मछली नदी में गला दबाकर और पानी में डुबोकर हत्या के बाद शव को नदी में छिपाया था

अंबिकापुर। पत्नी की हत्या के मामले में न्यायालय ने सीएएफ जवान को उम्रकैद की सजा सुनाई है। जवान ने महिला से घटना के एक महीने पहले ही प्रेम विवाह किया था। पत्नी के लापता होने की रिपोर्ट भी उसी ने थाने में दर्ज कराई थी। जांच के दौरान मिले तकनीकी सबूतों के आधार पर अदालत ने उसे पत्नी की हत्या का दोषी माना और उम्रकैद की सजा सुनाई।

जानकारी के अनुसार, सरगुजा जिले के मैनपाट के कमलेश्वरपुर निवासी, सीएएफ के आरक्षक मनीष तिर्की 30 वर्ष ने 6 मार्च 2023 को थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसकी पत्नी दिव्या गुलाब कुजूर 2 मार्च से लापता है। मनीष और दिव्या ने करीब एक महीने पहले ही प्रेम विवाह किया था। उस समय मनीष की तैनाती सीएएफ के बस्तर बटालियन में थी। पुलिस को मनीष ने बताया था कि उसने 11 फरवरी 2023 को दिव्या से कोर्ट मैरिज किया। दोनों परिवारों ने तय किया था कि सामाजिक रीति-रिवाज से शादी होने के बाद दिव्या ससुराल में आकर रहेगी। कोर्ट मैरिज के बाद दिव्या अपने मायके चली गई थी, लेकिन 20 फरवरी 2023 को वह अचानक पति के घर आ गई। इसके बाद दोनों पति-पत्नी के रूप में साथ रहने लगे। 25 फरवरी 2023 को मनीष सीतापुर तहसील न्यायालय गया था, जब वह घर लौटा तो उसके परिवार के सदस्यों ने बताया कि उसकी पत्नी दिव्या घर वालों को बिना बताए कहीं चली गई है।

पुलिस ने जांच शुरू की तो पता चला कि 2 मार्च 2023 को सीएएफ जवान मनीष अपनी पत्नी दिव्या को बाइक से लेकर अंबिकापुर गया था। दोनों अंबिकापुर के बस स्टैंड और गांधी चौक के पास लगे सीसीटीवी कैमरों में भी साथ घूमते हुए दिखाई दिए थे। जांच में पता चला कि दिव्या का मोबाइल बंद होने से पहले तक उसका और मनीष का लोकेशन एक ही जगह था। इसके बाद पुलिस ने मनीष से सख्ती से पूछताछ की। पूछताछ में उसने बताया कि अंबिकापुर से लौटने के बाद उसने मछली नदी में दिव्या की गला दबाकर और पानी में डुबोकर हत्या कर दी। इसके बाद उसने शव को नदी में पत्थरों के बीच छिपा दिया था। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर नदी से शव बरामद किया और जवान मनीष को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इसके बाद इस मामले की सुनवाई पंचम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश स्मिता रत्नावत की अदालत में हुई। न्यायाधीश ने मोबाइल लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के आधार पर मनीष तिर्की को पत्नी की हत्या का दोषी माना। इस घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था। अदालत ने मनीष तिर्की को उम्रकैद और जुर्माने की सजा सुनाई।

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