्षक ने कराई थी और कार्य में लापरवाही पाए जाने पर तीन प्रहरियों को निलंबित करने की कोरमपूर्ति की है।
बता दें कि बीते 17 मार्च को जेल अधीक्षक योगेश सिंह ने जेल के बैरकों की जांच की, इस दौरान वहां प्रतिबंधित सामान मिले। जांच के दौरान सूरजपुर दोहरा हत्याकांड के कुख्यात आरोपी कुलदीप साहू के बैरक के टॉयलेट में मोबाइल व गांजा मिला। इसी बैरक में दुर्ग का कुख्यात बदमाश दीपक नेपाली भी है, जो महादेव सट्टा ऐप से जुड़े मामले में रायपुर के जेल से अंबिकापुर सेंट्रल जेल में 4 माह पहले ही शिफ्ट किया गया था। कुख्यात बदमाशों के बैरक में मोबाइल व गांजा किस माध्यम से पहुंचा, इसकी अधीक्षक के द्वारा जांच की जा रही है। बताया जा रहा है कि 17 मार्च को सुबह 6 से 10 बजे तक जेल प्रहरी भूपेन्द्र अयाम, नरेंद्र वर्मा, अरूण कश्यप की उच्च सुरक्षा बैरक में निगरानी के लिए ड्यूटी लगाई गई थी। उक्त दिनांक को इस बैरक की तलाशी के दौरान प्रतिबंधित सामग्री मिली थी। जेल प्रहरियों के द्वारा दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही पाए जाने पर जेल अधीक्षक योगेश सिंह ने जांच के बाद तीनों जेल प्रहरियों को निलंबित कर दिया है।
मोबाइल का उपयोग रोकने लगाए गए थे जैमर
केंद्रीय जेल में मोबाइल का उपयोग रोकने के लिए पूर्व में जैमर लगाए गए थे और दावा किया जा रहा था कि अब यहां मोबाइल काम नहीं करेगा, लेकिन कुख्यात बदमाशों के बैरक में मोबाइल फोन का मिलने से सामने आ रहा है कि जेल के अंदर मोबाइल का उपयोग लोग आसानी से कर रहे हैं। इसके साथ ही नशे के लिए गांजा का बैरक तक पहुंचना और भी संदेह को जन्म देने वाला है। ऐसे गंभीर मसले पर 3 प्रहरियों का निलंबन खानापूर्ति करना ही है। सोचनीय पहलू यह है कि जिस बैरक में उच्च सुरक्षा, निगरानी की व्यवस्था हो, वहां मोबाइल और गांजा का उपयोग धड़ल्ले से होना पाया गया है। ऐसे में बाकी बैरकों की क्या स्थिति होगी, इसे आसानी से समझा जा सकता है।
जांच के बाद प्रहरियों के प्रवेश का है प्रावधान
जेल के अंदर ड्यूटी करने वाले प्रहरियों को जांच के बाद ही प्रवेश देने का प्रावधान है, वे अपने साथ जेल के भीतर मोबाइल तक नहीं ले जा सकते। जेल मुख्यालय ने सभी जेल अधीक्षकों को इसके निर्देश कैदियों द्वारा मोबाइल से बातचीत करने की शिकायत प्रदेश के जेलों में मिलने के बाद दिए गए थे। सेंट्रल जेल में मोबाइल जैमर लगाया गया, जिससे उम्मीद थी कि ऐसी शिकायतें नहीं आएंगी। इसके बाद भी जिला और उपजेल को मात देने जैसा कारनामा केंद्रीय जेल में सामने आ गया, जो कहीं न कहीं जेल प्रबंधन की खामी को सामने ला रहा है।

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