मनेंद्रगढ ! पृथ्वी पर जीवन उत्पत्ति का वैज्ञानिक प्रमाण राष्ट्रीय धरोहर गोंडवाना मेरिन फॉसिल्स को अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुसार विकसित एवं संरक्षित कर यदि समय रहते इसे सुरक्षित नहीं किया गया तब विश्व की अनमोल धरोहर नष्ट हो जाएगी और आने वाली पीढ़ियां हमें माफ नहीं करेंगी. भारतीय एवं अंतरराष्ट्रीय भूगर्भीय संस्थान के वैज्ञानिक तथ्यों द्वारा प्रमाणित ब्रह्मांड में पृथ्वी की उपस्थिति एवं जल के साथ जीवन निर्माण का एक जीता जागता साक्ष्य हमारी ही आंखों के सामने नष्ट हो रहा है और यह विशाल राष्ट्र आंखों में पट्टी बांधकर उनके संरक्षण के प्रति चिंतित नहीं है . उक्त ध्यानाकर्षण सहित संबोधन साहित्य एवं कला विकास संस्थान, मनेंद्रगढ़ के संबोधन विचार मंच के विभागाध्यक्ष बीरेंद्र श्रीवास्तव ने संस्था की ओर से अपनी चिंता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को एक पत्र प्रेषित किया है केंद्र सरकार को मेरीन फॉसिल के महत्व संरक्षण एवं विकास हेतु प्रेषित पत्र में इस फासिल्स के संरक्षण एवं पर्यटकों के आकर्षण हेतु कई सुझाव प्रेषित किए हैं जिसमें नष्ट हो रहे फॉसिल्स को पत्थरों की चौकोर संरचना बनाकर ऊपर से मैग्नीफाइंग ग्लास लगाकर संरक्षित करने का अनुरोध किया गया है. इस राष्ट्रीय धरोहर की उत्पत्ति, रचना, तथा पृथ्वी एवं जीवन के संबंध की जानकारी पत्थर के शिलालेख पर अंकित की जाए ताकि आने वाले पर्यटक एवं छात्र इस अनोखे प्राकृतिक रहस्य से परिचित हो सकें. संस्था के प्रयास से इसके प्रचार-प्रसार हेतु रेलवे स्टेशन पर लगाए गए बोर्ड की जानकारी भी केन्द्र को दी है. राष्ट्रीय एवं आंचलिक विकास हेतु विगत चार दशकों से निरंराष्ट्रीय एवं आंचलिक विकास हेतु विगत चार दशकों से निरंतर प्रयत्नशील यह संस्था कभी अमरकंटक के नर्मदा को बचाने हेतु बॉक्साइट उत्खनन लीज पर रोक लगाने में सफलता प्राप्त की है और कभी लाई में पनपते चंदनवन के संरक्षण हेतु केंद्र सरकार से सहायता दिलाई है. वन विभाग के जैव विविधता अधिनियम 2002 के अंतर्गत इसे संरक्षित करने हेतु पूर्व में कुछ प्रयास किए गए हैं किंतु वर्तमान स्थिति इतनी चिंताजनक है कि आज फासिल्स की कुछ गिनी-चुनी संरचना ही शेष बची है. कई बार ध्यानाकर्षण के बाद भी अधिकारियों की अनदेखी इस राष्ट्रीय विरासत को नष्ट कर देगी. संस्था का मानना है कि समय रहते इसका मूल्यांकन एवं संरक्षण आज की आवश्यकता है. प्रधानमंत्री को इसके शीघ्र संरक्षण हेतु ध्यानाकर्षण कराते हुए संस्था ने मनेंद्रगढ़ में एक प्लेनेटोरियम तारामंडल की स्थापना की भी मांग की है, जिसमें छात्रों , पर्यटकों एवं जिज्ञासुओं को ब्रह्मांड पृथ्वी एवं पृथ्वी पर जल और जीवन की उत्पत्ति के बारे में मनेन्द्रगढ़ के मेरीन फॉसिल्स के उदाहरण के माध्यम से समझाया जा सके. स्थानीय प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने हेतु संबोधन संस्था के प्रतिनिधि मंडल ने जिलाध्यक्ष कोरिया से मुलाकात कर अपनी चिंता से अवगत कराया है एवं इस फासिल्स के संरक्षण सहित प्लेनेटेरियम स्थापित करने हेतु प्रयास करने की मांग दोहराई है. इस प्रतिनिधि मंडल में बीरेंद्र श्रीवास्तव के साथ सतीश उपाध्याय एवं प्रमोद बंसल भी शामिल थे!

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