दस वर्ष पूर्व जर्जर घर को डिस्मेंटल करने के नाम पर खाली कराया था निगम

 girija thakur 

अंबिकापुर। सरगुजा कलेक्टर के जनदर्शन में पहुंची सामाजिक कार्यकर्ता व शिक्षिका साधना कश्यप ने आवेदन देकर शासकीय आवास आबंटित करने की मांग की है। उन्होंने बताया है कि 10 वर्ष पूर्व उन्हें नगर निगम के द्वारा यह कहते हुए बेघर कर दिया गया कि आवास जर्जर हो गया है, इसे डिस्मेंटल किया जाएगा। इसके बाद निगम की कार्रवाई पूरी नहीं हो पाई है। यदि प्रशासन किसी कारणवश स्वयं की लंबित कार्रवाई को पूरा करने में अक्षम है तो उन्हें आवास की सुविधा उपलब्ध कराए या फिर आगामी 22 जून, शनिवार को ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन कलेक्टोरेट परिसर में स्थित महात्मा गांधी की मूर्ति के सम्मुख परिवार सहित सामूहिक आत्मदाह करने की अनुमति दी जाए।

शिक्षिका साधना कश्यप ने बताया कि इमलीपारा में उनका स्वयं का मकान है, जिसे नगर निगम आयुक्त के द्वारा 10 वर्ष पूर्व जर्जर करार देते हुए रहने अयोग्य बताया गया और मकान खाली करने के लिए नोटिस जारी किया था। प्रशासनिक कार्रवाई के तहत उक्त मकान को डिस्मेंटल किया जाना था। इसके लिए 23 जून 2014 को आदेश जारी किया गया, वहीं परिवार सहित उन्हें स्वयं के घर से बलपूर्वक निकालकर बेघर कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने प्रशासन स्तर पर लंबित कार्रवाई को पूर्ण कराने कई बार गुहार लगाई, लेकिन किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई। ऐसे में उन्होंने वर्तमान में पदस्थ कलेक्टर को 23 जनवरी 2024 को आवेदन देकर अपनी परेशानी से अवगत कराया था, जिस पर अपरिहार्य कारणों से आज पर्यंत कार्रवाई लंबित है। वर्तमान में वे जिस टीन के शेड के नीचे अस्थायी रूप से 10 वर्षों से निवासरत हैं, वो भी गिरने के कगार पर है, वहां निवास कर पाना मुमकिन नहीं है। ऐसे में उन्होंने आग्रह किया है कि जब तक जिला प्रशासन, नगर निगम प्रशासन स्वयं के लंबित कार्रवाई को पूरा नहीं कर पाता है, तब तक परिवार के साथ निवास करने के लिए शासकीय आवास आबंटित किया जाए। उन्होंने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि जिस दिन प्रशासन अपना लंबित कार्य पूर्ण कर लेगा, उस दिन वे शासकीय आवास को वापस ले सकते हैं। बहरहाल जर्जर मकान का हवाला देकर पूरे परिवार को दर-दर की ठोकर खाने के लिए मजबूर करने के बाद, एक दशक बीतने के बाद भी प्रशासनिक कार्रवाई क्यों लंबित है, इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं, जो जांच का विषय है।

एक बार फिर मिला कार्रवाई का आश्वासन
साधना कश्यप ने बताया कि मंगलवार, 11 जून को वे पुन: शुरू हुए जनदर्शन में अपना आवेदन लेकर कलेक्टर सरगुजा विलास भोसकर से मिलने पहुंची थीं, लेकिन उनसे मुलाकात नहीं हो पाई। उन्होंने बताया कि इन्हें भी वे अपना दर्द बयां कर चुकी हैं। कलेक्टर से मुलाकात नहीं होने पर नगर निगम आयुक्त तक उनका आवेदन पहुंचा, जिस पर उन्होंने कार्रवाई के लिए आश्वस्त किया है। शिक्षिका का कहना है कि 10 वर्ष में कितने आयुक्त आए और चले गए पर उनकी समस्या यथावत है। अगर निगम को उक्त मकान को डिस्मेंटल करना है, तो अपनी कार्रवाई को पूरी करे। अगर अभी भी मामले को लंबित रखना है तो प्रशासन उन्हें परिवार के साथ रहने के लिए शासकीय आवास आबंटित करे, इसके बाद कार्रवाई प्रक्रियाधीन रखे, उन्हें किसी प्रकार की आपत्ति नहीं होगी वर्तमान में वे बच्चों और परिवार के साथ दम घुटने जैसी स्थिति में गुजारा कर रहीं हैं। ऐसे हालात से उबरने के लिए ही उन्होंने पूरे परिवार के साथ आत्मदाह की अनुमति भी मांगी है।

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