रामानुजगंज(विकाश कुमार केशरी)- महाराष्ट्र में काम करने वाले असम के मजदूरों को जब घर जाने के लिए बस का किराया 3 लाख रुपए बस मालिक ने बताया तो 29 मजदूरों ने पाच-पाच हजार का साइकिल खरीद कर साइकिल से ही 3000 किलोमीटर अपने घर तक जाने के लिए निकल पड़े 9 दिन बाद रामानुजगंज पहुंचे।                                                        

असम के सोनितपुर जिला के मिच्छामारी गांव के मजदूर सुजीत नाग, बिट्टू हमदा, अर्जुन खटिया, रत्नेश गौड़ जो महाराष्ट्र के रायगढ़ जिला में बॉसीपट्टा गांव में फर्नीचर नेशनल प्लाइवुड कंपनी में काम करते थे वहां काम बंद होने के बाद उनके सामने खाने-पीने की गंभीर समस्या खड़ी हो गई थी जिसके बाद वे घर जाने के लिए कई बस मालिकों से बात किए तो कम से कम 3 लाख रुपय तक में सब तैयार हो रहे थे जाने को परंतु इतना देना मजदूरों के लिए संभव नहीं था जिसके   पाच पाच हजार रुपए 29 मजदूरों ने 29 साइकिल खरीदा एवं साइकिल से ही वहां से निकल पड़े जो 9 दिनों के बाद आज रामानुजगंज पहुंचे। नहीं दिया तो 2 माह का पगार- फर्नीचर नेशनल प्लाइवुड कंपनी में काम करने वाले आसाम के मजदूरों को दो-दो माह का वेतन महाराष्ट्र में नहीं मिला। इससे उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा साइकिल खरीदने के लिए भी उन्हें अपने घर से पैसा बैंक अकाउंट में मंगाना पड़ा तब जाकर वहां से वे साइकिल से निकल सके। छत्तीसगढ़ की तारीफ- महाराष्ट्र से चले असम के मजदूरों ने छत्तीसगढ़ की तारीफ की उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में हमें साइकिल से चलते देख यहां के पुलिस वालों ने कुछ दूरी तक ट्रक में बिठा दिया वही यहां नागरिकों खाने पीने को भी मिला। जब छत्तीसगढ़ के सरहद में भी उन्हें गरम गरम भोजन मिला तो वे बहुत खुश हुए।

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