रामानुजगंज(विकाश कुमार केशरी)- नगर सीमा से करीब 1 किलोमीटर दूरी पर स्थित रामानुजगंज जलाशय जिसे बोहला बांध के नाम से जाना जाता है जो नगर के जल स्तर को बनाए रखती है वही इसे सुंदर स्वरूप देने के लिए करीब 3 वर्ष पूर्व तत्कालीन कलेक्टर अवनीश शरण के द्वारा यहां का कई बार दौरा करने के बाद बांध के सौंदर्यीकरण के लिए मनरेगा के तहत 50 लाख रुपए स्वीकृत किए थे जिसे जल संसाधन विभाग के द्वारा काम कराया गया। स्थिति यह है कि सौंदर्यीकरण के नाम पर 50 लाख खर्च कर दिए गए परंतु मौके पर 15 लाख का भी कार्य नहीं हुआ जो कार्य हुआ वह भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा गया अभी स्थिति ऐसी है कि जो निर्माण हुआ था अब टूटने लगा है।

                                 

  गौरतलब है कि रामानुजगंज जलाशय सौंदर्यीकरण के लिए सन 2016-17 में तत्कालिक कलेक्टर अवनीश शरण के द्वारा मनरेगा के तहत 50 लाख स्वीकृत किए थे। वे चाहते थे कि यहां एक बेहतर वाच टावर का निर्माण हो ताकि पूरे जंगल का सुंदर दृश्य उस पर चढ़कर देखा जा सके वही अन्य सौंदर्यीकरण कार्य के लिए कार्य योजना बनी थी। जिसकी देखरेख स्वयं तत्कालीन कलेक्टर अवनीश शरण कर रहे थे मनरेगा के तहत 50 लाख रुपए स्वीकृत करने के बाद वह कई बार यहां दौरा में भी आए एवं जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को बेहतर कार्य करने के लिए कहा था परंतु इसके बाद भी मनरेगा के तहत स्वीकृत राशि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई निर्माण के दौरान कई बार जनप्रतिनिधियों के द्वारा निर्माण की गुणवत्ता को लेकर आवाज उठाया परंतु इसे विभाग के अधिकारियों के द्वारा अनसुना कर दिया गया एवं गुणवत्ता विहीन निर्माण कर दिया गया। जिसका नतीजा यह हुआ कि निर्माण के बाद ही सौंदर्यीकरण के नाम पर बना वॉच टावर टूटने लगा वही फर्श भी टूटने लगे। कागजों में तो पूरी राशि खर्च कर दी गई परंतु मौके पर 15 लाख के काम भी बहुत मुश्किल से हुए हैं यदि 15 लाख के कार्य भी ढंग से होते तो यह कार्य देखने लायक होता।

भ्रष्टाचार को लेकर नगर में है आक्रोश- जिस प्रकार से बोहला बांध की उपयोगिता नगर वासियों के लिए है वहीं उसके नाम से आए सौंदर्यीकरण की राशि का बंदरबांट जल संसाधन विभाग के अधिकारी कर्मचारियों  के द्वारा किया गया इसे लेकर नगर वासियों में गहरा आक्रोश है।

वेंडर के नाम से हुआ फर्जी भुगतान- जल संसाधन विभाग के द्वारा भ्रष्टाचार का आलम यह है कि जो राशि बांध के सौंदर्यकरण में लगनी चाहिए उसे मटेरियल के नाम पर वेंडर के नाम से फर्जी भुगतान कर दिया गया। यदि सौंदर्यीकरण के नाम पर आए राशि का सही उपयोग होता तो आज जल संसाधन विभाग का यह निर्माण देखने लायक होता।

न जांच न कार्यवाही तो हौसले बुलंद होंगे ही- जिस प्रकार से जल संसाधन विभाग में फर्जीवाड़ा का खेल किया जाता है वही इसकी न ढंग से जांच होती है न कार्यवाही होती है तो हौसले बुलंद होंगे ही एवं भ्रष्टाचार इसी प्रकार जारी रहेगा एवं इसका खामियाजा आम आदमी को भुगतना पड़ेगा। यहां प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में लोग आते हैं जो भ्रष्टाचार को प्रत्यक्ष रूप से देखते हैं ऐसे में उच्च अधिकारी कैसे नहीं देख पाते यह समझ से परे है।

इस संबंध में वार्ड क्रमांक 15 की पार्षद एवं पूर्व नगर पंचायत उपाध्यक्ष उषा गुप्ता ने कहा कि यह बात हमारे वार्ड के कि नजदीक है जहां पर जल संसाधन विभाग के द्वारा सौंदर्यीकरण के लिए आय 50 लाख रुपय राशि का बंदरबांट किया गया है। यदि 15-20 लाख रुपए भी खर्च किए जाते तो यहां हुआ निर्माण देखने लायक रहता। इसकी जांच करवा कर कार्यवाही होनी चाहिए ताकि भ्रष्टाचार पर लगाम लग सके।

वार्ड क्रमांक 14 के पार्षद राजेश सोनी ने कहा कि  बोहला बांध नगर के जल स्तर को बनाए रखता है। इसके के सौंदर्यीकरण के नाम पर जल संसाधन विभाग के द्वारा खुलेआम भ्रष्टाचार किया गया है। निर्माण देखने से ही इसके गुणवत्ता का पता चलता है कि किस प्रकार से खुलेआम गुणवत्ता विहीन कार्य कराया गया है। इसकी जांच करवा कर कठोर कार्यवाही की जानी चाहिए।

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