जंगल से गांव की पगडंडियों तक मवेशियों व चरवाहों की जगह सशस्त्र पुलिस जवानों का पहरा


पेड़ों की सुरक्षा के लिए रक्षासूत्र बांधने वाले ग्रामीण नजरबंद, आठ हजार पेड़ों की चढ़ी बली


36 घंटे बाद भी कफ्र्यू जैसा माहौल, भाजपा के नेता बीच रास्ते में ठिठके, घेरेंगे स्वास्थ्य मंत्री का बंगला  

अंबिकापुर। हसदेव अरण्य क्षेत्र में परसा, केते ईस्ट बासेन कोयला खदान के विस्तार के लिए मंगलवार को शुरू हुई पेड़ों की कटाई का काम बुधवार को भी जारी रहा। 43 हेक्टेयर अरण्य क्षेत्र में आठ हजार से अधिक पेड़ों की बलि चढ़ चुकी है। पेड़ों की सुरक्षा के लिए रक्षा सूत्र बांधने वाले ग्रामीण समाचार लिखे जाने तक 36 घंटे बाद भी नजरबंद जैसे हालात से उबर नहीं पाए हैं। अरण्य क्षेत्र में पशु-पक्षियों के कलरव की जगह लगभग 200 इलेक्ट्रिक आरा मशीनों की आवाज दूर तक गूंजती सुनाई दे रही है। पुश्तों से निवासरत ग्रामीण अपनी ही जन्म-कर्मभूमि में दहशत के बीच एक-एक पल अपने घर की दहलीज में बिता रहे हैं। बुधवार को भाजपा के वरिष्ठ नेता क्षेत्र की स्थिति का जायजा लेने के लिए निकले, लेकिन इन्हें पुलिस व प्रशासन के अवरोध के आगे बीच रास्ते में रूकना पड़ गया।  


बता दें कि कोयला खदान के लिए फेस-टू में 1400 हेक्टेयर में खदान का विस्तार करना है। इसके लिए लंबे समय से ग्रामीणों के द्वारा किए जा रहे आंदोलन को देखते हुए एकाएक प्रशासन हरकत में आया। मंगलवार को सूर्य की लालिमा लोग देख पाते इसके पहले कई आंदोलनकारी पुलिस हिरासत में ले लिए गए थे। जंगल क्षेत्र में चौतरफा भारी संख्या में पुलिस बल की मौजूदगी से किसी को कुछ समझने का अवसर नहीं मिला। पेड़ों का सफाया करने के लिए पुलिस और प्रशासन की चुस्त-दुरूस्त व्यवस्था देख जंगल की ओर रूख करने की हिम्मत किसी में नहीं हुई। गांव की पगडंडियों में मवेशियों को हांकने वाले ग्रामीण चरवाहों की जगह पुलिस बल की मौजूदगी देखने के बाद आदिवासियों के हित की चिंता करने वाले ग्रामीणों के सवालों के घेरे में आ गए। बिना ग्राम सभा और बिना ग्रामीणों की मर्जी के पेड़ों की कटाई अपने आप में बड़ा सवाल बनकर सामने आ रहा है, जिससे क्षेत्रवासियों में अंदर ही अंदर आक्रोश है। इनका कहना है कि धनाढ्य कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए पर्यावरण की सुरक्षा में छलपूर्वक सेंध लगाने का काम किया गया है। स्थानीय आदिवासियों और ग्रामीणों के द्वारा हसदेव बचाओ संघर्ष समिति के माध्यम से लगातार जंगल की रखवाली करते हुए यहां पेड़ कटने का विरोध किया गया, बावजूद इसके भविष्य में पर्यावरण संतुलन व जंगल में निवास करने वाले आदिवासियों, जंगली जानवरों की परवाह किए बगैर नियमों को ताक में रखकर बलपूर्वक एक बड़े भू-भाग के जंगल को नष्ट करने पहरा लगाकर रखा गया है, जिससे अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति बन गई है।

लाखों पेड़ों के हत्या की दोषी है कांग्रेस सरकार, पुलिस से झूमाझटकी के बीच भाजपा ने किया उग्र प्रदर्शन


भाजपा जिला अध्यक्ष ने कहा-कहां गए सीने में गोली खाने वाले की झूठी बातें कहने वाले टीएस सिंहदेव


अडानी कंपनी के परसा केते कोल ब्लॉक एरिया में लाखों पेड़ों की हो रही कटाई के विरोध में बुधवार को भाजपा सरगुजा ने जिलाध्यक्ष ललन प्रताप सिंह के नेतृत्व में उग्र प्रदर्शन किया। अदानी के परसा केते फेस-1, कोल ब्लॉक एरिया में पुलिस बैरिकेडिंग के समीप भाजपा के वरिष्ठ नेता अनिल सिंह मेजर, भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अनुराग सिंह देव, पूर्व ओबीसी मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश सोनी, नगर निगम नेता प्रतिपक्ष प्रबोध मिंज, पूर्व विधायक विजय नाथ सिंह, प्रदेश कार्य समिति के सदस्य भारत सिंह सिसोदिया सहित अन्य पदाधिकारी-कार्यकर्ताओं ने जमीन पर बैठकर धरना दिया और तत्काल पेड़ कटाई रोकने की मांग की। इस दौरान पेड़ कटाई बंद करो के नारों के साथ कई बार आक्रोशित भाजपा पदाधिकारी-कार्यकर्ताओं के साथ पुलिस की झूमा-झटकी भी हुई। भाजपा नेताओं ने प्रशासनिक व पुलिस अधिकारीयों से पेड़ कटाई स्थल तक जाने की मांग की पर उन्हें नहीं जाने दिया गया।


भाजपा जिलाध्यक्ष ललन प्रताप सिंह ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि उदयपुर परसा केतु क्षेत्र में लाखों पेड़ों की हत्या के लिए कांग्रेस की सरकार दोषी है। एक साजिश के तहत 43 हेक्टेयर क्षेत्र में अब तक कटे पेड़ों की संख्या मात्र आठ हजार बताई जा रही है, जबकि ये संख्या लाखों में है। उन्होंने अंबिकापुर विधायक पर तीखा हमला करते हुए कहा कि कहां गए सीने में गोली खाने की झूठी बात कहने वाले अंबिकापुर विधायक व मंत्री टीएस सिंह देव? उन्होंने आम जनता व प्रेस मीडिया के सामने कहा था कि एक भी पेड़ नहीं कटेगा, इसके लिए गोली भी खानी पड़ी तो पहली गोली मेरे सीने में चलेगी। भाजपा भूपेश सरकार के मंत्री टीएस सिंहदेव पर झूठ बोलकर जनता के साथ धोखा करने वाले बयान के विरोध में गुरूवार को दोपहर एक बजे मंत्री सिंह देव के निवास का घेराव करेगी। धरना प्रदर्शन में भाजपा के वरिष्ठ नेता त्रिलोक कपूर कुशवाहा, राज बहादुर शास्त्री, फुलेश्वरी सिंह, अरुण सिंह, आलोक दुबे, विनोद हर्ष, मधुसूदन शुक्ला, राधे श्याम ठाकुर, राजकुमार बंसल, विकास पांडेय, विजय व्यापारी, संतोष दास,  रूपेश दुबे, विद्यानंद मिश्रा, कैलाश मिश्रा, अभिषेक शर्मा, शैलू सिंह, निश्चल सिंह, विश्वविजय सिंह तोमर, जन्मेजय मिश्रा, अजय प्रताप सिंह, अनिल सिंह, अखंड विधायक, संतोष जायसवाल, अनिल जयसवाल, हरमिंदर सिंह टिन्नी, आकाश गुप्ता, निरंजन राय, वेदांत तिवारी, अवधेश सोनकर, पप्पू दुबे, दिलीप भसीन, मनोज सोनी, संजीव वर्मा, सर्वेश तिवारी, दिव्यांशु केसरी, सोलू सिंह, अशोक सोनी, कामेंद्र राजवाड़े, कुणाल सिंह, हर्ष जयसवाल, रामकेश्वर राजवाड़े सहित काफी संख्या में भाजपा के कार्यकर्ता व पदाधिकारी उपस्थित रहे।
पुरानी खदान पीईकेबी को रोकने का अधिकार केंद्र सरकार के पास-कांग्रेस  हसदेव अरण्य क्षेत्र में वर्ष 2011 में भाजपा की डॉ.रमन सिंह सरकार द्वारा स्वीकृत परसा ईस्ट केते बासेन खदान के लिए 43 हेक्टेयर में वनों की कटाई का काम किया जा रहा है। कांग्रेस सरकार ने स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव की पहल पर हसदेव अरण्य क्षेत्र को बचाने के लिए यहां खुलने वाली शेष तीन खदानों के लिए वन काटने की अनुमति निरस्त कर दी है। नई खदान नहीं खुलने से हसदेव अरण्य क्षेत्र के 20 लाख से ज्यादा वृक्ष बचेंगे, भाजपा का विरोध केवल दिखावा है। पुरानी खदान पीईकेबी को रोकने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता औषधीय पादप बोर्ड के अध्यक्ष बालकृष्ण पाठक, श्रम कल्याण मंडल के अध्यक्ष शफी अहमद, प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष डॉ.जेपी श्रीवास्तव, महामंत्री द्वितेंद्र मिश्रा, जिला पंचायत अध्यक्ष मधु सिंह, उपाध्यक्ष आदित्येश्वर शरण सिंह देव, महापौर डॉ.अजय तिर्की, जिला कांग्रेस अध्यक्ष राकेश गुप्ता ने संयुक्त बयान जारी कर कहा है वर्ष 2011-12 में राज्य में भाजपा की सरकार थी, तब परसा ईस्ट केते बासेन (पीईकेबी) खदान के लिए दो चरणों में क्रमश: 841.538 एवं 1136.328 हेक्टेयर जमीन आबंटित कर जंगल काटने की अनुमति दी गई थी। वर्ष 2013 से ही यहां से कोयला उत्खनन प्रारंभ है। इसी स्वीकृति के तहत यहां 26 सितंबर से 43 हेक्टेयर में वनों की कटाई की जा रही है। इसे रोकने के लिए ग्रामीण और पर्यावरण संरक्षण में लगे लोग सुप्रीम कोर्ट तक गए लेकिन राहत नहीं मिली। इस बीच वर्ष 2017 में केंद्र की मोदी  सरकार ने हसदेव अरण्य क्षेत्र में परसा कोल ब्लॉक को नीलाम कर खदान खोलने की प्रक्रिया शुरू कर दी। प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीण इस खदान के विरोध में पिछले सात महीनों से जंगल में बैठे हंै। स्वास्थ्य मंत्री और स्थानीय विधायक टीएस सिंह देव ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि ग्रामीणों की सहमति के बिना एक भी खदान नहीं खुलने देंगे, उनकी पहल पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने नए खदान नहीं खोलने देने का आदेश दिया है।
खदान रोकने पीएमओ तक निकालें मार्च
मित्र उद्योग पतियों के लिए हसदेव अरण्य क्षेत्र को उजाडऩे की अनुमति देने वाले भाजपाई सत्ता जाने के बाद लोगों में भ्रम फैला रहे हैं। वन विभाग पूर्व में जारी की गई अनुमति व आंदोलन कारियों की सहमति के आधार पर फिलहाल सिर्फ 43 हेक्टेयर वनों की कटाई कर रहा है। वृक्षों की कटाई के संदर्भ में भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के द्वारा किया जा रहा विरोध दिखावा व ओछी राजनीति का हिस्सा है। पुरानी खदान पीईकेबी की स्वीकृति निरस्त करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है। ऐसी स्थिति में बीजेपी का विरोध प्रदर्शन करना बिल्कुल भी न्याय संगत नहीं है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने कहा अगर सच में भारतीय जनता पार्टी के नेता लोगों का हित चाहते हैं तो खदानों को निरस्त करने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय तक मार्च निकालें।


नई खदानों की मंजूरी से जन्मा आंदोलन
भारतीय जनता पार्टी के कार्यकाल के दौरान वर्ष 2017 में असंवैधानिक तरीके से नई खदानों को स्वीकृत देने के कारण आंदोलन ने जन्म लिया। अगर बीजेपी सरकार 2017 में ही ग्रामीणों की मंशा के अनुरूप बिना प्रशासनिक दबाव से परसा समेत अन्य माइंस को लेकर प्रक्रिया शुरु ना करती तो आज यह आंदोलन ना होता और ना ही कांग्रेस द्वारा नई माइंस को बचाने के लिए पहल करनी पड़ती।            

प्रशासनिक चूक से उपजा भ्रम
परसा ईस्ट केते बासेन के पेड़ों की कटाई को लेकर प्रशासनिक चूक से भ्रम की स्थिति निर्मित हो गई है। वहां ग्रामीणों की सहमति और पूर्व की अनुमति के आधार पर सिर्फ 43 हेक्टेयर में वनों की कटाई की जा रही है। प्रशासन को प्रभावित वन क्षेत्र को स्पष्ट चिन्हांकित कर आमजनों को भरोसे में लेकर दिन के उजाले में कार्रवाई करनी चाहिए थी।

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