जिन पर सुरक्षा की जिम्मेदारी, वे ही कर दिखाए ऐसा कारनामा

गिरिजा  ठाकुर
अंबिकापुर। वनों की कटाई को रोकने वाला विभाग ही अपने नाक के नीचे हरे-भरे अविकसित नीलगिरी के पेड़ों की कटाई करने पर आमादा है। इसकी कटाई खूंटा बनाने के लिए करने का संकेत वे कर्मचारी दे रहे हैं, जो अपने अफसर के आदेश का पालन कर रहे हैं। इधर अधिकारी की दलील पेड़ों के करीब रहने से अविकसित होने से जुड़ी है। वन विभाग के बड़े अधिकारियों की जहां हर पल निगाह रहती है, वहां हरितिमा को तहस-नहस करने का किया इन्हीं के द्वारा कराना वास्तव में चौंकाने वाला है। देखने को मिल रहा है कि वनों को जीवन का पर्याय बताकर इसके हिफाजत की दुहाई देने वाले अफसर ही भक्षक बन गए हैं।

मामला शहर के बांसबाड़ी का है, जो प्रतापपुर रोड और रामानुजगंज रोड में संजय पार्क से लगा है। यहां वृक्षों की स्वचालित आरा से कटाई का नजारा सामने आया है। मामले में वन विभाग के अफसरों की जो दलील है वह पच नहीं रही है। यह काम ऐसे अफसरों के दिशानिर्देश पर हो रहा है, जिनके पास वनों की सुरक्षा का बड़ा दायित्व है। पेड़ों की कटाई में लगे लोग कह रहे हैं हम तो छोटे कर्मचारी हैं, आदेश का पालन कर रहे हैं। शहर में ऐसे कई पेड़ हैं जो खतरे का सबब है, इन पर अधिकारियों की नजर नहीं है, लेकिन बांसबाड़ी में लगे हरे-भरे ऐसे पेड़ों की बलि चढ़ाई जा रही है, जिन्हें प्लांटेशन के नाम पर वर्षों पहले लगाया गया। यह कारनामा शहर के सीसीएफ कार्यालय से महज 50 मीटर की दूरी पर चल रहा है। ऐसे पेड़ों को काटा जा रहा है जो पूरी तरह से परिपक्व भी नहीं हो पाए हैं। इस कृत्य से पर्यावरण संरक्षण की दुहाई देने वाले अफसरों का चेहरा सामने आ रहा है। ऐसा कार्य आम आदमी करे तो उसकी परेशानी को समझे बगैर कार्रवाई के लिए यही विभाग चढ़ बैठेगा। पेड़ों की कटाई करने वाले कर्मचारियों से पूछा गया तो उनका कहना था कि दरोगा साहब अमर सिंह पैकरा के मार्गदर्शन में बांसबाड़ी प्लांट में लगे इन पेड़ों को काटा जा रहा है।

अधिकारी ने ऐसे दे डाली नसीहत
एसडीओ वन जेनी ग्रेस कुजूर का कहना है कि नीलगिरी के पेड़ हैं। कुछ जो बीच में आ रहे थे उनकी सफाई का कार्य किया जा रहा है। पेड़ों के विकास के लिए बीच में गैप क्रिएट करना पड़ता है। तना काटने से गैप क्रिएट नहीं होगा। असंतुष्ट मीडिया कर्मियों के सवाल का दौर जारी रहने पर इन्होंने पहले कैमरा बंद करने कहा। साथ ही क्या सवाल पूछना है, इसकी नसीहत देने लगीं।

खूंटा बनाने के लिए ठूंठ कर रहे
मौके पर पेड़ों की कटाई में लगे कर्मचारियों से पूछने पर उन्होंने कहा कि हम तो छोटे कर्मचारी हैं। अधिकारी ने कहा ठूंठ करने। छह फिट का खूंटा बनाने के लिए ठूंठ कर रहे हैं। वहीं वन विभाग के एसडीओ की दलील पेड़ों के बीच गैप वृद्धि से जुड़ी है। दोनों की बातों में असमानता से समझा जा सकता है कि विभाग अपने ही नाक के नीचे पेड़ों की कटाई करवाने में पीछे नहीं है। देखना यह है कि पेड़ कटाई कराने वाले अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है।

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