रायपुर। तालपुरी घोटाले की जाँच करने हेतु एसीबी ने गृह निर्माण मंडल को फ़ाइल जाँच करने को कहा है। लेकिन गृह निर्माण के भ्रष्ट अधिकारियों ने अपनी मनमानी करते हुए जिस अधिकारी की जाँच होनी है उसी अधिकारी को जाँच करने हेतु अधिकृत किया। अब उसी भ्रष्ट अधिकारी के हस्ताक्षर से सभी जगह गृह निर्माण मंडल में जांच का आदेश भेजा जा रहा है। यूं कहे कि भ्रष्ट अधिकारी के दफ़्तर से पत्र जारी कर जाँच का आदेश संबंधित विभागों में दिया जा रहा है। भ्रष्ट अधिकारी की जांच करनी है तो गृह निर्माण मंडल में अपने ही बड़े अधिकारी के खिलाफ छोटे कर्मचारी बाबू, या अधिकारी कैसे अपने वरिष्ठ के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच सुगमता से करेंगे। और सही तरीके से जाँच संभव ही नहीं है गृह निर्माण मंडल की हद तो तब पार कर गई थी छत्तीसगढ़ में शासन की नीति के विपरीत जाकर भ्रष्ट अधिकारी को जांच का जिम्मा सौंप दिया गया.और जाँच में जिनके ख़िलाफ़ पुख़्ता सबूत होने के बाद लगातार सभी प्रकार के जाँच प्रतिवेदन में भ्रष्ट अधिकारी का नाम सम्मिलित है उसे लगातार शासन के नियम के विपरीत पदोन्नति और प्रमोशन दिया जा रहा है । जबकि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की जाँच चलती है या भ्रष्टाचार में नाम आता है तो उसे अधिकारी को किसी भी क़ीमत पर शासन के नियम के अनुसार पदोन्नति और प्रमोशन नहीं दिया जा सकता । भ्रष्ट अधिकारी अब ख़ुद अपनी जाँच करेंगे तो आप समझ सकते हैं कि जाँच कैसी सच्चाई के साथ सामने आएगी। गृह निर्माण मंडल को जाँच वास्तविकता करानी है तो बड़े अधिकारी या निर्माण मंडल के बाहर के अधिकारी से उच्च स्तरीय जाँच कराई जाए अगर जाँच सही दिशा मे हो तो सभी के सभी भ्रष्ट अधिकारी जेल में होंगे। जनता का हज़ारों करोड़ का नुक़सान हुआ है छत्तीसगढ़ शासन और गऱीब जनता का पैसा बड़ी मात्रा में इन भ्रष्ट अधिकारियों ने खाया है जिससे एक एक पैसे की भरपाई इन सभी भ्रष्ट अधिकारियों से किया जाना बाक़ी है लेकिन दुर्भाग्य हमारे प्रदेश की हमारी गऱीब जनता का जिन्होंने गृह निर्माण मंडल के लुटेरों ने जनता को शिकार बना कर हज़ारों करोड़ रुपया बनाया । भ्रष्ट अधिकारियों से जाँच कराना कहाँ का न्याय और कहाँ कहाँ का क़ानून है सभी तीन भ्रष्ट अधिकारियों लूटा गया जनता का पैसा वसूल करना गृह निर्माण मंडल की वास्तविकता जाँच के अनुसार अगर होती है तभी संभव है तालपुरी घोटाला असली भ्रष्टाचार की फाइलें अगर गृह निर्माण मंडल के दफ़्तर से ग़ायब हुई है तो उसकी पहले एफआईआर दर्ज कराई जानी चाहिए थी जो आज तक नहीं हुई । इस योजना में टेंडर 2008 सुरक्षित होने के बाद 2010 में बिना तकनीकी स्वीकृति के निविदा को आमंत्रित कर कार्य आदेश जारी किया गया जो नियम विरुद्ध तत्कालीन कमिश्नर द्वारा टेंडर की शर्त उल्लंघन करते हुए धारा क्लास -सी को विलोपित किया गया । तालपुरी में 324 लिली भवन और 226 जुही भवनों का निर्माण टेंडर के विपरीत जाकर सैकड़ों भवनों का निर्माण किया गया है । घटिया मटेरियल के लिए भी अतिरिक्त भुगतान किया गया । ठेकेदारों को समय अवधि को भी अनाप-शनाप ढंग से बढ़ाकर कार्य आदेश दिया गया जबकि ठेकेदारों से पेनाल्टी लेकर बकाया भुगतान करना था । लेकिन उल्टा ठेकेदारों को अतिरिक्त भुगतान दिया गया 132 एकड़ की प्रस्तावित योजनाओं को बढ़ाकर भष्टाचार का खेल खेला गया । टेंडर के एनआईटी के सभी दस्तावेज़ मुख्यालय से ग़ायब है जाँच अधिकारी दावा दिया गया जाँच प्रतिवेदन मुख्यालय से चोरी हो चुका है । चोरी करने वाले भ्रष्टाचारी अधिकारी आप ख़ुद भ्रष्टाचार की जाँच कर रहे तो हम सब समझ सकते हैं कि जाँच किस दिशा में जाएगी और जाँच का नतीजा की तरह का आएगा। भ्रष्ट कांग्रेस विचारधारा के अधिकारी वर्तमान भाजपा की सरकार को बदनाम करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

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