अच्छे क्वालिटी के कोयला में खराब कोयला, सेल स्टोन व मिट्टी मिलाकर बढ़ा रहे उत्पादन

भटगांव। एसईसीएल भटगांव में जी-9, जी-10 और जी-11 के कोयला में मिलावट का खेल लगातार जारी है। प्रतिदिन भटगांव सीएचपी और वारफाल के बीच मिलावट का गोरखधंधा प्रबंधन के नाक के नीचे चल रहा है। इस मिलावट को बड़े अधिकारी क्यों नहीं रोकना चाहते, इसका जवाब देने वाला कोई जिम्मेदार नहीं है, सुरक्षा एजेंसी की नजर भी इस गड़बड़झाला पर नहीं पड़ रही है।

सूत्रों का कहना है कि एसईसीएल भटगांव क्षेत्र के कोयला खदानों से ट्रांसपोर्टिंग के माध्यम से जी-9, जी-10 और जी-11 का कोयला वारफाल में लाकर गिराया जाता है। मालगाड़ी के रैक में कोयले की लोडिंग के लिए ट्रांसपोर्टिंग में लगी गाड़ियां वारफाल में कोयले को नहीं गिराकर रेल लाइन क्रॉस कर गिराती हैं, यहीं से शुरू होता है मिलावट का बड़ा खेल। यहां अच्छे क्वालिटी के कोयला में खराब कोयला, सेल स्टोन व मिट्टी को मिलाकर उत्पादन की मात्रा को बढ़ाया जा रहा है। इससे कोयले की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े होते हैं। वहीं प्रबंधन को कंपनी द्वारा मिले उत्पादन लक्ष्य को बिना किसी मेहनत के आसानी से समय से पहले पूरा कर लिया जाता है। भ्रष्टाचार का बड़ा खेल एसईसीएल भटगांव प्रबंधन काफी समय से कर रहा है। इसके अलावा कोल ग्रेडिंग में लंबे समय से सुनियोजित भ्रष्टाचार चल रहा है क्योंकि एसईसीएल भटगांव क्षेत्र के महान-3 ओसीएम में तीन ग्रेड का कोयला पाया जाता है। जी-10 और जी-11 के कोयले को जी-9 कोयला का स्टॉक कागजों में बताकर भेजा जाता है। कोयले का क्वालिटी परीक्षण बड़ी-बड़ी जांच एजेंसियों के द्वारा नहीं करना और कागजी खानापूर्ति भी समझ से परे है।

क्वालिटी परीक्षण हो तो खुल जाएगी पोल
कोयला खदानों में अच्छी क्वालिटी के कोयले में खराब कोयला, सेल स्टोन और मिट्टी मिलाकर उत्पादन की मात्रा बढ़ाने का पुष्ट संकेत मिल रहा है। इससे कोयले की गुणवत्ता पर सवाल उठते हैं। भारत सरकार के कोयला मंत्रालय के मुताबिक, गैर-कोकिंग कोयले का ग्रेडेशन सकल कैलोरी मान (जीसीवी) पर आधारित है। कोकिंग कोयले का ग्रेडेशन राख सामग्री पर आधारित है। वहीं अर्द्धकोकिंग या कमजोर कोकिंग कोयले के लिए राख प्लस नमी सामग्री पर आधारित है। कोयले के नमूनों के विभिन्न गुणों का निर्धारण बम कैलोरीमीटर विधि द्वारा निकटतम विश्लेषण हार्डग्रुव ग्राइंडबिलिटी विश्लेषण कैलोरी मान द्वारा प्रयोगशाला में किया जाता है।

कई वर्षो से खेला जा रहा है बेखौफ मिलावट का खेल
सूत्र बताते है कि अन्य खदानों से उत्पादित कोयला परिवहन कर सीएचपी लाया जाता है, उसको वारफाल के पास गिराया जाता है। सभी गाड़ियों से थोड़ा-थोड़ा ओवरलोड कोयला को वारफल के नीचे गिरा कर भटगांव कॉलरी के स्टॉक में दिखाकर भेजा जाता है, जिस कारण बिना कोयला उत्पादन के भटगांव कॉलरी चल रहा है। डोजर से मिलावट का खेल पिछले लगभग 5-6 वर्षों से वारफल भटगांव में चल रहा है। मिलावटी कोयला को अच्छे ग्रेड का बताकर रेल बैगन में लोडिंग कराकर भेजा जाता है। इन क्षेत्र से हो रहे कोयला परिवहन के ग्रेडिंग, स्टॉक व इनसे संबंधित दस्तावेजों का सही जांच यदि बाहरी एजेंसियों से कराया जाए तो बड़ा भ्रष्टाचार का उजागर होगा। एक दिन पहले मिलावट का कारनामा कैमरे में कैद किया गया, जिसमें डोजर से कोयला मिलावट कर हाइवा क्रमांक सीजी-12 बीसी 2578 में लोड करने के बाद हाइवा से सीएचपी पहुंचाया जा रहा था। सवाल उठता है कि जब कोल ट्रांसपोर्ट के माध्यम से कोयला वारफाल में गिराया जाता है, तो वारफाल में गिराए गए कोयला को रेल लाइन क्रास कर लगभग 50 फिट नीचे क्यों गिराया जाता है। इस कोयला को दुबारा उठाकर सीएचपी क्यों ले जाया जाता है।

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