*न्यायिक जांच के बाद सीआइडी जांच के लिए सौंपा गया था केस डायरी*

अंबिकापुर। 11वर्ष पूर्व मीना खलखो हत्याकांड को लेकर चौतरफा सरगर्मी की स्थिति बनी थी, उसका पटाक्षेप करते हुए न्यायालय ने पुलिस कर्मियों को बरी कर दिया है। मामला वर्ष  2011 का है। 16 वर्षीय मीना खलखो को नक्सली मुठभेड़ में मार गिराने का पुलिस ने दावा किया था। पुलिस पर स्वजनों, राजनीतिक दलों व सरकारी संगठनों ने मीना खलखो का  अपहरण करने के बाद दुष्कर्म व गोली मारकर हत्या करने का आरोप लगाया था। मामला तूल पकड़ने पर न्यायिक जांच के बाद सीआईडी को केस सौंपा गया था, जिसमें दो नामजद सहित समेत 42 पुलिस कर्मी आरोपित बनाए गए थे। कथित हत्याकांड के आरोपित पुलिस कर्मियों को जिला एवं सत्र न्यायालय रायपुर ने बरी कर दिया है। 

 पुलिस और ग्रामीणों के बीच से अलग-अलग बातों के सामने आने के बाद उलझन की स्थिति बनी थी। पुलिस का दावा था कि नक्सलियों के साथ हुई मुठभेड़ में मीना खलखो मारी गई, जबकि ग्रामीण मीना को नक्सली मानने तैयार नहीं थे। न्यायिक जांच के बाद सीआईडी को अग्रिम जांच का जिम्मा सौंपा गया था, इसमें 42 पुलिस कर्मी हत्या और हत्या के प्रयास के आरोपित बनाए गए थे। मामला न्यायालय में चल रहा था। *यह था मामला-*चांदो थाना अंतर्गत ग्राम करचा निवासी 16 वर्षीय आदिवासी किशोरी मीना खलखो को छह जुलाई 2011 को लोंगरटोला नामक स्थान पर पुलिस ने मार गिराया था। पुलिस का कहना था कि मीना नक्सली थी, उसने  झारखंड से आए 25 नक्सलियों के साथ उन पर फायरिंग की थी। करीब दो घंटे तक दोनों ओर से हुई गोलीबारी में मीना खलखो मारी गई थी। मामले को लेकर काफी सवाल खड़े हुए। मीना के स्वजनों, राजनीतिक दलों तथा सरकारी संगठनों ने पुलिसकर्मियों पर अपहरण, बलात्कार व हत्या का आरोप लगाया था। शासन द्वारा मामले में न्यायिक जांच के आदेश दिए गए थे। इसके बाद जांच डायरी के आधार पर केस  सीआईडी को सौंपी गई थी। न्यायिक जांच में 46 से ज्यादा लोगों का बयान दर्ज कर चांदो थाना प्रभारी, छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल की 12वीं व 14वीं बटालियन के 42 जवान शामिल थे। जांच के बाद सभी पुलिस कर्मियों पर मीना खलखो की हत्या और हत्या के प्रयास का अपराध दर्ज किया गया था।*थाना प्रभारी सहित ये हुए लाइन अटैच-*मीना खलखो हत्याकांड की न्यायिक जांच के बाद तत्कालीन चांदो थाना प्रभारी एसआइ एन.खेस, हवलदार ललित भगत, इंद्रजीत पैंकरा, पंचराम ध्रुव, श्रवण कुमार, महेश राम, विजेंद्र पैंकरा, भदेश्वर राम, मोहर कुजूर, संजय टोप्पो व मनोज कुमार समेत 42 पुलिसकर्मी पर केस दर्ज किया गया। सभी को लाइन अटैच कर दिया गया था। हत्याकांड में 2 पुलिस कर्मियों धर्मदत्त धनिया व जीवनलाल रत्नाकर के खिलाफ नामजद केस दर्ज किया गया था। इन पर मीना खलखो को गोली मारने का आरोप था। दोनों को सुनवाई के बाद अप्रैल 2022 में जिला एवं सत्र न्यायालय रायपुर ने एक माह पूर्व जारी न्यायालयीन आदेश में दोषमुक्त किया है।

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