50 से अधिक चिकित्सकों में 21-22 ही शेष, डीन कह रहे-स्व इच्छा से छोड़ रहे काम

अंबिकापुर। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने अंबिकापुर स्थित मेडिकल कॉलेज अस्पताल का निरीक्षण करने के बाद 100 चिकित्सकों की भर्ती होने की बात कही थी, दूसरी ओर यहां संविदा चिकित्सकों के द्वारा नोटिस थमाकर काम छोड़ने का सिलसिला जारी है। हाल में तीन चिकित्सकों ने नौकरी छोड़ने के लिए नोटिस दिया है। इसके पीछे कारण कम वेतन व डीएमएफ से दी जाने वाली राशि का समय पर भुगतान नहीं होना बताया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की दलील है कि इन्हें पांच-छह माह का डीएमएफ से लाखों रुपये भुगतान हाल में किया गया है। इसके बाद भी इनके द्वारा नोटिस थमाने के पीछे का कारण इन्हें महानगरों व गृह क्षेत्र के आसपास नौकरी मिलना बताया जा रहा है।

जानकारी के मुताबिक माइक्रोबायोलॉजी विभाग के डॉ. ओमलेशु, बायोकेमेस्ट्री विभाग की डॉ. शिप्रा व डॉ. सलमा ने नौकरी छोड़ने के लिए नोटिस दिया है। मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. रमनेश मूर्ति इसकी पुष्टि करते हुए कहते हैं कि तीनों चिकित्सक स्व इच्छा से नौकरी छोड़ने के लिए नोटिस दिए हैं, अभी इन्होंने नौकरी नहीं छोड़ी है। यहां सेवा देने के लिए पहुंचे संविदा में सेवारत और कार्यमुक्त होकर जा चुके चिकित्सकों पर नजर डालें तो वर्ष 2019 में यहां 50-60 संविदा चिकित्सक थे। आज की स्थिति में लगभग 21-22 ही सेवारत हैं। डीन का कहना है कि कुछ संविदा डॉक्टरों ने नौकरी छोड़ी है तो कई चिकित्सकों ने ज्वाइनिंग भी किया है। चिकित्सक स्व इच्छा से नौकरी छोड़ रहे हैं। इनमें विभिन्न विभागों के सहायक प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर शामिल हैं। बता दें सहायक प्रोफेसर को प्रतिमाह 30 हजार, एसोसिएट प्रोफेसर को 50 हजार व प्रोफेसर को प्रतिमाह 80 हजार रुपये मिलता है। सामान्य वेतन के साथ ही वेतन भी हर महीने जमा नहीं होने व पिछले नौ महीने से हाफ पेमेंट मिलने की स्वीकारोक्ति दबे जुबां संविदा चिकित्सक कर रहे हैं।

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