रामानुजगंज(विकाश कुमार केशरी)- एक ओर जहां शासन शासकीय शैक्षणिक संस्थाओं में पढ़ने वाले बच्चों को अच्छी से अच्छी शिक्षा देने के लिए सरकार लाखों रुपए खर्च करती है तो वहीं ग्रामीण अंचलों एवं शहरी क्षेत्रों में निजी शैक्षणिक संस्थाएं भी कम पैसे में बेहतर शिक्षा देती हैं जिस कारण लोगों का झुकाव शासकीय शैक्षिक संस्था से ज्यादा निजी शैक्षणिक संस्थाओं की ओर होता है वही लॉकडाउन के बाद एवं लगातार निजी शैक्षणिक संस्थाओं के बंद रहने के कारण निजी शैक्षणिक संस्था चलाने वाले संचालक एवं यहां पढ़ाने वाले सैकड़ों शिक्षकों की स्थिति अत्यंत दयनीय होते जा रही है इस ओर भी शासन को गंभीरता से ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।
गौरतलब है कि बलरामपुर रामानुजगंज जिले के अधिकांश गांव में निजी शैक्षणिक संस्थाएं संचालित हो रही है जिनके द्वारा कम पैसे में ग्रामीण अंचलों में बेहतर शिक्षा दी जा रही है वहीं जिले के निजी शैक्षणिक संस्थाओं का रिजल्ट भी बेहतर रहता है वहीं निजी शैक्षणिक संस्थाओं में पढ़ाने वाले शिक्षकों के द्वारा बेहतर से बेहतर शिक्षा दीया जाता रहा है जिस कारण गांव में लोगों का शासकीय शिक्षण संस्था से ज्यादा निजी शैक्षणिक संस्थाओं की ओर झुकाव रहता है परंतु विगत 1 वर्ष से निजी शैक्षिक संस्थाओं के बंद हो जाने से निजी शैक्षणिक संस्थाओं के सभी शिक्षक बेरोजगार हो गए हैं वहीं अब उनके सामने आजीविका की गंभीर समस्या खड़ी हो रही है परिवार चलाना काफी मुश्किल हो रहा है। निजी संस्थाओं में रहने वाले शिक्षकों के प्रति भी शासन को गंभीरता से ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।

कोचिंग ट्यूशन भी है बंद…… करोना संक्रमण के खतरे को लेकर ट्यूशन एवं कोचिंग भी बंद है ग्रामीण क्षेत्रों में निजी शैक्षणिक संस्थाओं में अपनी सेवाएं देने वाले शिक्षक कम पैसे में भी यहां पढ़ा लेते हैं जिसका वे मेंटेनेंस ट्यूशन एवं कोचिंग से करते थे परंतु कोचिंग एवं ट्यूशन भी बंद है।

निजी स्कूल संचालकों की भी स्थिति हो गई है दयनीय….. एक ओर जहां निजी शैक्षणिक संस्थाओं में पढ़ाने वाले शिक्षकों की आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय हो गई है वहीं निजी स्कूल संचालकों की भी आर्थिक कमर टूट गई है जिले में अधिकांश निजी शैक्षणिक संस्थाएं किराए के मकान में संचालित है ऐसे में स्कूल बंद करके किराया देने को मजबूर हैं वहीं अन्य खर्चो के कारण भी उनकी स्थिति दयनीय होती जा रही है।

1 साल से बेरोजगार है निजी शिक्षण संस्थाओं के शिक्षक……… पिछले वर्ष हुए लॉकडाउन के बाद से ही अधिकांश निजी शिक्षण संस्थाओं के शिक्षक बेरोजगार हो गए हैं एक ओर स्कूल बंद है तो दूसरी ओर ट्यूशन एवं कोचिंग क्लासेज भी बंद है शिक्षक पूर्णता बेरोजगार हो गए हैं। निजी शिक्षण संस्थाओं के शिक्षकों की स्थिति दिन-प्रतिदिन दयनीय होती जा रही है।

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