एनएमसी ने डीएमई व डीन की उच्च स्तरीय बैठक में कमियों को दूर करने किया है अलर्ट
अंबिकापुर। नए सत्र में शासकीय मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की सीटें घट सकती हैं, क्योंकि अंबिकापुर का राजमाता श्रीमती देवेंद्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय रेड जोन में है। इसे देखते हुए एनएमसी ने पूर्व में डीएमई व सभी डीन की उच्च स्तरीय बैठक आहूत करके कमियों को दूर करने के लिए अलर्ट किया है। कमियां दूर नहीं होने पर कार्रवाई के लिए तैयार रहने आगाह कराया है। बताया जा रहा है कि मेडिकल कॉलेजों का नया सत्र सितम्बर से शुरू होगा। इसके पहले नेशनल मेडिकल कमीशन सभी कॉलेजों को मान्यता देगा। मान्यता के पहले सभी कॉलेजों का ऑनलाइन निरीक्षण किया गया है। डीएमई से नोटिफिकेशन जारी होने के बाद काउंसलिंग की प्रक्रिया शुरू होगी। व्याप्त कमियों के बीच मेडिकल कॉलेज प्रबंधन पूरी 125 सीटों पर प्रवेश का दावा कर रहा है। कहना है कि 35 से 40 प्रतिशत कमियां हैं, जिसेे दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
बता दें कि अंबिकापुर में राजमाता श्रीमती देवेंद्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय का संचालन वर्ष 2016 से हो रहा है। शुरूआती दौर में इसका संचालन एक पुराने भवन में किया जा रहा था। सुविधाओं के अभाव के बीच मेडिकल कॉलेज की स्थापना के कारण इसे जीरो ईयर घोषित किया गया था, जिस कारण किसी का दाखिला नहीं हुआ। वर्ष 2023 में मेडिकल कॉलेज को अपना भवन मिला। इसके बाद 125 सीटों के साथ एमबीबीएस प्रथम वर्ष में प्रवेश की अनुमति दी गई। मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर के पास इंफ्रास्ट्रक्चर व एडवांस संसाधनों की कोई कमी नहीं है, लेकिन 21 प्रोफेसर की जगह 15 प्रोफेसर, 35 की जगह 22 एसोसिएट प्रोफेसर, 42 की जगह 19 असिस्टेंट प्रोफेसर ही पदस्थ हैं। अभी तक रिक्त पदों में भर्ती नहीं हो पाई है, इसके चलते सीटें कम होने की संभावना बनी हुई है। अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज वर्तमान में रेड जोन से उबर नहीं पाया है। वहीं अधिकारी पूरी सीटों की मान्यता मिलने को लेकर आशान्वित हैं। मान्यता संबंधी पत्र 15 जुलाई तक आने की संभावना है। हालिया स्थित पर गौर करें तो मेडिकल कॉलेज की मान्यता 2024-25 तक है, नए सत्र में 2025-26 के लिए मान्यता दी जानी है।
अस्पताल के लिए करनी होगी प्रतीक्षा
मेडिकल कॉलेज अस्पताल के लिए अभी और प्रतीक्षा करनी होगी। मेडिकल कॉलेज के साथ ही अस्पताल भवन का निर्माण शुरू किया गया था, लेकिन यह निर्माण कार्य अभी पूरा नहीं हुआ है। जब तक अस्पताल पूरा नहीं हो जाता, तब तक इसका संचालन वर्तमान व्यवस्था के अनुरूप ही किया जा रहा है। आडिटोरियम और गेस्ट हाउस का निर्माण भी होना है। शासन की ओर से मेडिकल कॉलेज अस्पताल के शेष कार्यों को पूरा कराने के लिए 98 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है, लेकिन टेंडर नहीं हो पाया है। एनएमसी के ऑनलाइन सर्वे के बाद राज्य स्तर पर मेडिकल कालेजों के डीन की बैठक हुई थी, जिसमें मेडिकल कालेज की कमियों को दूर करने की बात कही गई थी, इसे लेकर मेडिकल कॉलेज प्रबंधन तैयारी में जुटा है, लेकिन स्वीकृत पदों की पूर्ति नहीं होने से मेडिकल कालेज की मान्यता पर खतरा मंडरा रहा है।
बयान
मेडिकल कॉलेज में संख्यात्मक दृष्टि से प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसरों की कमी है। कुछ स्थानांतरण में चले गए, कुछ आए और कुछ आने वाले हैं। प्रमोशन के बाद कई रिक्त पद भर जाएंगे। कमियों को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे पूरे 125 सीटों पर स्वीकृति मिलने की उम्मीद है। मेडिकल कॉलेज अस्पताल का काम लगभग 40 प्रतिशत शेष है, इसके लिए शासन से राशि स्वीकृत हो गई है, टेंडर होना शेष है।
डॉ. अविनाश मेश्राम, अधिष्ठाता
मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर

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