कई इलाकों में भारी बारिश से पुलिया, कच्चे मकान क्षतिग्रस्त हुए, पूर्व मंत्री पहुंचे ग्रामीणों के बीच

अंबिकापुर। सरगुजांचल में गुरुवार की रात भारी बारिश के बाद तबाही का मंजर देखने को मिला। ऐसा लग रहा था जैसे बादल फट गया हो। बारिश का असर कुछ ऐसा रहा कि मैनपाट के निचले इलाके में बहने वाली नदियों में बाढ़ की स्थिति निर्मित हो गई। मछली नदी में ऐसा उफान आया कि मैनपाट-अंबिकापुर मार्ग पर स्थित नवानगर पुलिया के ऊपर से पानी बहने लगा। पानी की गति इतनी तेज थी कि पुलिया की रेलिंग तक सुरक्षित नहीं है। पानी का बहाव कम होने के बाद मलबे को लोगों ने देखा। पुलिया से लगे दोनों ओर के मार्ग भी क्षतिग्रस्त हो गए। पुलिया के ऊपर से गुजर रहे कुछ बाइक सवारों के बहने और एक के तैरकर जान बचाने की खबर भी सामने आई है। शुक्रवार को पूर्व मंत्री अमरजीत भगत बारिश के कारण फसल, घरों के नुकसान का जायजा लेने के लिए क्षेत्र में पहुंचे। ग्रामीणों से रूबरू होने के साथ उन्होंने मैनपाट के सुरम्य वादियों में सड़क मार्ग की तबाही के मंजर को भी देखा।
बता दें कि बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम का बड़ा प्रभाव सरगुजा संभाग में पड़ा है। गुरुवार की रात हुई भारी बारिश ने मैनपाट सहित अन्य क्षेत्रों में जमकर तबाही मचाई है। मैनपाट के मछली नदी में बाढ़ की स्थिति बन गई, उल्टापानी जाने वाले रास्ते की पुलिया क्षतिग्रस्त हो गई। अंबिकापुर से दरिमा होकर मैनपाट जाने वाले रास्ते पर मछली नदी में स्थित नवानगर पुलिया में आई बाढ़ में 3 बाइक सवार बह गए। इसमें एक युवक ने तैरकर अपनी जान बचाई, जबकि दो का पता नहीं चल पाया है। इससे शुक्रवार की दोपहर तक आवागमन बाधित रहा। लोक निर्माण विभाग के द्वारा रास्ते का मरम्मत कराने के बाद आवागमन शुरू हो पाया। एक दिन में मैनपाट में 122 मिलीमीटर बारिश हुई है। अंबिकापुर से लगा घुनघुट्टा नदी भी उफान पर है, जिस कारण सभी 8 गेट खोलने की नौबत बन गई। बताया जा रहा है कि डैम के सभी गेट खोलने की स्थिति 13 वर्ष बाद बनी है। इसके कारण निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति निर्मित हो गई है। भारी बारिश में उल्टापानी जाने वाले रास्ते पर बनी पुलिया के दोनों ओर की मिट्टी बह गई है, इससे पुलिया क्षतिग्रस्त हो गई है। इसके अलावा मैनपाट के रोपाखार व सपदानदर में कच्चे मकान गिरने की जानकारी मिल रही है। मौसम विभाग ने बंगाल की खाड़ी में बनने वाले सिस्टम के प्रभाव से प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इसका विशेष प्रभाव दक्षिण और मध्य छत्तीसगढ़ में बताया गया है। इसके अलावा ओड़िसा सीमा से लगे रायगढ़ व सरगुजा जिले में भी अलर्ट है। सिस्टम का प्रभाव गुरुवार की रात से ही शुरू हो गया है।

तैरकर जान बचाया युवक, सुबह पुल के नीचे मिली बाइक
मैनपाट के मछली नदी में दो घंटे की भारी बारिश के बाद बाढ़ जैसी स्थिति निर्मित हो गई। रात करीब 12.30 बजे दरिमा थाना अंतर्गत कर्रा निवासी दीपक कुर्रे ने बाइक से पुल को पार करने की कोशिश की, इस दौरान पानी के तीव्र प्रवाह के कारण उसका नियंत्रण बिगड़ गया, और वह बाइक सहित बह गया। दीपक कुर्रे दरिमा से अपने घर कर्रा जा रहा था। ग्रामीण नदी से करीब 100 मीटर तैरकर बाहर निकला, जिससे उसकी जान बच गई। बाइक सुबह पुल के नीचे से बरामद हुई। दीपक कुर्रे ने बताया कि एक बाइक में सवार दो अन्य लोग उसके आगे चल रहे थे, जो संभवत: उफनती नदी में बह गए हैं, जिन्हें वह निकलते नहीं देखा।

हरिहरपुर में मूसलाधार बारिश से बहा 35 साल पुराना पुल
उदयपुर। विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत साल्ही के आश्रित ग्राम हरिहरपुर में बीती रात मूसलाधार बारिश से तबाही मच गई। दर्जनों किसानों की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई, वहीं गांव से बाहर आने-जाने का एकमात्र मुख्य मार्ग भी टूट गया है। ग्राम बैगापारा-हरिहरपुर मार्ग पर स्थित लगभग 35 वर्ष पुराना पुल तेज बहाव में बह गया। इसके चलते गांव का संपर्क पूरी तरह कट गया है, ग्रामीणों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। छात्र-छात्राएं स्कूल नहीं पहुंच पा रहे हैं। ग्रामीण रामलाल ने बताया कि यह पुल बहुत पुराना था, इसके आसपास की जगह पर परसा कोल खदान संचालन कंपनी ने बड़ी मात्रा में कोयला खनन से पूर्व खुदाई की मिट्टी का भंडारण नदी के दोनों किनारों पर कर रखा था। बरसात में वह मिट्टी धीरे-धीरे नदी में बहती गई और पुल के नीचे से पानी निकलने का रास्ता पूरी तरह जाम हो गया। इस कारण पुल तेज बारिश में बह गया। कंपनी की लापरवाही से ग्रामीणों का जीवन प्रभावित हो गया है। इसके अलावा टिकरापारा से इमलीपारा मार्ग भी क्षतिग्रस्त हो गया है। जिला पंचायत सदस्य रैमुनिया करियाम ने प्रशासन से किसानों को फसल के नुकसान की क्षतिपूर्ति शीघ्र दिलाने, टूटे हुए पुल का त्वरित निर्माण कराने, टिकरापारा-इमलीपारा मार्ग की मरम्मत करवाने की मांग की है। वहीं कंपनी पर निगरानी बढ़ाने और प्राकृतिक संसाधनों से छेड़छाड़ पर रोक लगाने का आग्रह किया है।


आज भी रहेगा असर

मौसम वैज्ञानिक ए.एम. भट्ट ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में बनने वाले सिस्टम के प्रभाव से प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी वर्षा हो रही है। इसका असर सरगुजा संभाग में भी देखा जा रहा है। 26 जुलाई तक विशेषकर दक्षिण और मध्य छत्तीसगढ़ के लिए अलर्ट जारी है। इस दौरान गरज-चमक के साथ वज्रपात और भारी बारिश की आशंका है।


बारिश पर एक नजर

01 जून से 25 जुलाई तक कुल वर्षा-837.5 मिमी.
01 जुलाई से 25 जुलाई तक हुई वर्षा-597.7 मिमी.
एक जून से 31 जुलाई तक वर्षा
1994 1528.7 मिमी
2001 1352.6 मिमी
1971 1052.1 मिमी
1980 1003.6 मिमी
1990   969.7 मिमी
2017   896.1 मिमी
1989   855.9 मिमी
1986   849.2 मिमी
2025 में 25 जुलाई तक 837.5 मिमी

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