राजीव गांधी शिक्षा मिशन में बड़े पैमाने पर करोड़ों की खरीदी से जुमामलाड़ा बताया जा रहा

अंबिकापुर। सरगुजा जिले में वर्ष 2011-12 में हुए करोड़ों रुपये के फर्नीचर घोटाले की फाइल 14 वर्ष बाद खुल गई है। एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने मंगलवार को राजीव गांधी शिक्षा मिशन कार्यालय में दबिश देकर दस्तावेजों को खंगाला। बताया जा रहा है कि, दबिश के दौरान कार्यालय का एक जिम्मेदार गायब हो गया, जिसके तलाश में टीम रवाना हुई थी। शिक्षा मिशन में फर्नीचर, किताब और मध्यान्ह भोजन में घोटाले के आरोप पहले भी लगते रहे हैं। एसीबी की औचक दबिश से विभाग में हड़कंप मच गया है।

बता दें कि, वर्ष 2011-12 में राजीव गांधी शिक्षा मिशन के तहत स्कूलों के लिए फर्नीचर खरीदी में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का आरोप लगा था। शिकायत थी कि बाजार दर से कई गुना अधिक कीमत पर घटिया क्वालिटी का फर्नीचर खरीदा गया और भुगतान कर दिया गया। मामले में करोड़ों के भ्रष्टाचार की आशंका जताई गई थी। विभाग से बार-बार दस्तावेज मांगे जा रहे थे, लेकिन तत्कालीन जिम्मेदार टाल-मटोल करने में लगे थे। दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने पर एसीबी की टीम मंगलवार की दोपहर राजीव गांधी शिक्षा मिशन कार्यालय के रिकॉर्ड पहुंची। टीम फर्नीचर खरीदी से जुड़ी निविदा, भुगतान, स्टॉक रजिस्टर और डिजिटल फाइलों की तहकीकात कर रही है।

2011-12 में हुए इस घोटाले में विभाग के कई तत्कालीन अधिकारियों और दर्जन भर फर्मों के नाम सामने आये थे। जांच में कुछ जिम्मेदारों की भूमिका संदिग्ध थी। मामले में आईपीसी की धारा 420, आपराधिक षड्यंत्र की धारा 120(बी) और पीसी एक्ट की धारा 13(1), 13(2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराध दर्ज किया गया है। राजीव गांधी शिक्षा मिशन के मौजूदा अधिकारियों ने फिलहाल इस पर कुछ भी कहने से बचते रहे। इसके पीछे कारण वर्षों पुराने मामले का होना भी है। इनका कहना है कि एसीबी अपने स्तर पर पुरानी फाइलों को खंगाल रही है।

घंटों खंगालते रहे दस्तावेज

दोपहर करीब 11.30 बजे पहुंची एसीबी की टीम टेंडर फाइल, वर्क ऑर्डर, बिल वाउचर, भुगतान पत्रक के साथ ही डिजिटल दस्तावेज के जांच में घंटों लगी रही। कंप्यूटर हार्ड डिस्क, ई-फाइल, भुगतान का डिजिटल रिकॉर्ड, स्कूलों में सप्लाई हुए फर्नीचर के भौतिक सत्यापन जैसी प्रक्रिया इनके द्वारा पूरी की जा सकती है। जब्त दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच के साथ भुगतान और सप्लाई में अंतर मिलने पर आरोपी अधिकारियों और फर्म संचालकों से पूछताछ शुरू की जा सकती है। ऐसे में 14 साल से ठंडे बस्ते में पड़ी फाइल पर अब कार्रवाई की उम्मीद जगी है।

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