जनता को नहीं पच रहा चुनावी वर्ष में चंद माह पूर्व टीएस का उप मुख्यमंत्री के रूप में सुर्खियां बटोरना

गिरिजा कुमार ठाकुर

अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ में 2018 के चुनाव के दौरान जय और वीरू की जोड़ी ने प्रदेश में खूब सुर्खियां बटोरी और सरकार बनाने में भी अहम भूमिका निभाई। इसके बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए रस्साकसी का दौर चला, जो आज भी लोगों के जेहन में बसा है। इन सबके बीच ढाई-ढाई साल के सीएम की बानगी और हाईकमान तक जोर-आजमाइश के बाद काका को मुख्यमंत्री और बाबा कैबिनेट मंत्री बने। ढाई साल की तय तिथि के बाद भी टीएस बाबा सीएम का ताज नहीं पहन पाए। साढ़े चार वर्ष गुजर गए, चुनावी वर्ष में आचार संहिता के चंद महीने पहले बाबा को उप मुख्यमंत्री के पद से हाईकमान ने नवाज दिया। उप मुख्यमंत्री बनने के बाद प्रथम अंबिकापुर आगमन पर पत्रकारों के एक सवाल पर टीएस सिंहदेव का कहना…ये दिल मांगे मोर…नहीं होगा तो ठहराव होगा… काई जम जाएगी, कुछ अलग ही संकेत दे रहा है। इधर लोगों के जुबां से यह निकलने लगा है, बाबा ने चुनावी मोड पर उप मुख्यमंत्री का पद स्वीकार क्यों किया, यह दायित्व उन्हें हाईकमान शुरूआती दौर में ही सौंप सकती थी। यह कहना किसी राजनीतिक पार्टी से सरोकार रखने वालों का नहीं बल्कि आम जनता का है, जो देशभर में उप मुख्यमंत्री का दायित्व संभालते गर्त तक पहुंचे चेहरों का उदाहरण पेश कर नुक्कड़ों तक जुबानी तरकस से तीर चला रहे हैं। कहना यह भी है प्रदेश में ईडी की धमक कब, किसको ले डूबेगी, कहा नहीं जा सकता है, ऐसे में कहीं हाईकमान ने रास्ता साफ रखने की तरकीब तो नहीं निकाली है। काका और बाबा के इस गोठ को करते एक बुजुर्ग ने गुरूवार की दोपहर उस समय ऐसा जुबानी तीर फेंका कि हंसी के ठहाके के साथ हामी के बोल फूट पड़े।

दरअसल कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ता राजीव भवन से आदित्येश्वर सिंहदेव को कंधे पर उठाकर टीएस जिंदाबाद के नारों की गूंज करते घड़ी चौक पहुंचे। बुजुर्ग की नजरें टीएस सिंहदेव को खोज रही थी। काफी देर जब वे नजर नहीं आए, तो वह आसपास के लोगों को टटोलने लगे और कहा कि कहां हैं टीएस… उनका कद इतना छोटा नहीं… कंधे पर सवार न भी हों तो भीड़ में नजर रखने वाले पेंडरखी के रामलाल और कोदौरा के सोमारू को नाम पुकार उसका हाल-चाल जान लेते हैं। वर्ष 2018 में संपन्न हुए चुनाव में यह बुजुर्ग अपना काम छोड़कर टीएस बाबा के मुख्यमंत्री बनने की ख्वाहिश में कांग्रेस का डंडा-झंडा लेकर वार्ड व शहर के लोगों को टटोलते दिख रहा था। मुख्यमंत्री नहीं अनने और उप मुख्यमंत्री का पद चुनावी मोड में स्वीकार करने के बाद उसकी प्रतिक्रिया रही कि लॉलीपाप मिलने पर इतना आतिशी शोर, तौबा…। इनकी बातों को सुन पटाखों की शोर के बीच ऊंची आवाज में आसपास खड़े अन्य लोगों ने भी हामी भर दी। गुरूवार को देर रात से शुक्रवार की सुबह तक उप मुख्यमंत्री के दायित्व को कोई भूपेश बघेल का रबर स्टांप तो कोई बाबा बने बाबू की संज्ञा देते रहा। व्यंग्यात्मक लहजे में यह भी कहने में लोगों ने गुरेज नहीं किया चलो कैबिनेट मंत्री की जगह सरगुजा पैलेस में पूर्व उप मुख्यमंत्री पदनाम लिखा मिलेगा। इनकी बातों के बीच देखा जाए तो कांग्रेस के कद्दावर नेता, राजपरिवार के टीएस सिंहदेव किसी मायने में कमतर नहीं हैं। राजनीति में आने का चस्का व सामने आ रही परिस्थिति के आगे निकल रहे शब्दबाण उनकी प्रतिष्ठा का आईना दिखा रहे हैं।

अब क्या कहेंगे बाबा…जनता जानने को है आतुर
राजनीति में उतरने के बाद टीएस सिंहदेव को तरह-तरह के झंझावातों का सामना करना पड़ा है। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में नवजातों की मौत के बाद इनके विरूद्ध विपक्षी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जमकर प्रदर्शन किया, नारेबाजी की, काला कपड़ा दिखाया। मुर्दाबाद के नारों के बीच वे जिला व पुलिस प्रशासन के साथ इस भीड़ के बीच पहुंच गए। यहां उन्हें कई प्रकार की बातों, आरोपों का सामना करना पड़ा। प्रशासनिक टीम की हस्तक्षेप काम नहीं आई। कई मोड़ में जनता व विभिन्न वर्ग के कर्मचारियों की उम्मीदों पर तुषारापात होता रहा। वे बड़ी साफगोई से वे कहते रहे कि मैं आपकी बात सीएम तक पहुंचा सकता हूं, कर कुछ नहीं सकता। उप मुख्यमंत्री बनने के बाद वे क्या कहेंगे, जनता अब यह जानने को आतुर है।

कहां-कहां जाएंगे काका और बाबा
उप मुख्यमंत्री बनने के बाद काका-बाबा की जोड़ी ने एक बार फिर एक साथ होकर चुनाव लड़ने की हवा दे दी है, लेकिन इसे टीएस सिंह देव खारिज करते हैं। इनका कहना है प्रदेश में काका-बाबा की जोड़ी नहीं चलेगी। प्रदेश में 23 हजार पोलिंग बूथ हैं, कहां-कहां काका-बाबा जाएंगे, सबको एक साथ चलना होगा, तभी हम प्रदेश में एक बार फिर से कांग्रेस की सरकार बनाने में सफल होंगे। उप मुख्यमंत्री बनने के बाद प्रथम प्रवास पर अंबिकापुर पहुंचे टीएस सिंह देव ने अपने ही शासन-सत्ता के बीच प्रदेश की व्यवस्थाओं को लेकर असंतुष्टि जाहिर की। इनका कहना था प्रयास जनोन्मुखी होना चाहिए। डायरेक्शन भले ही किसी से लें, लेकिन लोगों को, कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को लगना चाहिए हम सरकार में हैं, काम करने के लिए आगे आना चाहते हैं। कांग्रेस पार्टी में गाहे-बगाहे तालमेल नहीं होने, खटपट की स्थितियों की चर्चा होती थी, ऐसी परिस्थितियों को दूर करने आलाकमान ने उप मुख्यमंत्री की जवाबदारी दी है।

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