अंबिकापुर। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र की एक महिला के जबड़े में अल्सर का राजमाता श्रीमति देवेन्द्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय संबद्ध जिला चिकित्सालय में सफल ऑपरेशन किया गया। चार घंटे तक चले जटिल ऑपरेशन के बाद महिला को चिकित्सकों ने अपनी निगरानी में रखा था। इसके बाद महिला की छुट्टी कर दी गई है। एक सप्ताह बाद उसे रेडियोथेरेपी के लिए रायपुर भेजा जाएगा।
जानकारी के मुताबिक सोनभद्र की महिला बुटुली देवी पति राम गोविंद 40 वर्ष तीन महीने से जबड़े में अल्सर से पीड़ित थी। सोनभद्र में चिकित्सक के संपर्क में आने पर उन्होंने उसे जबलपुर या बनारस जाने के लिए कहा था। इसी बीच दंपती लगभग पांच वर्ष पूर्व मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर के दंत रोग विभाग में इलाज और ऑपरेशन के बाद स्वस्थ्य हुए सोनभद्र के एक पीड़ित के संपर्क में आए और उन्होंने इन्हें अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल जाने के लिए कहा था। इसके बाद दंपती ने डॉ. अभिषेक हरीश से संपर्क किया। उन्होंने बायोप्सी, सीटी स्कैन, रक्त जांच मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कराया और महिला का पैथालॉजी रिपोर्ट मिलने के बाद उन्होंने मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अविनाश मेश्राम व अस्पताल अधीक्षक डॉ. आरसी आर्या के मार्गदर्शन में महिला को आवश्यक उपचार सुविधा उपलब्ध कराया था। महिला को लगभग 15 दिन भर्ती रखने के बाद उसे आवश्यक उपचार सुविधा उपलब्ध कराई गई थी। बीते बुधवार को डॉ. अभिषेक हरीश ने महिला के जबड़े का ऑपरेशन किया। इस दौरान एनेस्थीसिया से डॉ. पार्थ सारथी की उपस्थिति रही।
गल गए हड्डी का हिस्सा काटकर निकाला
डॉ. अभिषेक हरीश ने बताया कि बुटुली देवी के जबड़े के हड्डी में पिछले 3-4 माह से छाला होने के कारण हड्डी गल गया था और मांस का एक हिस्सा उठ गया था, जिससे उसे खाने-पीने और बातचीत करने में तकलीफ हो रही थी। जांच में सामने आया कि उसके गले में गांठ बन गया है। ऐसे में बॉयप्सी, सीटी स्कैन जैसी जांच कराया गया था। स्वजनों की सहमति के बाद उन्होंने महिला का ऑपरेशन किया। ऑपरेशन के दौरान महिला के जबड़े से डेढ़ बाई एक इंच का टुकड़ा काटकर निकालना पड़ा, जो जबड़े के अन्य हिस्से को प्रभावित कर रहा था और तकलीफ बढ़ रही थी। ऑपरेशन के बाद महिला को खाने-पीने और बातचीत करने में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं हो रही है। उसे 7 दिन के बाद आकर टांका कटवाने और सेकाई कराने कहा गया है। उन्होंने बताया महिला की सर्जरी नि:शुल्क की गई। निजी संस्थान में इलाज और ऑपरेशन कराने की स्थिति में लगभग 3-4 लाख रुपये व्यय होता।

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