क्रिकेट स्टेडियम के लिए प्रशासन नहीं दिलवा पाया 10 एकड़ जमीन
जिस जमीन का चिन्हांकन, उसमें लगा गौचर व छोटे झाड़ का जंगल का रोड़ा

गिरिजा ठाकुर

अंबिकापुर। सरगुजा जिले में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है, लेकिन बेहतर प्लेटफार्म की कमी खलती है। विडंबना ही कहा जाए क्रिकेट खिलाड़ियों के लिए पांच वर्ष में 10 एकड़ जमीन प्रशासन उपलब्ध नहीं करा पाया है। छत्तीसगढ़ प्रदेश क्रिकेट संघ की ओर से कई बार खेल प्रतिभाओं को उभारने और सरगुजा को क्रिकेट हब के रूप में विकसित करने के दृष्टिकोण से जमीन की मांग, शासन-प्रशासन से की गई है। इधर चिन्हित जमीनों को आवंटित करने के बजाए रोड़ा अटकाने का काम किया गया। जिन जमीनों की मांग क्रिकेट संघ की ओर से की जाती रही है, उसे कभी छोटे झाड़ का जंगल तो कभी गौचर बताकर देने में की गई आनाकानी का नतीजा है कि भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड की मंशा पूरी नहीं हो पाई है।

बता दें कि छत्तीसगढ़ प्रदेश क्रिकेट संघ की ओर से सर्वप्रथम चांदमारी के पास करीब 10 एकड़ भूमि का चिन्हांकन क्रिकेट स्टेडियम के लिए किया गया था। इसकी जानकारी प्रदेश के उप मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव को भी दी गई। जब उन्होंने उक्त भूमि के संबंध में जानकारी ली तो इसे सेटेलमेंट रिकार्ड में गौचर बता दिया गया। इसके बाद कल्याणपुर रोड घंघरी में पंचायत की जमीन का चिन्हांकन किया गया, इसे छोटे झाड़ का जंगल बताकर कन्नी काटने का काम किया गया। बड़ी बात यह है कि जिस जमीन को छोटे झाड़ का जंगल बताया गया था, इसे वर्तमान में एजुकेशन हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। दो माह पूर्व दिए गए आवेदन के बाद पुन: खलीबा में धान गोदाम के पास एक जमीन की जानकारी राजस्व के अमले द्वारा दी गई है लेकिन आचार संहिता के कारण इसकी अग्रिम प्रक्रिया पूरी तरह से रूक गई है। देखा जाए तो अब तक क्रिकेट स्टेडियम के लिए भूमि आबंटन करने में इच्छाशक्ति का अभाव देखने को मिला है। इससे क्रिकेट में रुचि रखने वाले खिलाडिय़ों को निराशा ही हाथ लगी है। खेल प्रतिभाओं को उबारने की कोशिशें अभी तक विफल रही हैं।

करोड़ों रुपये खर्च करेगा बीसीसीआई
भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड, बीसीसीआई की मंशा सभी संभाग मुख्यालयों में क्रिकेट स्टेडियम का बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर देने की है। इसके लिए करोड़ों रुपये व्यय करके सर्वप्रथम मैदान को विकसित करने की योजना है। इसके बाद दूसरे चरण में यहां हॉस्टल का निर्माण किया जाएगा। सरगुजा संभाग मुख्यालय से झारखंड, उत्तर प्रदेश, उड़ीसा राज्य की सीमा लगे होने के कारण इस स्टेडियम का लाभ इंटर स्टेट की प्रतिभाओं को मिल सकता था। यही नहीं बोर्ड और रणजी ट्राफी जैसे बड़े आयोजन हो सकते थे।

सरगुजा संभाग का बेहतर क्रिकेट स्टेडियम बनाने की मंशा पूरी नहीं हो पाई है, जिससे बोर्ड और रणजी ट्राफी जैसे आयोजन नहीं हो पा रहे हैं। पांच साल से जमीन की मांग प्रशासन से की जा रही है। संभाग इंटरस्टेट की सीमाओं से लगा है। अगर ऐसे आयोजन यहां होते हैं तो खेलप्रेमियों का यहां आना होगा। वहीं खिलाड़ियों को वर्ष भर क्रिकेट में प्रदर्शन करने का मौका मिलेगा।
विनीत जायसवाल, सचिव सरगुजा क्रिकेट संघ

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