संदर्भ-अंबिकापुर शहर में सड़कों की दुर्दशा
अंबिकापुर। शहर में सड़कों की दुर्दशा आज किसी से छिपी नहीं है। शहर से बाहर जाने के लिए आप जिस भी सड़क से निकले साक्षात यमराज के दर्शन न हो जाए तो कहिएगा। सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे चन्द्रमा के ‘क्रेटरÓ की याद दिलाने पर्याप्त हैं। आश्चर्य यह है कि इस मार्ग से रोज बड़े-बड़े अधिकारी, नेता, मंत्री गुजरते हैं पर किसी ने भी इन्हें जी भरकर नहीं देखा। लिहाजा आम आदमी खून के आंसू बहाता हुआ इस पर से आने-जाने मजबूर है।
कुछ दिन पुरानी बात है। एक ई-रिक्शा में सवार होकर कुछ लोग रेलवे स्टेशन की ओर जा रहे थे। मनेन्द्रगढ़ रोड में कुछ आगे जाकर एक बड़े गड्ढे की जद में आकर रिक्शा बुरी कदर पलट गया। चीख पुकार मच गई। आसपास के लोगों ने किसी प्रकार सबको निकाला। कुछ लोग तो स्टेशन पहुंचे और कुछ लोग अस्पताल। सड़कों की इस बदहाली के कारण आए दिन ऐसी घटनाएं होती रहती हैं। कभी-कभी यह गंभीर रूप भी धारण कर लेती है पर सरकार है कि इससे आंखें मूंदे बैठी है। इस मामले में सबसे ज्यादा निंदनीय आचरण जन प्रतिनिधियों का है, जो सबकुछ जानते-समझते हुए भी खामोश बैठे हैं। कहते हैं किसी भी शहर की सड़कें उस शहर की जीवन रेखा होती है। ऐसे में यह कहना ज्यादा समयोचित होगा कि हमारे शहर की जीवन रेखा बहुत कमजोर है, बहुत दुर्बला है। हमारे शहर की हथेली पर जीवन रेखा शायद है ही नहीं। वैसे भी इस शहर पर शनि की साढ़े साती की महादशा हमेशा बनी रहती है। राहु-केतु तो इसके लग्न भाव में ही बैठे रहते हैं। यहां रोज कमाने-खाने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं जिनके सही सलामत वापस लौट जाने की कोई गारंटी नहीं होती है।
अभी ज्यादा दिन नहीं हुए जब यहां के जागरूक नागरिकों ने घड़ी चौक पर सामूहिक रूप से पिंडदान का आयोजन किया था। यह उनके प्रति था जिन्होंने सड़कों की खराब हालत के कारण अपनी जान गंवाई है। अंबिकापुर की कोई भी सड़क आज खतरे से खाली नहीं है, फिर भी किसी को शर्म न आए तो क्या कीजिए। आप कभी भी सड़क पर निकल कर देख लीजिए। कोई भी यदि सीधे चलते दिख जाए तो बताइएगा। गड्ढों से बचने की कोशिश में दाएं-बाए गाड़ी, मोटर बाइक वाले तो छोड़िए पैदल चलने वाले भी लगे नजर आते हैं। मतलब शहर की हालत इतनी बदतर हो गई है कि पैदल चलना भी दुश्वार हो गया है। रास्तों पर चलते हुए लोगों के मुंह से बरबस गालियां निकल ही जाती हैं। सड़कों के कारण आए दिन विवाद होना भी अब आम बात है।
आईन्दा दिनों नगरीय निकायों का चुनाव होना है। जनता सड़क, बिजली, पानी आदि मुद्दों पर ही मतदान करती है। कहना न होगा कि अंबिकापुर में सड़क और बिजली की हालत बेहद खराब हैं। ऐसे में नेता कौन सा मुंह लेकर जनता के बीच जाएंगे, देखने की बात होगी। शहर में आज जितनी भी समस्याएं व्याप्त हैं उसमें सड़क शीर्ष पर है। इसी से जुड़ी यातायात समस्या भी है, जिसमें यातायात विभाग बुरी तरह असफल है। इस मुद्दे पर कभी बाद में चर्चा करेंग,फिलहाल तो आइए हम सड़कों का ही रोना रो लें क्योंकि हमारे अगुआ लोग चैन की नींद सोने का बहाना कर रहे हैं।

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