पांचवें दिन आंदोलन जारी रहने से करोड़ों रुपए का हो रहा राजस्व नुकसान
बिश्रामपुर। नौकरी व मुआवजा की मांग को लेकर ग्रामीणों द्वारा आमगांव खदान को बंद करके शुरू किया गया अनिश्चित कालीन हड़ताल आज पांचवें दिन भी जारी रहा। खदान से कोयला उत्पादन ठप होने से करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है। हड़ताल में आज पहुंचे एसईसीएल के क्षेत्रीय महाप्रबंधक ने आंदोलन समाप्त कर बैठक करके चर्चा उपरांत मांगों के निराकरण की सलाह दी। गौरतलब है कि एसईसीएल बिश्रामपुर क्षेत्र अंतर्गत संचालित आमगांव खदान के प्रभावित लोगों द्वारा लंबे समय से नौकरी व मुआवजा की मांग की जा रही है। मांगों को लेकर ग्रामीणों द्वारा समय समय पर कई बार प्रबंधन के अलावा जिला प्रशासन व जनप्रतिनिधियों के साथ चर्चा भी कर चुके हैं लेकिन उन्हें केवल आश्वासन से ही वर्षों बाद भी संतोष करना पड़ रहा है। इसी बात से नाराज ग्रामीणों द्वारा वर्षों से लंबित नौकरी व मुआवजे की मांग को लेकर पिछले दिनों 16 फरवरी से पुनः आमगांव खदान के मुख्य द्वार पर ताला जड़कर अनिश्चित कालीन हड़ताल शुरू कर दिया
है।
हड़ताल के आज पांचवें दिन मंगलवार को  एसईसीएल बिश्रामपुर क्षेत्र के महाप्रबंधक अजय तिवारी आंदोलन स्थल पर पहुंचकर ग्रामीणों से चर्चा किए। चर्चा के दौरान क्षेत्रीय महाप्रबंधक ने लोगों को अवगत कराया कि आमगांव खदान के प्रभावित परिवारों को नौकरी व मुआवजा देने प्रबंधन गंभीर है। यहां खदान प्रभावित 464 भू विस्थापितों को नौकरी देने कलेक्टर के साथ डीआरसीसी की बैठक में निर्णय पूर्व में हो चुका है, जिसमें पात्र परिवारों को नियमानुसार नौकरी व मुआवजा देने की प्रक्रिया जारी है। अब तक 64 लोगों को नौकरी दी जा चुकी है। 60 प्रकरणों की डेड क्वार्टर में स्कूटनी जारी है, जबकि कई लोगों ने अब तक फाइल ही जमा नहीं किया है अथवा उनके द्वारा जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। तीन दर्जन से अधिक प्रकरणों में नौकरी के लिए पारिवारिक सहमति नहीं है। उन्होंने बताया कि ऐसा कोई कारण नहीं है कि प्रबंधन नौकरी देने प्रभावित परिवारों को आनाकानी या गुमराह करे, क्योंकि नौकरी उनका हक है। आंदोलनकारियो को चाहिए कि प्रभावित परिवारों के प्रकरणों में जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने उनका सहयोग करें और फाइल प्रबंधन के पास अविलंब जमा करें ताकि प्रकरण का तेजी से निपटारा हो सके और प्रभावित परिवारों को उनका हक मिल सके। क्षेत्रीय महाप्रबंधक ने आंदोलनकारियों से चर्चा के दौरान कहा कि हड़ताल की बजाय कार्यालय में आप अपने प्रतिनिधि मंडल के साथ आकर बैठक करके समस्या का निराकरण कराने में सहयोग करें और खदान से कोयला उत्पादन शुरू कराने में मदद करें। क्षेत्रीय महाप्रबंधक की समझाइश के बाद भी ग्रामीणों द्वारा समस्या का तत्काल निराकरण करते हुए नौकरी व मुआवजा की मांग को पूरा करने उपरांत ही आंदोलन समाप्त करने की बात कही गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि महाप्रबंधक द्वारा आज भी चर्चा के दौरान कोई ठोस जवाब न देते हुए केवल गुमराह करने की ही बात कही गई है। क्षेत्रीय महाप्रबंधक के आने उपरांत रामानुजनगर एसडीएम नंद जी पांडेय, तहसीलदार सूर्यकांत साय भी ग्रामीणों के पास जाकर चर्चा करते हुए आंदोलन समाप्त करने काफी समझाइश दी लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। 

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