अंबिकापुर। देहदान के प्रति लोगों में जागरुकता बढ़ रही है। कुछ दिन पूर्व अंबिकापुर निवासी स्व.विजय पटेल की मौत के बाद स्वजनों ने उनका देहदान मेडिकल कॉलेज को किया था। स्व. विजय पटेल ने जीवित रहने के दौरान ही देहदान की घोषणा की थी। उनके निधन के बाद स्वजन उनकी अंतिम इच्छा को पूरा किए थे। इससे प्रेरित होकर स्व.विजय पटेल के दो मित्रों ने भी देहदान की घोषणा बुधवार को मेडिकल कॉलज में की।
शहर के ब्रह्मरोड निवासी रमेश अग्रवाल 69 वर्ष व देवीगंज रोड निवासी भंवर सिंह दोस्त हैं। बुधवार को दोनों ने मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर आकर मृत्यु पश्चात अपने देहदान की घोषणा अधिष्ठाता डॉ.रमणेश मूर्ति के समक्ष की है। इस दौरान डॉ.अभय सिंह यादव जूनियर रेसीडेंट मेडिकल कालेज अंबिकापुर भी उपस्थित थे। अधिष्ठाता ने रमेश अग्रवाल को दान के इस सर्वोच्च स्वरूप का निर्णय करने के स्तुत्य प्रयास हेतु आभार एवं साधुवाद दिया। रमेश अग्रवाल व भंवर सिंह ने बताया कि उनका निर्णय परिवार को ज्ञात है, वे शीघ्र ही आवेदन पत्र जमा कर देंगे। वे दोनों अभिन्न मित्र हैं। इन दोनों की स्व.विजय पटेल से घनिष्ठ मित्रताा थी। मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ.रमणेश मूर्ति ने बताया कि देह दान के प्रति नागरिकों में जागरूकता बढ़ी है। संपूर्ण शरीर दान एक महान एवं स्तुत्य कार्य है। शरीर रचना मेडिकल छात्रों के पठन-पाठन हेतु आवश्यक प्रक्रिया है।


एमबामिंग प्रक्रिया से शरीर रखते हैं सुरक्षित
मेडिकल कॉलेज के अधिष्ठाता डॉ.रमणेश मूर्ति ने बताया शरीर को एमबामिंग प्रक्रिया द्वारा सुरक्षित व संरक्षित रखा जाता है। प्रथम एमबीबीएस में शरीर रचना विभाग में शरीर संरक्षित कर छात्रों को शरीर संरचना की बारीकियों, पढ़ाई एवं विस्तृत शव विच्छेदन की क्रिया सिखाई जाती है।


देहदान की पूर्व प्रक्रिया में लगभग 20 लोग शामिल  
मेडिकल कॉलेज के बच्चों की पढ़ाई के लिए जहां एक ओर लोग देहदान कर रहे हैं, वहीं लगभग 20 लोगों ने मृत्यु पूर्व देहदान की घोषणा को लेकर की जाने वाली प्रक्रिया पूरी की है। घोषणा करने वाले को इसकी जानकारी परिवार के किसी जिम्मेदार सदस्य को देना होता है, ताकि वे संबंधित की मृत्यु के बाद इसकी सूचना मेडिकल कॉलेज के शरीर रचना विभाग को दे सकें।

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