अंबिकापुर. कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए प्रदेश सरकार ने पान मसाला एवं गुटखा की बिक्री व इसे खाकर थूकने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है, फिर भी शहर के तमाम थोक विक्रेता शहर के प्रमुख बाजारों में 3 गुना दामों पर इसकी बिक्री कर रहे हैं। गली मोहल्लों में भी गुटखा का एक-एक पाउच १० से २० रुपए में बेचा जा रहा है। शहर में पान मसाला एवं गुटखा के कई थोक विक्रेता हैं। शहर के हर गल्ली-मोहल्लों में पान मसाला की बहुत सी दुकानें हैं। वहीं कई लोग किराना दुकान के आड़ में इसकी बिक्री धड़ल्ले से कर रहे हैं। इसके बाद भी अधिकारियों द्वारा इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जबकि स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि गुटखा-पान मसाला व तंबाकू सेवन करने वालों में रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी कम होती है। ऐसे लोग कोरोना संक्रमण का जल्द ही शिकार हो सकते हैं।
शहर में आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई की आड़ में पान मसाला के थोक कारोबारी चोरी छिपे गुटखा, खैनी एवं पान मसाला भी खपा रहे हैं। गली मोहल्लों में पान की दुकान भले ही इक्का-दुक्का खुल रही हों लेकिन किराना एवं जनरल स्टोर में चोरी-छिपे लोगों को गुटखा खैनी और पान मसाला आसानी से उपलब्ध हो जा रहा है। प्रतिबंध के चलते विक्रेताओं कि दुकाने बंद रहती हैं लेकिन पर्दे के पीछे वे चुपचाप इसकी सप्लाई भी कर रहे हैं। थोक कारोबारी फुटकर दुकानदारों को मनमाने दाम में पान मसाला एवं गुटखा उपलब्ध करा रहे हैं। ज्यादा दाम देने के बाद फुटकर कारोबारी भी गली मोहल्लों में पान मसाले का मनमाना दाम वसूल रहे हैं। लोकल व स्तरहीन पान मसाला की कोई पूछ-परख नहीं करता था। प्रतिबंध लगने पर इसके तलबदार स्तरहीन पान मसाले को भी खा रहे हैं। बड़े दुकानदार ब्रांड शॉर्ट होने के कारण बता कर स्तरहीन पान मसाला को ज्यादा दामों पर बेच रहे हैं और लोग इसे खरीदने को विवश हैं।
चिकित्सकों का यह है मानना
चिकित्सकों का मनाना है कि तंबाकू का सेवन सरगुजा में बहुतायत किया जाता है। खैनी, गुडाखु, जर्दा, बीड़ी, सिगरेट में त बाकू की मात्रा पर्याप्त रहती है, जिससे त बाकू का सेवन करने वाले व्यक्ति के शरीर में कार्टीसोल की मात्रा बढ़ती है। बीटा सेल एंटीबॉडी के निर्माण व कोविड वायरस के प्रति रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाने में टी सेल की संवेदनशीलता कम हो जाती है। इस कारण त बाकू का सेवन करने वाले व्यक्ति में कोरोना संक्रमण की संभावना ज्यादा रहती है। त बाकू का सेवन 6 सप्ताह तक बंद कर देने के बाद शरीर के रोग प्रतिरोधक क्षमता सामान्य हो जाती है। त बाकू का सेवन करने वाले व्यक्ति के लार ग्रंथि में थूक बनाने की क्षमता बढ जाती है जिसके कारण बार-बार थूकने की आदत होती है। ऐसे व्यक्ति कोरोना संक्रमण को ज्यादा से ज्यादा लोगों में फैला सकते है।

Categorized in: