बैकुंठपुर/ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्णय के बाद भी प्रदेश में 40 हजार पद पर शिक्षा विभाग पदोन्नति नही कर सका है। इस विभागीय लापरवाही से पदोन्नति पर रोक लग गई है जिससे शिक्षकों में भारी रोष व्याप्त है। छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष संजय शर्मा, प्रदेश संयोजक सुधीर प्रधान, वाजिद खान, प्रदेश उपाध्यक्ष हरेंद्र सिंह, देवनाथ साहू, बसंत चतुर्वेदी, प्रवीण श्रीवास्तव, विनोद गुप्ता, डॉ कोमल वैष्णव, प्रांतीय सचिव मनोज सनाढ्य प्रांतीय कोषाध्यक्ष शैलेन्द्र पारीक व जिलाध्यक्ष उदय प्रताप सिंह ने कहा है कि शिक्षा विभाग की सबसे बड़ी पदोन्नति हेतु विभाग ने ठीक ठीक कोई भी तैयारी नही की। 46 हजार पदोन्नति हेतु संचालक द्वारा आज पर्यंत किसी भी प्रकार का पदोन्नति हेतु नियम निर्देश नही किया गया। जिसके कारण जेडी व डीईओ ने अलग अलग नियम की व्याख्या की व मनमर्जी की वरिष्ठता सूची बनाई। जिसके चलते पदोन्नति की प्रक्रिया में रुकावट डालते हुए मुख्यमंत्री  की मंशा पर पानी फिर गया।
संजय शर्मा ने कहा है कि मुख्यमंत्री ने गत 22 नवम्बर 2021 को वन टाईम रिलेक्सेशन की घोषणा कर 5 वर्ष की अवधि को घटाकर 3 वर्ष करते हुए सहायक शिक्षकों में पदोन्नति की आशा का संचार किया था। लेकिन आज लगभग 6 माह बीत जाने पर भी अधिकारियों की सुस्ती ने सहायक शिक्षकों की पदोन्नति की खुशी पर ग्रहण लगा दिया है। मुख्यमंत्री द्वारा केबिनेट में लिए गए निर्णय का समुचित क्रियान्वयन विभाग द्वारा नही कराया जा सका है।
ज्ञात हो कि अलग अलग नियम के चलते कुछ असंतुष्ट शिक्षकों ने कोर्ट में केस दाखिल कर पदोन्नति रोकने की अपील की थी। जिस पर माननीय न्यायालय ने पदोन्नति प्रक्रिया पर स्टे लगाकर शासन से जवाब मांगा था। समय पर शासन के अधिकारियों द्वारा कोर्ट में जवाब नहीं देने के चलते पदोन्नति बाधित होता रहा। अब पुनः तीसरी बार माननीय न्यायालय ने पदोन्नति पर स्टे को आगे बढाते हुए सुनवाई की तारीख 10 मई तय की है।


संजय शर्मा ने कहा कि प्रारम्भ से ही नियम में एकरूपता व समानता हेतु निर्देश देने की मांग प्रमुख सचिव, सचिव व डीपीआई से किये थे, किन्तु समय पर निर्देश जारी नही करने से संभाग व जिले में विभिन्नता परिलक्षित हुई। जिसके चलते बस्तर और दुर्ग संभाग ने अपने अलग नियम बनाकर पदोन्नति प्रक्रिया आगे बढ़ाई और आंशिक पदोन्नति भी की। जबकि रायपुर, बिलासपुर और सरगुजा संभाग में प्रक्रिया कछुआ चाल से जारी है। प्रदेश में व्याख्याता, शिक्षकं, प्रधान पाठक प्राथमिक व पूर्व मा शा में 40 हजार पदों पर पदोन्नति अवरुद्ध है।न्यायालय द्वारा जारी स्टे के सम्बंध में जवाब देने की समयसीमा में शासन के अधिकारियों द्वारा जवाब न देकर देर से जवाब दिया जाता है। जिसके कारण याचिकाकर्ता को जवाब देने समय मिलते रहता है। साथ ही पदोन्नति में रोक को आगे बढ़ाया जा रहा है जिससे शिक्षक संवर्ग में विभाग के खिलाफ भारी रोष व्याप्त है। पदोन्नति का लाभ शिक्षक संवर्ग को मिले यह जिम्मेदारी शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों की है। उच्च न्यायालय में लगे रोक को समय सीमा में समुचित जवाब देकर शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारी हटवाएं। इस हेतु एसोसिएशन ने 2 बार विभाग को पत्र भी लिखा है।

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