शासनादेश के तहत स्वैच्छिक संगठनों के संचालन की नियत तिथि समाप्त हुई

अंबिकापुर। महिलाओं एवं बच्चों की ट्रैफिकिंग और व्यवसायिक यौन शोषण से पीड़ितों के बचाव, पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्यधारा से पुन: जोड़ने तथा संकटग्रस्त, निराश्रित, विधवा, परित्यक्त महिलाओं के आश्रय एवं अन्य सहायक सेवाएं प्रदान करने के उद्देश्य से सरगुजा, कोरिया, कोरबा व बिलासपुर में मिशन शक्ति अंतर्गत संचालित शक्ति सदन एवं उज्जवला का संचालन अब महिला एवं बाल विकास विभाग करेगा। संचालक महिला एवं बाल विकास रायपुर, तुलिका प्रजापति ने इस संबंध में 21 मार्च 2024 को संबंधित जिले के कलेक्टरों के अलावा शक्ति सदन के अध्यक्ष व सचिव को तत्सबंध में इसकी सूचना दे दी है। हालांकि आज दिनांक तक शक्ति सदन का संचालन पूर्ववत हो रहा है। इसके पीछे कारण केंद्र या राज्य सरकार की ओर से शक्ति सदन का संचालन किस ढर्रे पर किया जाना है, इस संबंध में किसी प्रकार का नया सर्कुलर जारी नहीं किया जाना है।  

जानकारी के मुताबिक भारत शासन स्तर पर जून 2023 में आयोजित पीएबी के कार्रवाई विवरण अनुसार वर्तमान में स्वैच्छिक संगठनों के माध्यम से चलाए जा रहे शक्ति सदन (पूर्व में संचालित स्वाधार एवं उज्जवला गृह) को 31 मार्च 2024 तक संचालित करने की अनुमति दी गई है। इसके उपरांत राज्य शासन द्वारा इन गृहों के कार्यप्रणाली की समीक्षा करते हुए विभाग द्वारा संचालित किया जाना है। शासनादेश में इनके संचालन हेतु समय-सीमा नहीं बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। मिशन शक्ति एक अम्ब्रेला योजना है, भारत शासन द्वारा योजनावार पृथक से दिशानिर्देश जारी नहीं किया गया है। इसी क्रम में संचालित शक्ति सदन की कार्यप्रणाली का परीक्षण करते हुए संस्थाओं को वित्तीय वर्ष 2023-24 तक की स्थिति में वर्षवार संस्था का निरीक्षण प्रतिवेदन, निरंतरता प्रमाण पत्र, मदवार व्यय विवरण, भौतिक एवं वित्तीय प्रगति प्रतिवेदन की जानकारी कलेक्टर की अनुशंसा सहित अनुदान प्रस्ताव संचालनालय को 03 दिवस के भीतर उपलब्ध कराना सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है। स्वैच्छिक संगठनों की ओर से आवश्यक जानकारी विभाग को उपलब्ध करा दी गई है। इसके बाद भी स्वैच्छिक संगठन के द्वारा संचालित शक्ति सदन में रहने वाली महिलाओं को अपनी सुपुर्दगी में लेने के लिए विभाग क्या व्यवस्था कर रहा है, इसे लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

अंबिकापुर के शक्ति सदन में कइयों की जिंदगी संवरी
महिलाओं एवं बच्चों की ट्रैफिकिंग और व्यवसायिक यौन शोषण से पीड़ितों के बचाव, पुनर्वास व उन्हें समाज की मुख्यधारा से पुन: जोड़ने सहित अन्य उद्देश्य से एमएसएसव्हीपी के द्वारा शक्ति सदन का संचालन अंबिकापुर में वर्ष 2005 में किया जा रहा है। 19 वर्षों के बीच इसका अलग-अलग नामकरण भी शासन स्तर पर किया गया। शुरूआत में इसका नाम अल्प आवास गृह रखा गया था। 2015 में स्वधार गृह फिर 2022 में इसे मिशन शक्ति के तहत शक्ति सदन नाम दिया गया। इस बीच यहां रहते कई महिलाओं की जिंदगी संवर गई। कुछ ने नौकरी की ओर कदम बढ़ाया तो कई परिवारों के जीवन की टूटी डोर को जोड़ने का काम शक्ति केंद्र की संचालिका ने किया। कई परिणय सूत्र में बंधकर सफल व खुशहाल जीवन की राह पर अग्रसर हैं। ऐसे हालातों के बीच इस सदन का विभागीय संचालन करने का निर्णय तो लिया गया है, लेकिन यह कितना सफल हो पाएगा, इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं।  

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा मिशन शक्ति अंतर्गत संचालित शक्ति सदन का संचालन करने के संबंध में आदेश जारी हुआ है, लेकिन इसका संचालन कैसे होगा, तत्संबंध में कोई नया सर्कुलर नहीं मिला है। जब तक केंद्र या राज्य सरकार की ओर से नया सर्कुलर जारी नहीं किया जाएगा, तब तक इसका यथास्थिति संचालन किया जाएगा।
जेआर प्रधान, कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग

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