कहा-शासकीय योजनाओं को फलीभूत करने के बाद कब तक होंगी उपेक्षा की शिकार  
सरकारी कामों की ऐसी फेहरिश्त कि घर-परिवार को भगवान भरोसे छोडऩे रहती हैं मजबूर  

अंबिकापुर। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका संघ ने भारतीय मजदूर संघ एवं अखिल भारतीय आंगनबाड़ी कर्मचारी महासंघ के बैनर तले छह दिनों तक अंबिकापुर के कलेक्टोरेट स्टेट बैंक शाखा के सामने आठ सूत्रीय मांगों को लेकर हुंकार भरने के बाद मंगलवार, 20 दिसंबर को विशाल रैली निकाली और प्रधानमंत्री व छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन पत्र जिला प्रशासन के माध्यम से सौंपा।


आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं का कहना है भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा पूरे देश में वर्ष 1975 से आंगनबाड़ी केंद्रों के समेकित महिला एवं बाल विकास योजनाओं का संचालन किया जा रहा है, जिसमें लाखों की संख्या में आंगनबाड़ी के कर्मचारी सेवा दे रहे हैं और इस योजना को फलीभूत कर रहे हैं। केंद्र सरकार की इस स्कीम के तहत शून्य से 6 वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य की देखभाल अनौपचारिक शिक्षा के साथ पूरक पोषण आहार उपलब्ध कराने, किशोरी बालिका, गर्भवती, शिशुवती माताओं, शून्य से 6 वर्ष के बच्चों को कुपोषण से बचाने आवश्यक पोषण आहार, विटामिन, प्रोटीन, टीकाकरण एवं बाल संदर्भ सेवाओं का कार्य उनके द्वारा किया जा रहा है। इसके अलावा राज्य शासन उन्हें बीएलओ, जनगणना, आर्थिक जनगणना, पल्स पोलियो, फाइलेरिया, राशन कार्ड, ओडीएफ, कोविड-19 में डोर-टू-डोर वैक्सीनेशन का प्रचार प्रसार, आंगनबाड़ी केंद्र की 11 पंजी, ऑनलाइन एंट्री, पोषण ट्रैकर, एमपीआर, बच्चों के वजन त्यौहार जैसे कई कार्यों में उन्हें भागीदार बनाते आ रही है। कोविडकाल में आंगनबाड़ी कर्मी कोरोना से लडऩे के लिए प्रथम लाइन में खड़े होकर सरकारी अथवा अद्र्धसरकारी कर्मचारियों के कंधे से कंधा मिलाकर जान की बिना परवाह किए बिना कोरोना योद्धा के रूप में कार्य किए। कुपोषण, शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में आंगनबाड़ी कर्मियों का महत्वपूर्ण योगदान है। इसके बाद भी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए योजनाएं लाने वाली सरकार उन्हें उपेक्षित कर रही है। चुनावी घोषणा की तरफ ध्यान आकर्षण कराते हुए इन्होंने बुनियादी मांगों की ओर पुन: ध्यानाकर्षण कराया है। सभा व रैली में संघ की जिलाध्यक्ष फुलासो एक्का, जिला कार्यकारिणी अध्यक्ष प्रमिला तिर्की, सुशीला भगत, धनमेत कुशराम, अंजू लकड़ा, करम खलखो, रानू, प्रमिला लकड़ा, हुमेरा, शांति, नीला सहित सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ताएं उपस्थित थी।
आंगनबाड़ी कर्मियों की मांग
0 आंगनबाड़ी कर्मियों को शासकीय कर्मचारी घोषित कर सामाजिक सुरक्षा देकर उन्हें उचित श्रेणी में शामिल किया जाए।
0 आंगनबाड़ी कार्यकताओं को शासकीय कर्मचारी घोषित नहीं होने तक भारत सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन 18 हजार एवं सहायिकाओं को नौ हजार प्रतिमाह भुगतान किया जाए।
0 शासन मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता का पद समाप्त करते हुए सीधे मुख्य आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के पद पर भर्ती करे, साथ ही वर्तमान में जो मिनी आंगनबाड़ी कार्यकताएं हंै, उन्हें मुख्य आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घोषित किया जाए।
0 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिकाओं का नौ माह की एरियर्स भुगतान जल्द से जल्द आंगनबाड़ी कर्मियों के खाते में किया जाए।
0 पोषण ट्रेकर में कार्य करने हेतु एंड्राइड फोन, सिम, इंटरनेट खर्च की निर्धारित राशि का भुगतान किया जाए।
0 नई शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत आंगनबाड़ी केंद्रों को प्री-प्राइमरी स्कूल में बदलने पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्री-प्राइमरी टीचर व सहायिकाओं को प्री प्राइमरी असिस्टेंट टीचर में शिक्षण के अनुभव पर उनकी अनुभव एवं शैक्षणिक योग्यता को देखते हुए प्रशिक्षण देकर पदोन्नत किया जाए।
0 आंगनबाड़ी केंद्र में कार्यरत कर्मियों को भविष्य निधि, जीवन निर्वाह भत्ता, सेवानिवृत्त भत्ता, उनके एवं उन पर आश्रितों को चिकित्सा सुविधा, उनके बच्चों के लिए शिक्षा की सुविधा लागू की जाए।
0 सुपरवाइजर का पद भरने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिकाओं से वरिष्ठता एवं शैक्षणिक योग्यता के आधार पर किया जाए।

Categorized in: