बड़ी बेटी का आईसीयू में चल रहा इलाज, छोटी बेटी ने अस्पताल पहुंचते ही तोड़ दिया दम
अंबिकापुर. बारिश का मौसम शुरू होते ही जिले में सर्पदंश के मामले बढ़ गए हैं। पिछले कुछ दिनों में आधा दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत सर्पदंश से हो गई है। सर्पदंश की अधिकांश घटनाएं जमीन पर सोने के दौरान हुई हैं। इसी कड़ी में शनिवार की रात शहर से लगे ग्राम बधियाचुआं की महिला अपनी 4 बेटियों के साथ जमीन पर सोई थी। इस दौरान सबसे छोटी व बड़ी बेटी को सांप ने डस लिया। दोनों को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल लाया गया। यहां जांच पश्चात छोटी बेटी को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया, जबकि बड़ी बेटी का इलाज आईसीयू में चल रहा है। बेटी की मौत से मां का रो-रोकर बुरा हाल है।
कोतवाली थाना क्षेत्र के ग्राम बधियाचुआं निवासी ममता सारथी को उसके पति सुधीर साव छोड़ दिया है। इसके बाद से वह अपनी 4 बेटियों के साथ अपने पिता के साथ मायके में रहती है। शनिवार को महिला अपने चारों बेटियों के साथ जमीन में सो रही थी। इसी बीच रात करीब 2 बजे सबसे छोटी बेटी ३ वर्षीय सिया सारथी ने मां को बताया कि दीदी ने नाखून से काट दिया है। मां बड़ी बेटी १४ वर्षीय रवीना सारथी को इस बात के लिए डांटने लगी कि उसने सिया को नाखून से क्यों काटा। इस पर रवीना बोली कि मां मैंने नहीं काटा बल्कि मुझे भी कुछ काट लिया है, खून निकल रहा है। इसके बाद छोटी बेटी के पेट में दर्द शुरू हो गया। यह बात महिला ने पड़ोस की एक महिला को बताया। पड़ोस की महिला उसके घर में आकर देखी तो कमरे से सांप निकल रहा था। इसके बाद दोनों बच्चियों को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल लाया गया। यहां चिकित्सकों ने जांच पश्चात छोटी बच्ची सिया को मृत घोषित कर दिया। जबकि बड़ी बहन रवीना का इलाज आईसीयू में चल रहा है।
जमीन में सोते हैं लोग
सरगुजा के ग्रामीण क्षेत्रों में लोग जमीन में बिस्तर लगाकर सोना पसंद करते हैं। जिला प्रशासन द्वारा जमीन पर सोने से स त मना किया गया है, इसके बावजूद लोग जागरूकता की कमी व गरीबी के कारण जमीन में ही सोते हैं। बारिश के दिनों में जमीन पर सो रहे लोग सर्पदंश के शिकार हो जाते हैं।
झाडफ़ूंक पर करते हैं विश्वास
सरगुजा में बारिश शुरू होते ही सर्पदंश के मामले बढ़ जाते हैं। कई बार देखा गया है कि लोग पीडि़त को अस्पताल ले जाने की बजाय गांव में झाडफ़ूंक कराना शुरू कर देते हैं और समय गंवा देते हैं। आखिरी समय पर जब वे उसे लेकर अस्पताल पहुंचते हैं तो डॉक्टरों के लिए उसे बचाना मुश्किल हो जाता है। प्रशासन द्वारा भी हर बार लोगों को जागरुक किया जाता है कि वे सर्पदंश पीडि़त को तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे।

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