छत्तीसगढ़ सराफा एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री कार्यालय के नाम कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

अंबिकापुर। बड़े ब्रांडेड ज्वेलरी शोरूमों द्वारा किए जाने वाले भ्रामक प्रचार और आकर्षक प्रलोभनों के आड़ में आम उपभोक्ताओं को गुमराह होने का आरोप छत्तीसगढ़ सराफा एसोसिएशन ने लगाया है। इनका कहना है कि, इसका सीधा असर पारंपरिक सराफा व्यापारियों और स्वर्ण कारीगरों पर पड़ रहा है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में जिला सराफा इकाईयों द्वारा जिला कलेक्टर को प्रधानमंत्री कार्यालय, भारत सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
एसोसिएशन के सरगुजा संभाग कार्यकारी अध्यक्ष राजेश सोनी ने हस्ताक्षरयुक्त पत्र में लेख किया है कि, देश के हजारों छोटे-मझौले सराफा व्यापारी और लाखों स्वर्ण कारीगर पीढ़ियों से इस व्यवसाय से जुड़े हैं। बड़े शोरूमों के लुभावने विज्ञापनों के कारण उनका व्यापार लगातार प्रभावित हो रहा है। मांग की गई है कि पूरे देश में सराफा व्यापार के लिए समान और प्रभावी कानूनी व्यवस्था बनाई जाए। साथ ही स्थानीय सराफा व्यापारियों और कारीगरों के हितों की सुरक्षा के लिए आवश्यक नीतिगत और कानूनी प्रावधान किए जाएं।
एसोसिएशन ने वोकल फॉर लोकल और आत्मनिर्भर भारत का हवाला देते हुए कहा कि जब देश स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा दे रहा है, तब पारंपरिक सराफा व्यापार और स्वर्ण कला को बचाना भी जरूरी है। सराफा व्यवसाय केवल व्यापार नहीं, बल्कि देश की संस्कृति, परंपरा और रोजगार से जुड़ा हुआ है। ज्ञापन की प्रति केंद्रीय गृह मंत्रालय, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और बीेआईएस नई दिल्ली को भी भेजी गई है।
एसोसिएशन ने बीआईएस, एचयूआईडी हॉलमार्क और गोल्ड टेस्टिंग की सख्त निगरानी की मांग की है। सराफा व्यापारियों का कहना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो पारंपरिक ज्वेलरी व्यवसाय पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। सराफा एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि जब तक समान और पारदर्शी व्यवस्था नहीं बनती, उनका यह अभियान जारी रहेगा।

इसलिए भड़के ज्वेलरी कारोबारी
बिलासपुर के एक ब्रांडेड ज्वेलरी शोरूम में बीते 14 अगस्त को एचयूआईडी युक्त 22 कैरेट स्वर्ण आभूषण जांच के दौरान 20 कैरेट बताया गया। हालांकि पुन: जांच में उसे 22 कैरेट पाया गया। इसी घटना को लेकर सराफा एसोसिएशन ने इसे केवल एक प्रतिष्ठान का मामला न मानते हुए पूरे ज्वेलरी क्षेत्र से जुड़ी विसंगति माना है। एसोसिएशन का कहना है कि, यह विषय केवल किसी एक प्रतिष्ठान तक सीमित नहीं है, सीधे तौर पर स्वर्ण की शुद्धता की जांच की विश्वसनीयता से जुड़ा है। एसोसिएशन का आरोप है कि ब्रांडेड ज्वेलरी शोरूम सस्ता सोना, जीरो मेकिंग चार्ज, एक्सचेंज ऑफर जैसे प्रचार माध्यमों से ग्राहकों को आकर्षित करते हैं। उन्हें वैध प्रतिस्पर्धा से आपत्ति नहीं है, लेकिन भ्रामक व अधूरी जानकारी वाले दावों के प्रति नाराजगी है। इन्होंने पुश्तैनी कारीगरी एवं भारतीय स्वर्ण कला बोर्ड, स्वर्णकार कल्याण बोर्ड का गठन करने की मांग भी की है।

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