छ.ग.फ्रंटलाइन
अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग द्वारा गुरुवार को राजमोहनी देवी भवन में संभाग स्तरीय कार्यशाला सह प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। कार्यशाला का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन व राज्यगीत के साथ किया गया। कार्यशाला में मानव तस्करी, सायबर क्राइम व महिलाओं के लैंगिक उत्पीडऩ के विभिन्न पहलुओं पर बारीकी से जानकारी दी गई व इनसे संबंधित अपराधों के बचाव हेतु कानूनी प्रावधान को बताया गया। कार्यशाला में बताया गया कि आयोग ने पिछले तीन वर्ष में 162 सुनवाई, 12 जनसुनवाई कर 111 प्रकरणों का निराकरण कर राहत पहुंचाया है।
मुख्य अतिथि के आसंदी से कार्यशाला को संबोधित करते हुए डॉ.किरणमयी नायक ने कहा कि आयोग की कोशिश है कि लोगों तक नि:शुल्क राहत पहुंचे। महिलाएं व बालिकाएं अपने ऊपर होने वाले किसी भी तरह की उत्पीडऩ या शोषण को न दबाएं बल्कि उनके खिलाफ आवाज जोर-शोर से उठाएं। अन्याय का प्रतिरोध जरूर करें, आस-पास किसी महिला पर कोई घटना होती है उस पर भी प्रतिरोध करें। अपनी बात आयोग तक पहुंचाने के लिए एक पत्र भर लिखना है, इसके बाद आयोग नि:शुल्क पूरी सहायता करेगा। आयोग में प्रकरण आने के बाद किसी अन्य संस्थान में जाने की आवश्यकता नहीं है, जिससे भटकाव से भी बचा जा सकता है। आयोग के बाद केवल उच्च न्यायालय में ही अपील होती है। आयोग के सचिव आनंद प्रकाश किस्पोट्टा ने आयोग गठन के उद्देश्य, कार्यप्रणाली अब तक हुई सुनवाई व निराकृत प्रकरणों की संख्या की जानकारी दी। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मधुलिका सिंह ने मानव तस्करी अपराध तथा इसे रोकने के कानूनी प्रावधान व सामाजिक दायित्व के बारे में बताया। सुनन्दा ढेंगे ने अपराध साक्ष्य संकलन व सुरक्षा, अतिरिक्त जिला लोक अभियोजक शमीम रहमान ने लैंगिक उत्पीडऩ व शोषण तथा एसडीओपी अखिलेश कौशिक ने सायबर क्राइम की रोकथाम व कानूनी पहलुओं पर प्रकाश डाला। कार्यशाला में महिला आयोग की सदस्य नीता विश्वकर्मा, अर्चना उपाध्याय, बालो बघेल, जिला पंचायत सदस्य सरला सिंहदेव, नगर निगम आयुक्त प्रतिष्ठा ममगई, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विवेक शुक्ला सहित संभाग व जिलों के पंचायत प्रतिनिधि, पार्षद, अन्य जनप्रतिनिधि, पुलिस एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी तथा बड़ी संख्या में महिलाएं व बालिकाएं उपस्थित थीं।
लिव-इन रिश्ते की ओर बढऩा समझदारी नहीं
डॉ.किरणमयी नायक ने कहा वर्तमान में बालिग लड़का व लड़की लिव-इन रिश्तों की ओर बढ़ रहे हैं, जो समझदारी भरी नहीं है, इससे बहुत जल्द रिश्ते टूट जाते हैं। विवाह एक महत्वपूर्ण सामाजिक दायित्व है। विवाह का फैसला बहुत ही परिपक्वता से सोच विचार कर करना चाहिए। उन्होंने कहा कार्यशाला में बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है, जिसे गंभीरता पूर्वक चिंतन व आत्मसात करें।
आयोग कर रहा ऐतिहासिक काम-कलेक्टर
कलेक्टर कुन्दन कुमार ने कहा महिला उत्पीडऩ के उन्मूलन, रोकथाम तथा उनके आवाज को उठाने व सशक्त बनाने में आयोग ऐतिहासिक काम कर रहा है। आयोग महिलाओं को अपने अधिकार के प्रति सजग रहने तथा अपनी बात रखने का प्लेटफार्म देता है। महिला प्रार्थी की समस्या सुनने भर से उसकी आधी समस्या का समाधान हो जाता है। न्यायालयीन प्रक्रिया से ज्यादा उपयुक्त दोनों परिवारों को समझाइश देकर साथ रहने के लिए राजी करना होता है। महतारी न्याय रथ के माध्यम से आयोग द्वारा महिलाओं को जागरूक किया जा रहा है। इस रथ में वकील व कर्मचारी भी होते हैं, जो जरूरत के अनुसार सहायता करते हैं।

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