निजी अस्पताल के बिचौलियों से सौदेबाजी की भेंट चढ़ रहे मरीज, वीडियो बना रहे युवक से हुज्जतबाजी  

अंबिकापुर। शासकीय अस्पतालों में मरीजों को लाने व रेफर करने पर हायर सेंटर तक पहुंचाने के लिए संजीवनी 108 एक्सप्रेस की सुविधा शासन ने दी है, जो चंद रुपयों के लिए निजी सेक्टर के अस्पतालों व एंबुलेंस के चालकों से होने वाली सौदेबाजी की भेंट चढ़ रही है। सरकारी साधन से शासकीय अस्पतालों तक मरीजों को लाने के बाद इन्हें निजी अस्पतालों तक ले जाने के लिए सक्रिय बिचौलियों के सुपुर्द किया जा रहा है, जो निजी एंबुलेंस से बेखौफ इन्हें ले जा रहे हैं। ऐसे में संजीवनी एक्सप्रेस के जिम्मेदारों की निजी अस्पतालों से नाता रखे निजी एंबुलेंस के चालकों से साठगांठ जैसी बातें खुलकर सामने आ रही हैं। वहीं सरकारी अस्पतालों में मिलने वाली निश्शुल्क उपचार सुविधा का लाभ मरीजों को कैसे मिलेगा, इसे लेकर प्रश्नचिन्ह लग रहा है। ऐसे मामले आए दिन सामने आ रहे हैं।


मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आपातकालीन चिकित्सा परिसर तक मरीज को लाने के बाद बिना चिकित्सक को दिखाए निजी एंबुलेंस में शिफ्ट करने का मामला पूर्व में अस्पताल प्रबंधन के संज्ञान में आया था, इसके बाद निजी सुरक्षा गार्डों की ड्यूटी लगाई गई थी। निजी एंबुलेंस का अस्पताल परिसर में प्रवेश न हो, इसके लिए यह सुविधा बनाई गई थी। अस्पताल परिसर में आने वाली एंबुलेंसों की एंट्री रजिस्टर में करने की इन्हें जिम्मेदारी दी गई है। इसके बाद भी मरीजों की सरकारी एंबुलेंस से निजी एंबुलेंस में शिफ्टिंग का सिलसिला थमा नहीं है। बुधवार की शाम ऐसा ही मामला मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सामने आया। प्रतापपुर में मंडी प्रांगण में काम करने के दौरान तीन ठेकेदार के कर्मचारी 33 केवी हाइटेंशन तार के संपर्क में आ गए थे, इनमें एक की स्थिति काफी गंभीर थी। इन्हें प्रतापपुर स्वास्थ्य केंद्र से रेफर करने पर संजीवनी 108 से मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर लाया गया। संजीवनी के कर्मचारी जिंदगी-मौत से जूझ रहे मरीजों का अस्पताल के आपातकालीन चिकित्सा परिसर में उपचार कराने के बजाय निजी एंबुलेंस की मदद से इन्हें निजी अस्पताल भेज दिए। पूरे मामले का एक व्यक्ति मोबाइल से वीडियो बना रहा था, यह देख निजी एंबुलेंस का संचालन करने वाला हुज्जतबाजी पर उतारू हो गया, वह स्वयं को पुलिस कर्मी का पुत्र बता रहा था। बाद में कुछ लोगों के हस्तक्षेप से विवाद का पटाक्षेप हुआ।


इन्हें लाया गया था मेडिकल कॉलेज अस्पताल
प्रतापपुर मंडी प्रांगण में स्ट्रीट लाइट लगाने के दौरान हाइटेंशन तार की चपेट में लोहे का घोडिय़ा आ गया था, जिससे मेराज खान, राजन व अजय चपेट में आ गए। इन्हें प्रतापपुर से रेफर करने पर संजीवनी 108 एक्सप्रेस क्रमांक सीजी 04 एनडी 6187 से अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल लाया गया था। इनका दायित्व था कि वे एंबुलेंस में लाए गए मरीज को आपातकालीन चिकित्सा परिसर में चिकित्सक तक पहुंचाते और उनकी पर्ची काउंटर से कटवाते लेकिन इन्होंने आपात चिकित्सा के लिए मौजूद डॉक्टर को दिखाने के बजाए इन्हें निजी एंबुलेंस के सुपुर्द कर दिया गया।


जबरन मरीज को ले गए-जंघेल


संजीवनी 108 के जिला नोडल अधिकारी लोकेश्वर जंघेल का कहना है कि बुधवार की रात को प्रतापपुर से संजीवनी एक्सप्रेस के कर्मचारी मरीजों को मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर लेकर आए थे। अस्पताल परिसर के अंदर एंबुलेंस के घुसते ही निजी एंबुलेंस का संचालन करने वाले पहुंचे और मरीजों को जबरदस्ती अपने एंबुलेंस में ले गए। जबकि संजीवनी का पॉयलट मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रवेश करने के बाद आपातकालीन चिकित्सा परिसर के आगे कुछ देर एंबुलेंस को खड़ा रखा था, बाद में अस्पताल परिसर से एंबुलेंस लेकर गेट से निकला और निजी एंबुलेंस के सुपुर्द मरीज को कर दिया।

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