लोगों ने इशारों ही इशारों में कहा अब क्या होगा बाबा

गिरिजा कुमार ठाकुर

अंबिकापुर। नामांकन के दौर में पार्टी के मुख्य प्रतिद्वंद्वी सहित किस्मत आजमाने को आतुर रहने वाले या कहा जाए हार-जीत की प्रत्याशा से दूर चुनाव लड़ने की तमन्ना रखने वाले प्रत्याशियों का आमना-सामना होते रहता है। इनमें मुख्य प्रतिद्वंद्वी ही ऐसे होते हैं, जो एक-दूसरे से बखूबी परिचित होते हैं। बात विधानसभा चुनाव से शुरू करें तो अंबिकापुर विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से टीएस सिंहदेव और भाजपा से राजेश अग्रवाल को टिकट मिलने के बाद इन्हीं दो प्रत्याशियों के बीच मुख्य मुकाबला होना तय था। नामांकन पत्र लेने, जमा करने के दौर में ऐसे भी मौके आए जब दोनों ही प्रत्याशियों का कलेक्टोरेट परिसर में आमना-सामना हो ही गया। टीएस सिंहदेव ‘महराज साहब से सामना होने के बाद राजेश अग्रवाल ने उनके मान-सम्मान का ख्याल रखते हुए ऐसे समय में आर्शीवाद ग्रहण कर लिया, जब उन्हें स्वयं जनता के आर्शीवाद की जरूरत थी। दोनों के बीच मुस्कुराहट भरी बातें कुछ पल के लिए हुईं, टीएस बाबा ने भी उन्हें अपनी ओर से शुभकामनाएं देने में गुरेज नहीं किया। सोमवार को लोकसभा चुनाव का नामांकन पत्र जमा करने के दौर के बीच ऐसा ही एक बार फिर परिदृश्य सामने आ गया। पिछली बार तो भाजपा के प्रत्याशी ‘राजेश अग्रवाल ने कांग्रेस के कद्दावर नेता और हैट्रिक विधायक के रूप में पहचान बनाते आ रहे टीएस सिंहदेव ‘बाबा का आर्शीवाद लेकर अंबिकापुर विधायक का ताज स्वयं पहन लिया। इस बार कांग्रेस की विधायक ‘शशि ने चूक नहीं की। सोमवार को कलेक्टोरेट में लाव-लश्कर के साथ पहुंची ‘शशि सिंह जैसे ही नामांकन पत्र जमा करने के लिए बैरीकेड पार करने के बाद कलेक्टोरेट परिसर में पहुंची, सामने से अपने समर्थकों के साथ आ रहे भाजपा के सांसद प्रत्याशी ‘चिंतामणि महराज को सामने देख उनके कदम मुस्कुराते हुए अपलक उनकी ओर बढ़ गए और उन्होंने एक-दो बार नहीं तीन बार इन ‘बाबा के चरण धर लिए। चिंतामणि महराज करते भी क्या… आर्शीवाद मांग रही बेटी समान ‘शशि के आगे निरूत्तर भी नहीं रह सकते थे। पैर छूते ही पीछे से आवाज आई, एक बार और आर्शीवाद लीजिए… पुन: वे चरण छूने में गुरेज नहीं कीं। इसके बाद भी यह क्षण उस समय अविस्मरणीय बन गया, जब कार्यकर्ताओं की ओर से आवाज आई, जीत का आर्शीवाद ले लीं, तो वे चरण छूते हुए सपाट लहजे में कह दीं कि दोनों चुनाव लड़ रहे हैं, तो जीत का आर्शीवाद कैसे देंगे, लेकिन (चिंतामणि महराज को संबोधित करते हुए) आर्शीवाद ‘बाबा का है, कहते हुए मुस्कुराते अपनी बातों को उन्होंने विराम दे दिया। चिंतामणि महराज ने भी ‘शशि की भावनाओं का सम्मान करते हुए कहा-हम आपके उज्जवल भविष्य की कामना करते हैं।
सनातनी परंपरा है पैर छूना, आर्शीवाद लेना
शशि के जाने के बाद चिंतामणि महराज ने हमारा सनातनी परंपरा है, अपने से वरिष्ठों का पैर छुआ जाता है। वैसे पैर नहीं छूना था, नवरात्र का समय चल रहा है। लेकिन सनातन की परंपरा है, बड़ों का पैर छूना, आर्शीवाद लेना। मैं भी उनके उज्जवल भविष्य की कामना किया हूं।  

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