अच्छे-खासे टाइल्स को उखाड़कर कमजोर टाइल्स लगाने का चल रहा खेल
अंबिकापुर। बरसात के दिनों में टपकते छत के बीच खतरे में इलाज करा रहे मरीजों की चिंता से दूर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ऐसे कार्यों को प्राथमिकता देते हुए कराया जा रहा है, जिससे शासकीय धन का अपव्यय मात्र हो रहा है। वर्तमान में अस्पताल भवन में अच्छे खासे टाइल्स को उखाड़कर नए टाइल्सों को लगाने का काम द्रुत गति से किया जा रहा है। पूर्व में लगाए गए इन टाइल्सों को उखाड़ने में जहां एक ओर मजदूरों को मशीनी ताकत का इस्तेमाल करना पड़ रहा है, वहीं नए टाइल्सों को जिस प्रकार लगाया जा रहा है, वे कितने दिन उपयोगी साबित होंगे, इसे लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। यह भी देखने को मिल रहा है कि जहां वास्तव में टाइल्स लगाने की जरूरत है, उसे अस्पताल प्रबंधन लंबे समय से नजरअंदाज करते आ रहा है।
मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इन दिनों अच्छे-खासे टाइल्सों को उखाड़कर नए टाइल्स को लगाने का काम तेज गति से चल रहा है। अस्पताल के हालत पर नजर डालें तो भरी बरसात में दीवारों में पानी के सीपेज से करंट का झटका झेलते यहां के स्टाफ नर्स सहित अन्य कर्मचारी काम करने विवश रहे, वहीं वार्डों में मरीजों को बेड खिसकाकर टपकते पानी से बचने के लिए सुरक्षित जगह तलाशना पड़ रहा था। पानी के रिसाव से अस्पताल भवन को बचाने की कोशिशें सीजीएमएससी ने काफी की, छत को प्लास्टिक की पन्नी, तिरपाल से ढकने की खानापूर्ति की गई, लेकिन झमाझम बारिश के बीच यहां बदहाल हालातों का नजारा देखने को मिल रहा था। अस्पताल के हमर लैब, वार्ड सहित ओटी व अन्य महत्वपूर्ण कक्ष भी सीपेज से सुरक्षित नहीं थे। इन सबके बीच काफी समय से अस्पताल में अनुपयोगी निर्माण कार्यों को कराने की दिशा में कुछ अधिक ही रूचि देखने को मिल रही है। इसकी शुरूआत पुराने अस्पताल भवन में पूरी मजबूती के साथ लगे टाइल्सों को उजाड़ने और नए कमजोर टाइल्स लगाने से हुई है, जिसका क्रम अनवरत जारी है। जमीन ही नहीं दीवारों में लगे अच्छे टाइल्सों को मानव और मशीनी ताकत से उखाड़ा जा रहा है और नए टाइल्स लगाने के नाम पर धनराशि की बर्बादी की जा रही है।
मरीजों की भीड़ के बीच चल रहा काम
अस्पताल के पुराने मुख्य प्रवेश द्वार से लगाए गए टाइल्सों के हालात पर नजर डालें तो कई टाइल्स कम समय में ही टूटकर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। एक्स-रे-सीटी स्कैन कक्ष के सामने लगे टाइल्सों को उखाड़कर नया लगाने के बाद आपातकालीन ओटी के सामने जमीन और दीवारों में लगे अच्छे खासे टाइल्स को उखाड़ दिया गया। यह काम भी ऐसे समय में कराया जा रहा है, जब मरीजों की भीड़ अस्पताल के ओपीडी में लगी रहती है। आपातकालीन ओटी में मरीजों को मरहम-पट्टी के लिए स्ट्रेचर और व्हील चेयर में लेकर मरीज के स्वजन पहुंचते हैं। टाइल्स उजाड़ने के बाद बनी स्थिति के कारण मरीजों को लेकर आने वाले स्वजनों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
टाइल्स कटर की आवाज से कान हो रहे सुन्न
टाइल्स काटने में किए जाने वाले कटर की आवाज से लोगों के सुन्न हो रहे कान की परवाह किए गए बगैर यहां काम चल रहा है, जिससे होने वाली असुविधा से प्रबंधन को कोई लेना-देना नहीं था। ओटी के अंदर तक कटर की गूंजती आवाज और उड़ते धूल के कारण नाक-मुंह बांधकर काम करते यहां के स्टाफ देखे जा रहे हैं। मरीज भी धूल के उड़ते गुबार के बीच नाक मुंह को कपड़े से ढककर आना-जाना करने में लगे हैं। यही नहीं मरीजों को हो रही असुविधा की परवाह किए बगैर अस्पताल भवन के अंदर ट्रैक्टर लगाकर उजाड़े गए टाइल्स का मलबा उठाने जैसी तस्वीरें भी सामने आ चुकी हैं।

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