गिरजा ठाकुर
अंबिकापुर। रक्षाबंधन का त्योहार जिले भर में धूमधाम से मनाया गया। बहनें अपने भाईयों की कलाई पर निःस्वार्थ प्रेम, विश्वास और समर्पण का बंधन बांधकर उनके लंबी उम्र की कामना कीं। केंद्रीय जेल में भी भाईयों को राखी बांधने के लिए बहनों की कतार लगी रही। जेल मुख्यालय रायपुर से मिले निर्देश के अनुरूप यहां सारी व्यवस्थाएं करके रखी गई थीं। मिठाई के लिए नाम पर सिर्फ सोनपापड़ी ले जाने की अनुमति दी गई थी। कई बहनें इससे अनजान रहने के कारण अपने हाथों से बने पकवान को लेकर पहुंची थी, लेकिन इसे अंदर ले जाने की अनुमति नहीं दी गई।
सावन मास के पूर्णिमा को मनाए जाने वाले भाई-बहन के अटूट प्रेम और रिश्ते का प्रतीक रक्षाबंधन का पर्व सोमवार 9 अगस्त को हर्षोल्लास मनाया गया। बहनों ने अपने भाईयों के माथे पर चंदन तिलक के साथ कलाई पर रेशम की पवित्र डोर बांधकर अपनी रक्षा का वचन लिया। पूर्णिमा व रक्षाबंधन के कारण मंदिरों में पूजा-पाठ कर बहनों ने भाईयों के यशस्वी होने की कामना की। भाई ने भी रेशम के डोर की लाज को निभाने का संकल्प लिया। रक्षाबंधन पर्व को लेकर शहर का बाजार भी गुलजार रहा। केंद्रीय जेल बंद भाईयों के स्वास्थ्य सुरक्षा की दृष्टि से इस किसी प्रकार का विशेष पकवान व प्रतिबंधित सामान ले जाने की इजाजत नहीं थी। इसके पहले केंद्रीय जेल में राखी बनाने का प्रशिक्षण यहां की बंदी महिलाओं को दिलवाया गया था। ऐसे भाई जो किसी कारणवश अपनी बंदी, कैदी बहनों से मुलाकात के लिए नहीं आने की स्थिति में थे, उनके लिए बहनों के हाथों से बनी राखी को रजिस्टर्ड डाॅक से भेज दिया गया था।

सावन मास के पूर्णिमा को मनाए जाने वाले भाई-बहन के अटूट प्रेम और रिश्ते का प्रतीक रक्षाबंधन का पर्व सोमवार 9 अगस्त को हर्षोल्लास मनाया गया। बहनों ने अपने भाईयों के माथे पर चंदन तिलक के साथ कलाई पर रेशम की पवित्र डोर बांधकर अपनी रक्षा का वचन लिया। पूर्णिमा व रक्षाबंधन के कारण मंदिरों में पूजा-पाठ कर बहनों ने भाईयों के यशस्वी होने की कामना की। भाई ने भी रेशम के डोर की लाज को निभाने का संकल्प लिया। रक्षाबंधन पर्व को लेकर शहर का बाजार भी गुलजार रहा। केंद्रीय जेल बंद भाईयों के स्वास्थ्य सुरक्षा की दृष्टि से इस किसी प्रकार का विशेष पकवान व प्रतिबंधित सामान ले जाने की इजाजत नहीं थी। इसके पहले केंद्रीय जेल में राखी बनाने का प्रशिक्षण यहां की बंदी महिलाओं को दिलवाया गया था। ऐसे भाई जो किसी कारणवश अपनी बंदी, कैदी बहनों से मुलाकात के लिए नहीं आने की स्थिति में थे, उनके लिए बहनों के हाथों से बनी राखी को रजिस्टर्ड डाॅक से भेज दिया गया था।

अतिरिक्त पुलिस बल किए गए तैनात

केंद्रीय जेल में रक्षाबंधन के मौके पर बंदी भाईयों की बहनों और स्वजनों की लगने वाली भीड़ को देखते हुए जेल प्रबंधन की ओर से पूर्व में व्यवस्था सुनिश्चित कर ली गई थी। जेल के अधिकारी और प्रधान आरक्षक, प्रहरी पूरी व्यवस्था सुनिश्चित करने में लगे थे। वहीं सुरक्षा की दृष्टि से अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई थी। अव्यवस्थित यातायात की स्थिति न बने, इसके लिए जेल के गेट में यातायात पुलिस की भी तैनाती रही। रक्षासूत्र बांधने का क्रम 9 बजे से शुरू कर दिया गया था। जेल प्रबंधन की ओर से आरती के थाल की व्यवस्था की गई थी।

तहकीकात के बाद मिला अवसर

केंद्रीय जेल में राखी बांधने के लिए पहुंचने वाली बहनों के लिए आधार कार्ड लाना अनिवार्य किया गया था, फिर भी अज्ञानतावश कुछ बहनें बिना किसी परिचयपत्र के तो कुछ मोबाइल में आधारकार्ड के खींचे गए फोटो के साथ पहुंची थी। जिन बहनों के पास पहचान के लिए मोबाइल में भी प्रपत्र नहीं था, उन्हें दुविधाजनक स्थिति से गुजरना पड़ा। हालांकि दूर-दराज से आई बहनें निराश न हों, और बंदी भाई भी बहन के आने की राह न देखते रह जाएं, इसे देखते हुए जेल प्रबंधन पूरी तहकीकात के बाद उन्हें बंदी भाईयों से मिलने का अवसर प्रदान किया।

सोनपापड़ी, राखी ले जाने की छूट

जेल मुख्यालय से मिले निर्देश के अनुसार बंदी भाईयों से मिलने पहुंची बहनों और बंदी बहनों से मिलने आए भाईयों को 100 ग्राम सोनपापड़ी और राखी ले जाने की छूट दी गई थी। जांच के बाद इन्हें जेल के गेट के अंदर प्रवेश दिया जा रहा था। इन्हें राखी बांधने और बंदी भाईयों से मुलाकात करने के लिए अधिकतम 20 मिनट का समय दिया गया था। पहले चरण में बहनों को राखी बांधने के लिए प्राथमिकता दी गई। बंदी बहनों से मुलाकातियों की कम संख्या को देखते हुए अपरान्ह 3 बजे के बाद का समय इनके लिए निर्धारित किया गया था।

केंद्रीय जेल में 1980 बंदी हैं निरूद्ध

केंद्रीय जेल में वर्तमान में कुल 1980 बंदी निरूद्ध हैं, इनमें 120 महिलाएं हैं। पुरूष बंदियों की सर्वाधिक 1860 संख्या होने के कारण जेल में बंदी भाईयों को राखी बांधने के लिए काफी संख्या में महिलाएं पहुंची थीं। अगर किसी बंदी भाई की 4 या अधिक बहनें हैं, तो उन्हें दो-दो के समूह में अलग-अलग मुलाकात करने के लिए पर्ची दी जा रही थी, लेकिन एक बार में दो बहनें ही अपने भाई से मुलाकात कर सकती थीं। छोटे बच्चों को पर्ची में काउंट नहीं किया जा रहा था।

सभा भवन में एक बार में 100 लोगों के बैठने की व्यवस्था

केंद्रीय जेल में निरूद्ध बंदियों से भाई-बहनों के मुलाकात दौरान जेल मुख्यालय से मिले निर्देश का पालन किया जा रहा है। जेल के सभा भवन में एक बार में 100 लोगों के बैठने की क्षमता है। अगर कोई भाई-बहन राखी, सोनपापड़ी लेकर नहीं पहुंचे हैं, तो उन्हें जेल से ही यह सुविधा प्रदान की जा रही है। मुलाकातियों की सूची के साथ उनका आधार नम्बर लिखा जा रहा है। पूर्व में पर्ची कटवाने के लिए जेल के गेट पर एक काउंटर बनाया गया था, लेकिन बंदी भाईयों से मिलने के लिए पहुंची बहनों की बढ़ती संख्या को देखते हुए दो और काउंटर पर्ची लेने के लिए बनाया गया है।
अक्षय सिंह राजपूत, अधीक्षक, केंद्रीय जेल अंबिकापुर

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