0 अवैध परिवहन कर दीगर राज्यो में भेजा जा रहा रेत 0 खतरे में जिले की जीवनदायिनी नदियों का अस्तित्व

0 संदेह के दायरे में खनिज विभाग की कार्यप्रणाली 

 चंचलेश श्रीवास्तव सूरजपुर । जिले में इन दिनों अवैध रूप से रेत उत्खनन व परिवहन का कार्य जोरो पर है। नदियों के बहते पानी की गति व रास्ता रोकने के लिए  इनको जगह जगह बांधा जा रहा है।  व्यापक पैमाने पर हो रहे इस अवैध रेत उत्खनन से  जिले के लोगो की जीवनदायिनी कहे जाने वाली नदियों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।  दीगर जिलों व अन्य प्रदेशों में यहां से प्रतिदिन बड़े  पैमाने पर रेत भेजा जा रहा है।

आश्चर्य तो इस बात का है कि इस अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने की जवाबदेही जिस खनिज विभाग पर है, उसके नाक के नीचे खुले आम यह अवैध कारोबार युद्धस्तर पर चल रहा है और सबकुछ देखते व जानते हुए भी विभाग के अधिकारी आंखों में पट्टी बांधे धृतराष्ट बने बैठे है। अपने कर्तव्यों को ताक में रखकर कुर्सी की शोभा बढ़ाते दफ्तर में बैठे इन बेपरवाह, जवाबदार अधिकारियों को अगर कोई  जागरूक व्यक्ति इनकी जवाबदारी का एहसास कराने और कुम्भकर्णीय नींद से जगाने के लिए अवैध रूप से खुलेआम हो रहे कारोबार की सूचना देना चाहे तो ये जिम्मेदार फोन उठाना भी जरूरी नही समझते जो इनकी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने को काफी है। ज्ञात हो कि जिला मुख्यालय से लगे ग्राम नमदगिरी श्मशान घाट सहित ग्राम राजापुर, कांतीपुर, सत्तीपारा, खडगवा कला, बंशीपुर, हर्राटिकरा, कदरंई, जयनगर, कसकेला, समौली, खोपा, रेवटी, नमनाकला, सलका, बकालो, कांतीपुर, सेमरा व अन्य घाटो में रेत ठेकेदार के द्वारा नियमों को ताक में रखकर रेत का अवैध उत्खनन किया जा रहा है। सत्तीपारा  महान नदी में तो ठेकेदार ने एक या दो नहीं बल्कि नियम व दिशा निर्देशों को बाकयदा ताक में रख कर तीन तीन  पोकलेन मशीन लगाकर रेत निकलवाने के कार्य को गति दिया हुआ है। जबकि खनिज विभाग के नियम अनुसार नदी में पोकलेन लगाना अवैध है। ठेकेदारों की मनमानी यहीं नही रुकती नियम विरुद्ध रात भर रेत का अवैध परिवहन भी लगातार जारी है। जबकि खनिज विभाग के गाईडलाइन के अनुसार रेत का परिवहन सुबह 6 से शाम 6 बजे तक ही निर्धारित है। अब सवाल उठना लाजमी है कि नेशनल हाईवे से लगे इस रेत खदान और हाईवे के खनिज विभाग के नाके से शाम 6 बजे के बाद ये रेत से भरी बड़ी बड़ी गाड़ियां आखिर किसके शह पर दीगर राज्यो के लिए भेजा जा रहा है। सवाल ये भी उठता है कि आखिर खनिज विभाग का इन पर कार्रवाई करने में हाथ पैर क्यो फूल रहा है। यह मिलीभगत है या नेताओं का खौफ पर हकीकत यही है कि इस अवैध कारोबार को रोकने खनिज विभाग के साथ साथ प्रशासन भी आजतक नाकामयाब ही रहा है।


0 सिर्फ 9 घाटों का जारी है पिटपास 
जिले मे 36 रेत खदानो की निविदा की गई है। परन्तु खनिज विभाग के द्वारा 9 रेत घाटो का पीट पास जारी किया है। जबकि जिले के 36 घाटो से रेत का उत्खनन बदस्तूर जारी है  प्रतापपुर ब्लाक के सेमरा, सत्तीपारा, बंशीपुर तो वही सूरजपुर ब्लाक के कोरेया, रुनियाडीह में पीट पास जारी किया गया है। शेष  रेत खदानों का पिटपास जारी नही किया गया है। फिर भी वहां से व्यापक पैमाने पर  अवैध रुप से नदी से रेत का उत्खनन कर अवैध वसुली किया जा रहा है।

0 पुछल्ले कार्यकर्ता से निर्वाचित जनप्रतिनिधि तक की संलिप्ता
जिले में चल रहे इस अवैध रेत के खेल में सत्ताधारी दल के नेता से लेकर आम कार्यकर्ता तक गंगा नहाने की तर्ज पर भिडे हुये है। बताया जाता है कि जिले मेें सत्ताधारी दल के नेता जिसमें कुछ चुने हुये जनप्रतिनिधि भी है वे खुद सरकार को कंगाल कर पंद्रह साल के बनवास को दुर करने बहती गंगा में हाथ धो रहे है। ऐसे में अधिकारी खुद को कार्रवाई के नाम पर असहाय महसूस करते है। एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता का तो यह भी दावा था कि अधिकाारियो को पैसा देकर वे काम कर रहे है मै नही तो कोई ना कोई तो करता ही। ऐसे में जिले का भगवान ही मालिक है।बहरहाल रेत के खेल देखकर आम लोग हतप्रभ है जिसके सत्तासीन नेता अवैध रेत की वसुली में लगे हुए है।
0 तय मानक से ज्यादा का उत्खनन…..
नदी के घाटो से रेत निकालने के लिये एक निर्धारित रकबा तय किया गया है। लेकिन रेत के ठेकेदारो के द्वारा तय मानक से ज्यादा रेत का उत्खनन किया जा रहा है तो वही बिना पीट पास के रेत से भरी वाहने दुसरे प्रदेश भेजी जा रही है। संबंधित विभाग के अधिकारी आज तक रेत खदानो का मुंह तक नही देखे है।ना ही इनको इतनी फ्रिक है नदी के रेत का किस प्रकार का दोहन किया जा रहा है।
0 क्या कहते है अधिकारी…..
जिले के खनिज अधिकारी संदीप नायक ने दबी जुबान से अवैध उत्खनन को स्वीकार तो किया पर उनका अपना तर्क यह था कि जिला भौगौलिक दृष्टृी से काफी फैला हुआ है और उनके पास स्टाफ तथा संसाधनो की कमी है। बावजूद इसके वे इस पर नजर बनाये हुये है। उनका दावा था कि जहा से अवैध उत्खनन की शिकायत मिल रही है वहां पर कार्रवाई की जा रही है। अब इस कार्रवाई का स्तर क्या है यह तो साहब ही जाने?

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