राजेन्द्र ठाकुर (राजू) बलरामपुर

बलरामपुर जिला मुख्यालय पुलिस विभाग में एक ही आर.आई. के जिम्मेें दोहरा प्रभार होना और आठ टी.आई. का लाईन में बने रहना अनेक सवालों के घेरे में है और संदेहों को जन्म दे रहा है। इन सवालों से परिचित होने के बाद भी विभाग की इस ओर से पूरी तरह अनदेखी संदेहों को जन्म दे रहा है। दूसरी ओर इसे लेकर विभाग के अंदर भी असंतोष की सुगबुगाहट शुरू होने की खबर है।
उल्लेखनीय है कि राज्य का सीमावर्ती जिला बलरामपुर होने के कारण अपने अस्तित्व में आने से पहले से ही संवेदनशील क्षेत्र माना जाता रहा है। नक्सली सक्रियता यहां आज भी बनी हुई है। अभी कुछ दिन पहले ही यहां की सीमा स्थित पुलिस कैंप द्वारा आईडी बरामद किया गया था। इसके अलावा भी यहां आए दिन कोई ना कोई अपराधी गतिविधियों के संचालित होने की खबरें आती रहती हैं। पशु तस्करी, गांजा की तस्करी, लकड़ी तस्करी, नशीली दवाओं की तस्करी, शराब तस्करी, धान तस्करी, अवैध रूप से वाहनों का आना-जाना भी कई बार सुर्खियां बनी चुकी हैं, किंतु इस पर रोक लगाने की दिशा में आज तक कोई ठोस कदम उठाने के प्रयास हुए हो, नहीं लगता है। पशुओं और अवैध नशीली दवाओं की तस्करी इस जिले की सबसे बड़ी समस्या है। इसमें संलिप्त अपराधी तो कई बार पकड़े गए हैं, किंतु मुख्य आरोपी तक पहुंच पाने में यहां की पुलिस आज तक नाकाम ही रही है। सालों पुरानी समस्या के बीच यहां कई अफसर आए और चले गए पर इस पर अंकुश नहीं लग पाया। छोटे-मोटे अपराधों के बीच कई बड़े और गंभीर अपराधों की भी गुत्थी आज तक अनसुलझी है, जो सुलझे भी तो अधिकांश मामलों के तार झारखंड से ही जुड़े हुए पाए गए। फिर भी सीमावर्ती क्षेत्रों की निगरानी में पुलिस की उदासीनता समझ से परे हैं। ऐसे में योग्यकर्मियों की अनदेखी करते हुए एक ही व्यक्ति को दोहरा प्रभार सौैंपना, साफ-साफ इशारा करता है कि उक्त व्यक्ति को उच्च स्तर का ब्रह्मास्त्र प्राप्त है।
कहना ना होगा कि यह जिला तीन राज्य की सीमाओं पर बसा हुआ है और अति संवेदनशील है। सड़कों की खस्ताहालत तो ऐसी है कि लोग आज भी कोरोना काल की तरह मास्क लगाकर चलने को विवश है। सड़कों की दुर्दशा के कारण एक ओर पुलिस जहां पेट्रोलिंग से बचती है, वहीं दूसरी ओर अपराधी तत्व इसका भरपूर फायदा उठा रहे हैं। आम जनता पुलिस से चाहती है कि यहॉ आमजन को भरपूर सुरक्षा मिले। जिला पूरी तरह अपराध मुक्त हो। परंतु ठीक उल्टे यहां की हालत ऐसी है कि जिला मुख्यालय में ही कितने बाहरी लोग आकर रहते हैं। कहां से आए हैं? क्या करते हैं इसका भौतिक सत्यापन भी नहीं किया जा सका। दरअसल जब एक ही व्यक्ति को कई दायित्व सौंप दिया जाए और कई लोगों को लाइन में रख दिया जाए तो ऐसी अव्यवस्था स्वाभाविक है और बलरामपुर जिले में आज यही हो रहा है।

अतिरिक्त प्रभार में एक वर्षों से

लगभग एक वर्ष जिले के तत्कालीन कप्तान लाल उमेद सिंह 16 दिसम्बर 2023 को प्रशासनिक व्यवस्था कोे दृष्टिगत रखते हुए एक ही नगर निरीक्षक को रक्षित केन्द्र के अलावा यातायात विभाग का प्रभार सौंप दिया था जो आज भी यथावत है। इस बीच अनेक टी.आई. की यहॉ पदस्थापना हुई मगर दो विभागों को प्रभार चला रहे है इन अधिकारी को नहीं हटाया गया।

एन.एच.343 के बर्बादी का कारण कौन?

एनएच 343 खस्ताहाल सड़को के पीछे टैफिक पुलिस की भी महत्वपूर्ण भुमिका मानी जा रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि यहॉ की एन.एच.343 से दर्जनों ओव्हरलोड गाड़ियां गुजरती हैं, मगर हर चौक-चौराहों में ड्यूटीरत ट्रैफिक पुलिस के मौजूदगी के बावजूद भी उन ओेव्हरलोड गाड़ियों पर कार्यवाहियां करते नजर नहीं आते। ओव्हरलोड वाहनों से एन.एच.पूरी तरह जर्जर हो चुका है। हर एक-दो वर्षों एन.एच.343 की मरम्मत तो की जाती है लेकिन ओव्हरलोड वाहन 6 से 8 महीने में ही फिर से बर्बाद कर देती है। एन.एच.343 राजपुर से लेकर रामानुजगंज तक बूरी तरह गड्डो में तब्दील हो गया है। हाय-हाय करके लोग इन सड़को से गुजर रहे हैं। कोरोनाकाल की तरह लोग मॉस्क पहनकर वाहन चलाने को मजबूर हैं। छोटी-मोटी दुर्घटनाएं प्रतिदिन देखने को मिल रहा है, किंतु ओव्हरलोड वाहनों पर कार्यवाही होते नजर नहीं आ रहा है।

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