राजेन्द्र ठाकुर/ बलरामपुर

बलरामपुर जिला मुख्यालय स्थित संयुक्त जिला कार्यालय परिसर इन दिनों अव्यवस्था का प्रतीक बन चुका है। पार्किंग व्यवस्था के नाम पर यहां जो स्थिति है, उसे देखकर कोई भी अचंभित रह जाए। वाहन जहां-तहां, जैसे-तैसे खड़े हैं न कोई नियम, न कोई निगरानी। जिम्मेदारो की ढिलाई और लापरवाही के चलते यह परिसर अब अव्यवस्थित वाहनों का अड्डा बन गया है।
शुरुआती दिनों में कुछ समय के लिए पार्किंग व्यवस्था संभालने हेतु सुरक्षा गार्ड जरूर तैनात किए गए थे, लेकिन वह भी कुछ ही दिनों में जिम्मेदारी से किनारा कर गए। आज हालत यह है कि सुरक्षा गार् नज़र में नहीं है और पार्किंग की व्यवस्था पूर्णत भगवान भरोसे चल रही है।
जिला कलेक्टर कार्यालय होने के कारण यहां प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में अधिकारी, कर्मचारी, शिकायतकर्ता और आम नागरिक आते हैं।
अपनी दोपहिया चार पहिया वाहनोको जहा मन करे वहीं पर खड़े कर देते हैं। नतीजापूरा परिसर अस्त-व्यस्त नजर आता है।
सबसे बदहाल स्थिति दोपहिया वाहनों की पार्किंग की है। वाहन चालक मनमाने ढंग से बाइक खड़ी कर कार्यालय में प्रवेश कर जाते हैं। कोई रेखांकन नहीं, कोई नियंत्रण नहीं। कार्यालय परिषद के बाहर भी यही हाल है जहां जगह मिली, वहीं वाहन खड़े कर दिए जाते हैं। इस अव्यवस्था से जिला अधिकारयो के वाहनों को आने-जाने में भारी परेशानी झेलनी पड़ती है।
संयुक्त जिला कार्यालय में प्रवेश करते ही लगता है जैसे किसी पार्किंग स्थल में कदम रख दिया हो न कि प्रशासनिक दफ्तर में।” सवाल उठता है कि जिले के सबसे महत्वपूर्ण भवन में यह हाल आखिर क्यों है? और जिम्मेदारों को इस और नजर क्यों नहीं पड़ती?

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