सीसीटीव्ही कैमरे की निगरानी में रखा गया कक्ष को, विघ्नसंतोषियों की भी कमी नहीं

अंबिकापुर। राजमाता श्रीमती देवेंद्र कुमारी सिंह देव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय संबद्ध जिला अस्पताल में एमआरआई मशीन लगाने की कई वर्षों से चल रही प्रक्रिया आज पर्यन्त पूरी नहीं हो पाई है, जिससे मरीजों को निजी अस्पतालों और जांच सेंटरों की ओर रूख करना पड़ रहा है। अस्पताल भवन में एमआरआई मशीन लगाने के लिए स्थल का चयन करने के बाद विप्रो जी कम्पनी की 14 करोड़ रुपये की मशीन उक्त कक्ष में शिफ्ट कर दी गई है। मशीन आने के बाद अस्पताल प्रबंधन का कहना था कि इसका सेटअप तैयार करने में 45 दिन का समय लगेगा। लगभग चार माह बीत गए, मशीन का इंस्टालेशन नहीं हो पाया है और करोड़ों की मशीन का लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। खबर यह भी सामने आ रही है कि मशीन के कॉपर केबल वायर चोर काटकर ले जा रहे हैं। ऐसे में मशीन की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। चोर अभी तक लगभग 8 से 10 लाख रुपये का केबल काटकर ले गए हैं, जिससे कंपनी को भी आर्थिक क्षति पहुंच रही है। चर्चा इस बात की भी है कि एमआरआई जांच जिला अस्पताल में शुरू न होने पाए, इसमें कुछ षड्यंत्रकारी रोड़ा बन रहे हैं। ऐसे में अभी तक अस्पताल प्रबंधन को मशीन सुपुर्द नहीं हो पाया है।

बता दें कि शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय अंबिकापुर संबद्ध जिला अस्पताल में एमआरआई जांच नहीं होने से मरीजों को होने वाली असुविधा को देखते हुए लगभग 4-5 माह पहले मेडिकल कॉलेज व साउथ ईस्टर्न कोलफिल्ड लिमिटेड के सहयोग से 14 करोड़ रुपये से अधिक की एमआरआई मशीन खरीदी गई है। इसे अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग में सीटी स्कैन कक्ष के पास बने कक्ष में स्थापित किया जा रहा है। मशीन के आने के बाद अनुमान लगाया जा रहा था कि कम्पनी के द्वारा 45 दिनों में स्टालेशन की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी और इसका लाभ मरीजों को मिलने लगेगा। सीटी स्कैन के बाद एमआरआई मशीन लगने से विद्युत भार बढ़ने की स्थिति बनेगी, इसे देखते हुए अस्पताल परिसर में सीएसपीडीसीएल व सीजीएमएससी द्वारा ट्रांसफार्मर की स्थापना कर दी गई है, इसके बाद कंपनी के जिम्मेदार स्टालेशन की प्रक्रिया भी शुरू कर दिए हैं। एमआरआई मशीन की स्थापना का काम की गति में कमी का एक बड़ा कारण मशीन के कॉपर केबल का चोरी होना भी है। इसे मशीन के इंस्टालेशन की निगरानी में लगे कंपनी के कर्मचारी भी स्वीकार कर रहे हैं। इनके द्वारा एमआरआई मशीन का इंस्टॉलेशन पूरा करके अगले माह तक अस्पताल प्रबंधन को सुपुर्द करने की संभावना भी व्यक्त की जा रही है। इन हालातों के बीच सरगुजांचल के जरूरतमंद लोगों को जिला अस्पताल में एमआरआई जांच का लाभ नहीं मिल रहा है। मरीजों को जांच के लिए निजी अस्पतालों का रास्ता नापना पड़ रहा है। आरोप के स्वर इस बात को लेकर भी मुखर हो रहे हैं कि शहर में बड़े पैमाने पर पैर पसारे निजी स्वास्थ्य संस्थानों के कुछ कर्ताधर्ता शासकीय अस्पताल में एमआरआई मशीन की स्थापना को लेकर नाखुश हैं। मशीन की स्थापना के बाद मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आने वाले जरूरतमंद मरीजों के जांच का अवसर निजी चिकित्सा संस्थानों को नहीं मिल पाएगा।

प्राथमिकी दर्ज कराने के बाद भी चोरों का पता नहीं
कंपनी के जिम्मेदारों का कहना है कि कीमती केबल वायर चोरी होने की रिपोर्ट मणिपुर थाना में दो-दो बार दर्ज कराई गई है, इसके बाद भी केबल चोरों का पता नहीं चला है। सुरक्षा की दृष्टि से एमआरआई कक्ष पर 24 घंटे नजर बनी रहे, इसके लिए सीसीटीव्ही लगाए गए हैं। बताया जा रहा है कि दीवाली के समय इंस्टालेशन में लगे कर्मचारियों के अवकाश में जाने का फायदा उठाते हुए चोर लाखों रुपये का केबल काटकर ले गए थे। चोरी किए गए केबलों को चोरों ने कहां खपाया, आज तक पता नहीं चल पाया है। सूत्रों का कहना है कि एक संदेही को पकड़कर पुलिस के सुपुर्द भी किया गया था, लेकिन उससे कीमती केबल बरामद करने में पुलिस को सफलता मिली या नहीं, इसका जवाब नहीं मिला है। पूर्व में अस्पताल परिसर में लगाए गए ऑक्सीजन प्लांट को भी तहस-नहस करके मरीजों के जीवन को जोखिम में डालने का काम चोर कर चुके हैं। ऐसे में अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से ऐसे महत्वपूर्ण स्थलों पर नजर रखना जरूरी है, जिससे आवश्यक उपचार सुविधाएं ठप होने की स्थिति बन सकती है।

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