संभाग आयुक्त ने शिकायत जांच के आधार पर पदोन्नति की कार्रवाई निरस्त करने का प्रस्ताव सुनिश्चित करने कहा

girija thakur 

अंबिकापुर। राजमाता श्रीमती देवेन्द्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकिसा महाविद्यालय, अंबिकापुर में स्थापना पश्चात किए गए व की जा रही भर्ती, पदोन्नति में सेवा भर्ती नियम तथा शासन के निर्देशों का उल्लंघन किया जा रहा है। अधिष्ठाता कार्यालय में चल रही इस मनमानी की ओर कार्यालय आयुक्त सरगुजा संभाग का ध्यानाकर्षण कराने पर उन्होंने अधिष्ठाता, राजमाता श्रीमती देवेन्द्र कुमारी सिंहदेव, शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय अंबिकापुर को अधिसूचना क्रमांक एफ-21-9/2008/नी/55 दिनांक 21 सितंबर 2011, छ.रा. चिकित्सा शिक्षा विभाग तृतीय श्रेणी अराजपत्रित लिपिक वर्गीय एवं अलिपिक वर्गीय सेवा भर्ती नियम 2011 का उल्लंघन कर सहायक प्रोग्रामर के पद पर पदोन्नति दिए जाने एवं वायरोलॉजी लैब में नियुक्ति के संबंध में कहा है कि उपरोक्त विषय में जांच समिति द्वारा दिनांक 28.05.2024 को जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत कर उल्लेख किया गया है कि शिकायत जांच में पदोन्नति संबंधित कार्रवाई नियम विरुद्ध तरीके से की गई है। 13 जून 2024 को जांच प्रतिवेदन संलग्न कर अधिष्ठाता कार्यालय को प्रेषित किया गया है। जांच प्रतिवेदन की कंड़िकाओं को विभागीय पदोन्नति समिति के समक्ष प्रस्तुत कर पुन: परीक्षण कराते हुए समिति की ओर से पदोन्नति की कार्रवाई निरस्त करने का प्रस्ताव सुनिश्चित करने कहा गया है।

शिकायत पत्र में बताया गया था कि कोरोना काल में प्रदेश के 03 महाविद्यालयों को वायरोलॉजी लैब स्थापना हेतु संविदा भर्ती करने का निर्देश दिया गया था। निर्देश के अनुसार प्रदेश के 03 महाविद्यालय अंबिकापुर, बिलासपुर व राजनांदगांव में संविदा कर्मचारियों की भर्ती की गई थी। इस दौरान अंबिकापुर चिकित्सा महाविद्यालय में वायरोलाजी लैब हेतु किए गए संविदा भर्ती में भारी अनियमितता बरती गई। लैब अटेन्डेन्ट के पद हेतु संचालक चिकित्सा शिक्षा रायपुर के द्वारा 05.08.2020 को जारी पत्र के अनुसार निर्धारित योग्यता, जीव विज्ञान, भौतिक शास्त्र एवं रसायन शास्त्र सहित हायर सेकेन्डरी (10+2) परीक्षा उत्तीर्ण तथा किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से पैथोलॉजी, क्लिनिकल बायोकेमेस्ट्री में एक वर्षीय प्रशिक्षण प्रमाण पत्र एवं राज्य पैरामेडिकल परिषद में पंजीकृत, होना बताया गया था। इसके विपरीत अधिष्ठाता कार्यालय में मनमानी करते हुए योग्यता को आठवीं कर दिया गया, जबकि प्रदेश के अन्य महाविद्यालयों में लैब अटेन्डेन्ट हेतु शासन द्वारा निर्धारित योग्यता के आधार पर ही भर्ती की गई। चिकित्सा महाविद्यालय अंबिकापुर  में योग्यता बदकर भर्ती किया जाना शासन के निर्देशों का उलंघन के साथ आर्थिक लेन-देन को इंगित कर रहा है। वहीं संचालनालय चिकित्सा शिक्षा के पत्र दिनांक 01.08.2020 एवं संशोधित पत्र दिनांक 05.08.2020 में दिए गए निर्देशानुसार वायरोलॉजी लैब की स्थापना हेतु डाटा इन्ट्री आपरेटर का पद स्वीकृत नहीं था, लेकिन यहां डाटा इन्ट्री ऑपरेटर की भर्ती 06 पदों पर की गई है, जबकि प्रदेश के अन्य महाविद्यालयों में डाटा इन्ट्री आपरेटर की भर्ती नहीं की गई। अधिष्ठाता कार्यालय द्वारा ऐसा किया जाना शासन के निर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन है। बगैर स्वीकृति की गई भर्ती से शासन को अर्थिक क्षति भी हुई है। बता दें कोरोना काल में प्रदेश के जिन महाविद्यालयों में वायरोलॉजी लैब स्थापना हेतु कर्मचारियों की भर्ती की गई थी, उन्हें 06 माह, 01वर्ष में हटा दिया गया था, लेकिन अंबिकापुर चिकित्सा महाविद्यालय में आज भी 31 कर्मचारी कार्यरत हैं, जिन्हें रिक्त पद के विरूद्ध संविदा वेतन देने की बात सामने लाई गई है। सात के स्थान पर 31 कर्मचारी को संविदा वेतन दिया जाना शासन के निर्देशों का स्पष्ट उलंघन है वहीं इतने कर्मचारियों का शासन के निर्देश के बाद भी कार्यरत रहना समझ से परे है। ऐसे में शासन को प्रतिमाह लाखों रुपये का अर्थिक क्षति भी हो रही है,  इसकी पुष्टि सूक्ष्म जांच में हो सकती है। इसके अलावा राजमाता श्रीमती देवेन्द्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकिसा महाविद्यालय में स्टेनो कम कंप्यूटर आपरेटर से सहायक प्रोग्रामर के पद पर पदोन्नति एवं सहायक ग्रेड-3 से सहायक ग्रेड-2 के पद पर पदोन्नति में भी सेवा भर्ती नियम का उलंघन किया गया है, क्योकि स्टेनो कम कंप्यूटर ऑपरेटर से सेवा भर्ती नियमानुसार सहायक प्रोग्रामर के पद पर पदोन्नति नहीं की जा सकती है। सेवा भर्ती नियमानुसार कंप्यूटर आपरेटर से सहायक प्रोग्रामर के पद पर पदोन्नति दी जानी है। सहायक ग्रेड-3 से सहायक ग्रेड-2 के पद पर दी गई पदोन्नति में सेवा भर्ती नियम का ध्यान नहीं रखा गया। क्योकि सेवा भर्ती नियमानुसार सहायक ग्रेड-3 से सहायक ग्रेड-2 के लिए 05 वर्ष का कार्यानुभव होना आवश्यक है, जबकि अधिष्ठाता कार्यालय ने 03 वर्ष के कार्यानुभव के आधार पर पदोन्नति दी है। वर्ष 2017 के विज्ञापन अनुसार लैब टेक्नोलाजिस्ट (लैब टेक्नीशियन) के पद पर नियमित भर्ती की गई है, जिसमें शासन के निर्देशानुसार न तो भूतपूर्व सैनिक को आरक्षण दिया गया है, न ही विकलांग, दिव्यांग को। मनमानी करते हुए नियुक्ति में आरक्षण का पालन नहीं करने के साथ-साथ कई प्रकार की अनियमितता भी बरती गई है। जांच समिति का गठन कर इसकी सूक्ष्मता से जांच करने और जिम्मेदार, दोषी अधिकारी, कर्मचारी के विरूद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने किया है। वहीं वायरोलाजी लैब में स्वीकृति से अधिक कर्मचारियों को रखने से शासन को पहुंची आर्थिक क्षति की भरपाई दोषी जिम्मेदार अधिकारी, कर्मचारियों से कराने की मांग की गई है।
जारी किए गए  विज्ञापन सवालों के घेरे में
कार्यालय, अधिष्ठाता, राजमाता श्रीमती देवेन्द्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, अंबिकापुर के द्वारा स्वीकृत पद संरचना अनुसार नियमित पद पर भर्ती हेतु 2022 एवं 2023 में विज्ञापन जारी कर आवेदन पत्र आमंत्रित किया गया है। जारी विज्ञापन के कई पदों में सेवा भर्ती नियम अनुसार निर्धारित अर्हता को मनमानी तरीके से बदल दिया गया है, जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि किसी व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाने की दृष्टि से प्रायोजित विज्ञापन जारी किया गया है, छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री अनिल पाण्डेय ने तत्संबंध में अधिष्ठाता को लिखित एवं मौखिक रूप से अवगत कराया गया और संशोधन करने का आग्रह भी किया गया था, लेकिन न तो किसी प्रकार का संशोधन किया गया और न ही संघ को की गई कार्रवाई से अवगत कराया गया है। 2022-23 में नियमित पद पर भर्ती हेतु जारी विज्ञापन में भूतपूर्व सैनिकों को चतुर्थ वर्ग श्रेणी में 10 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है, जबकि शासन के नियमानुसार 20 प्रतिशत आरक्षण देना है। अधिष्ठाता को अवगत कराने के बाद भी किसी प्रकार का संशोधन नहीं करके विज्ञापन को सही करार दे दिया गया।

शासन-प्रशासन की हो रही छवि धूमिल
वर्ष 2022-23 के जारी विज्ञापन में विभाग में कार्यरत दैनिक वेतन भोगी, संविदा कर्मचारियों को कार्यानुभव का लाभ नहीं दिया गया, जबकि चिकित्सा महाविद्यालय अंबिकापुर द्वारा 2017 के जारी विज्ञापन में कार्यानुभव का लाभ दिया गया था तथा की गई भर्ती में कार्यानुभव का लाभ देते हुए अतिरिक्त अंक भी दिए गए हैं, तत्संबंध में छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के द्वारा अधिष्ठाता को अवगत भी कराया गया, लेकिन शासन का कोई निर्देश नहीं है बोलकर कन्नी काट लिया गया। वहीं कोरोना काल में 06 माह के लिए कार्यरत कर्मचारियों को 2022-23 के विज्ञापन में 10 अंक अतिरिक्त दिए जाने का उल्लेख किया गया है। संघ का आरोप है कि नियुक्ति/भर्ती एवं पदोन्नति में अधिष्ठाता कार्यालय द्वारा की गई मनमानी व अनियमितता से शासन-प्रशासन की छवि खराब हो रही है। ऐसे में संघ की ओर से आठ जुलाई को मेडिकल कॉलेज में अधिष्ठाता कार्यालय के सामने प्रदर्शन करने का निर्णय भी लिया गया है। इसकी जानकारी लिखित में अधिष्ठाता व जिला प्रशासन को भी दी गई है।

कलेक्टर ने आयुक्त, चिकित्सा शिक्षा को प्रेषित किया पत्र
कार्यालय अधिष्ठाता राजमाता श्रीमती देवेन्द्र कुमारी सिंहदेव चिकित्सा महाविद्यालय, अंबिकापुर में भर्ती/नियुक्ति एवं पदोन्नति में की जा रही मनमानी एवं अनियमितता को लेकर छग प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री द्वारा 30.05.2024 को दिए गए शिकायत पत्र को कलेक्टर सरगुजा ने आयुक्त चिकित्सा शिक्षा रायपुर को भेज दिया है। इसमें लेख किया गया है कि राजमाता श्रीमती देवेन्द्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय अंबिकापुर के स्थापना पश्चात किए गए/की जा रही भर्ती, पदोन्नति में सेवा भर्ती नियम तथा शासन के निर्देशों का उल्लंघन करते हुए अधिष्ठाता कार्यालय द्वारा मनमानी तरीके से अनियमितता बरती गई है। उन्होंने प्रदेश कर्मचारी संघ के द्वारा विषयांकित संबंध में प्रस्तुत शिकायत पत्र को मूलत: संलग्न कर आवश्यक कार्रवाई के लिए आयुक्त चिकित्सा शिक्षा को पूर्व में ही सम्प्रेषित किया है।

Categorized in: