अंबिकापुर। पांच सूत्रीय मांगों को लेकर छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर जिले के अधिकांश शिक्षक हड़ताल पर रहे। हड़ताल के लिए शिक्षकों ने पूर्व में ही अवकाश ले लिया था। गुरुवार को एसबीआई कलेक्टोरेट शाखा के सामने अधिकांश शिक्षक धरना पर बैठे रहे। शिक्षकों ने बताया कि 7 वर्ष के कार्यकाल के बाद अगले वेतनमान की पात्रता को सरकार ने निरस्त कर दिया था, जिससे किसी भी शिक्षक को क्रमोन्नति की पात्रता अब नहीं है। 1998 से कार्यरत कर्मचारी पंचायत के बाद शिक्षा विभाग में पहुंचे है। उस सेवा को मानते हुए 2008 में सरकार ने इनका संविलियन किया। पेंशन के लिए पुरानी सेवा को सरकार नहीं मान रही है। शिक्षकों की अतिरिक्त व्यवस्था के कारण स्कूलों में ताले तो नहीं लगे, लेकिन पढ़ाई ठप रही। संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारियों का कहना है कि जिले में करीब 10 हजार शिक्षक हड़ताल पर रहे। शिक्षकों के आंदोलन के कारण 80 फीसदी स्कूलों में पढ़ाई नहीं हुई। सभी स्कूलें खुली रही, लेकिन शिक्षकों के अभाव में बच्चों की पढ़ाई बाधित रही। मांगें पूरी नहीं होने पर इन्होंने उग्र आंदोलन करने कहा है।
बयान
शिक्षकों के एक दिवसीय हड़ताल के कारण स्कूल बंद करने की स्थिति नहीं बनी थी। स्कूलें खुली रहीं। बीईओ के माध्यम से दूसरे स्कूलों के शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई थी।
अशोक सिन्हा, जिला शिक्षा अधिकारी

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