विवि में ‘जनजातीय समाज के गौरवशाली अतीत व ऐतिहासिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक योगदानÓ विषय पर हुई कार्यशाला
अंबिकापुर। संत गहिरा गुरू विश्वविद्यालय में ‘जनजातीय समाज का गौरवशाली अतीत व ऐतिहासिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक योगदानÓ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन उच्च शिक्षा विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के निर्देशन में 08 अक्टूबर को रामविचार नेताम मंत्री छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य आतिथ्य में किया गया। कार्यक्रम में सांसद चिंतामणी महाराज एवं विधायक राजेश अग्रवाल विशिष्ट अतिथि रहे। उद्घाटन सत्र के मुख्य वक्ता विजेन्द्र शुक्ला व अजय इंगोले रहे। कार्यक्रम का आरंभ दीप प्रज्वलन व सरस्वती वंदन से हुआ। अतिथियों ने जनजातीय समुदाय के स्वतंत्रता सेनानियों का माल्यार्पण करके सम्मान किया।
कार्यक्रम के शुरूवात में विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. शारदा प्रसाद त्रिपाठी ने अतिथियों व सहभागियों का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य जनजातीय समाज के महानायक जो स्वतंत्रता संग्राम में अभूतपूर्व योगदान देने के उपरांत भी अतीत की स्मृतियों में धूमिल हो चुके हैं, उन्हें पुन: प्रकाश में लाना है। इस वर्ष रानी दुर्गावती की 500 वीं जयंती व भगवान बिरसा मुण्डा की जयंती 15 नवंबर को केन्द्र सरकार ने जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने के लिए निर्देशित किया है। इसी तारतम्य में प्रदेश स्तर पर विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के माध्यम से जनजातीय नायकों के गौरवपूर्ण इतिहास व योगदान से संबंधित विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाना है। तकनीकी सत्र के मुख्य वक्ता इन्द्र भगत ने कहा कि छत्तीसगढ़ एक जनजातीय बाहुल्य राज्य है व छत्तीसगढ़ का हर तीसरा व्यक्ति जनजातीय वर्ग से संबंधित है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का यह मानना है कि देश को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाना है और जनजातीय वर्ग के विकास के बिना यह संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि जनजातीय समाज जल-जंगल-जमीन के संरक्षण पर सदैव से बल देते आया है व महिलाओं के सम्मान की बात करता है। जनजातीय समाज एक स्वाभिमानी समाज है। विशिष्ट अतिथि रामलखन पैकरा ने बताया कि जनजातीय समाज हमेशा से सनातन धर्म का पालन एवं संरक्षण करने वाला रहा। मुख्य अतिथि सरगुजा संभागायुक्त गोविन्द राम चुरेन्द्र ने बताया कि देश के लगभग सभी क्षेत्रों में जनजातीय नायक हुए हैं। जनजातीय समाज का सदैव से एक गौरवशाली इतिहास रहा है। उन्होंने सभी से स्वनिर्माण व नवनिर्माण करने का व भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में अपना योगदान देने का आग्रह किया। श्री चुरेन्द्र ने स्वाध्याय व एक परिवार, एक समाज, एक भारत पर बल दिया। अजय इंगोले ने इस तरह के कार्यशाला को प्रसंशनीय प्रयास बताया और जनजातीय महानायकों को पाठ्यपुस्तकों में शामिल करने पर भी बल दिया। इसके बाद विभिन्न महाविद्यालयों से आए संयोजक व सहसंयोजक की टीम ने महाविद्यालय स्तर पर इसी पृष्ठभूमि पर कार्यक्रम आयोजित करने पर परिचर्चा की। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अशोक सिंह ने कार्यशाला के कुशल आयोजन पर शभकामानाएं दी। कार्यशाला का विशेष आकर्षण जनजातीय जननायकों पर आधारित प्रदर्शनी रहा, जिसमें देश के विभिन्न अंचल के 54 जनजातीय वीरों के चित्र व संक्षिप्त योगदान का वर्णन किया गया था। कार्यक्रम के संयोजक मुकेश नाग थे। धन्यवाद ज्ञापन सह संयोजक असीम केरकेट्टा ने व मंच संचालन खेमकरण अहिरवार ने किया।
कई योद्धाओं को इतिहास में नहीं मिला स्थान-नेताम
रामविचार नेताम ने कहा कि जनजातीय समाज में अनेकों योद्धा, समाज सुधारक व दार्शनिक हुए हैं, जिन्होंने देश के इतिहास में विशेष योगदान दिया है। उन्होंने बताया प्रधानमंत्रीजी ने 15 नवम्बर्र भगवान बिरसा मुण्डा के जन्मदिवस को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है, साथ ही 15 जनवरी 2025 तक जनजातीय गौरववर्ष के रूप में इसे मनाने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा प्रत्येक विश्वविद्यालय में जनजातीय अनुसंधान केन्द्र स्थापित होने चाहिए, जिससे राष्ट्र जनजातीय नायकों से अवगत हो सकंे। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज से कई ऐसे योद्धा हुए हैं, जिनका आजादी के आंदोलन के साथ-साथ संस्कृति और पर्यावरण के संरक्षण में भी विशेष योगदान रहा है परंतु इतिहास में उन्हें स्थान नहीं मिला है। ऐसे ही नायकों को शोध केन्द्र के माध्यम से इतिहास और पाठ्यपुस्तकों में जगह प्रदान किया जा सकता है।
जनजातीय समाज का इतिहास सदैव से गौरवशाली रहा
चिंतामणी महाराज ने कहा कि जनजातीय समाज का इतिहास सदैव से ही गौरवशाली रहा है। जनजातीय संस्कृति रीति-रिवाज एवं परंपरा को संरक्षित करने का कार्य जितना जनजातीय समाज ने किया है, उतना शायद किसी अन्य समाज ने नहीं किया। उन्होंने बताया कि संत गहिरा गुरू ने न केवल पर्यावरण के संरक्षण के लिए अपितु संस्कृति संरक्षरण पर भी जोर दिया। उन्होंने सभी लोगों से आध्यात्म व मानवता से जुड़ने का आग्रह किया।
अंबिकापुर में बिरसा मुण्डा चौक की होगी स्थापना
विधायक अंबिकापुर राजेश अग्रवाल ने कहा कि जब भी देश की अस्मिता और सुरक्षा पर संकट आया है, जनजातीय समाज सर्वप्रथम देश की सुरक्षा के लिए खड़ा हुआ है व आक्रमणकारियों का प्रतिरोध किया है। उन्होंने भगवान बिरसा मुण्डा के नाम पर अंबिकापुर शहर में एक चौकस्थापित करने की घोषणा की।
सांस्कृतिक विरासत का वाहक रहा जनजातीय समाज
बृजेश शुक्ला ने कहा कि देश में हमेशा से जनजातीय समाज सांस्कृतिक विरासत का वाहक रहा है। उन्होंने कहा कि यह वर्ष रानी दुर्गावती की 500वीं जयंती का वर्ष है, जिन्होंने मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ सहित उड़ीसा के प्रांतों में किसी समय शासन किया था व बाल कल्याण, महिला कल्याण एवं पर्यावरण संरक्षण पर विशेष जोर दिया था।वीर नारायण सिंह, राघवेन्द्र सिंह व सुरेन्द्र साइन जैसे कई जनजातीय वीरों ने सन 1857 की क्रांति का नेतृत्व किया था व बिना डरे वीरगति को प्राप्त हुए थे।

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