सरगुजा जिले की 35 सौ मितानिनें 13 दिनों से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर
अंबिकापुर। सरगुजा जिले की 35 सौ मितानिनें प्रदेश स्वास्थ्य मितानिन संघ के आह्वान पर 13 दिनों से अनिश्चितकालीन आन्दोलन कर रही हैं। प्रदेश स्तर पर जंगी प्रदर्शन करने के बाद मंगलवार को मितानिनें भाजपा सरकार के चुनावी घोषणा पत्र और मोदी की गारंटी को पूरा करने की मांग को लेकर लम्बी रैली के साथ कलेक्टोरेट पहुंची। इनकी काफी संख्या को देखते हुए कलेक्टोरेट के मुख्य प्रवेश द्वारा को बंद कर दिया गया था, ऐसे में इन्होंने नारेबाजी करते हुए कलेक्टर के प्रतिनिधि के रूप में पहुंचे अधिकारी को प्रदेश के मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री के नाम ज्ञापन और चुनावी घोषणा पत्र की प्रतियों को सौंप दिया।
हैरत की बात यह है कि सैकड़ों की संख्या में पहुंची मितानिनें सरगुजा कलेक्टर को नहीं पहचानती थीं, बाद में जब इन्हें पता चला कि उन्होंने कलेक्टर को नहीं, बल्कि उनकी ओर से आए किसी अन्य अधिकारी को ज्ञापन सौंपा है, तो वे कलेक्टर से मुलाकात कराने की जिद्द पर अड़ गईं। मौके पर मौजूद पुलिस स्टाफ व अन्य लोगों के माध्यम से इन्हें कभी कलेक्टर के कार्यालय में नहीं होने, कभी मिटिंग में होने की जानकारी मिलती रही, और वे मान-मनौव्वल करके इनसे जाने का आग्रह करते रहे, लेकिन वे टस से मस नहीं हुईं। बाद में इन्हें कलेक्टर से शाम 4-5 बजे तक मुलाकात होने की सूचना दी गई, जिस पर वे इंतजार की मुद्रा में कलेक्टोरेट के गेट के बाहर ही रास्ता घेरकर लगभग एक घंटे तक बैठे रह गईं, जिससे चौतरफा आवागमन पूरी तरह से अवरूद्ध हो गया। संघ की उपाध्यक्ष रमा शर्मा ने बताया कि बाद में किसी ने कलेक्टर विलास भोस्कर तक खबर पहुंचाया कि काफी संख्या में पहुंची आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएं उनसे मिलना चाहती हैं, जो कलेक्टारेट परिसर के गेट में बैठी हैं। कलेक्टर ने प्रोटोकॉल का हवाला देते हुए 5 लोगों के प्रतिनिधिमंडल को अपने चेम्बर में बुलाया। मितानिनों की बातों को सहजता से सुनने के बाद उन्होंने कहा कि उन्हें खबर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के आने की मिली थी, आप तो स्वास्थ्य विभाग की मितानिनें हैं। बहरहाल कलेक्टर ने इनकी तीन सूत्रीय मांगों और चुनावी घोषणा पत्र में किए गए वायदे को पूरा करने की मांग को लेकर दिए गए ज्ञापन के परिप्रेक्ष्य में कहा कि वे उनकी मांग को शासन तक पहुंचा देंगे, साथ ही कहा कि जल्द ही छत्तीसगढ़ शासन के किसी मंत्री का अंबिकापुर आगमन होगा, इस दौरान वे उनसे मुलाकात करके अपना पक्ष रख सकती हैं। कलेक्टर से मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल में मितानिन संघ की सरगुजा अध्यक्ष हेमंती लकड़ा, उपाध्यक्ष रमा शर्मा, स्नेहलता सिंह, मंजू, अनिता शामिल थीं।
एनजीओ के अधीन होकर नहीं करेंगे काम
मितानिन संघ की सरगुजा जिला अध्यक्ष ने बताया कि शासन-प्रशासन उन्हें स्वास्थ्य विभाग का रीढ़ कहता है, लेकिन उनकी प्रमुख मांगों को लम्बे समय से अनसुना किया जा रहा है। चुनावी घोषणा पत्र 2023 व मोदी की गारंटी में किए गए वायदे की अनदेखी की जा रही है। उनकी मांग है कि मितानिन कार्यक्रम में कार्यरत मितानिन, मितानिन प्रशिक्षक, हेल्प डेस्क फैसिलिटेटर, को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन अंतर्गत संविलियन और वेतन, क्षतिपूर्ति में 50 प्रतिशत वृद्धि का वादा शासन पूरा करे। शासन उन्हें एनजीओ के अधीन करना चाहती है, इसके पक्षधर वे नहीं हैं। शासन ठेका प्रथा बंद करे।
संस्थागत प्रसव प्रभावित होने का दावा
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि 7 अगस्त से वे हड़ताल पर हंैं, जिससे टीकाकरण का कार्य प्रभावित हो रहा है। मितानिनों के द्वारा गर्भवती महिलाओं को अस्पताल लाकर भर्ती कराने की सुविधा प्रदान की जाती थी, जो पूरी तरह से बंद है। कई प्रसूताओं का प्रसव घर में ही हो रहा है। इनकी संस्थागत प्रसव से दूरी बन गई है, और शासन की योजनाओं के लाभ से वे वंचित हो रही हैं। प्रशासन तक कई प्रकार की मैदानी जानकारी नहीं पहुंच पा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों से बीमारी का प्रकोप बढ़ने पर इसकी प्रथम सूचना मितानिनें ही स्वास्थ्य विभाग को देती हंै, हड़ताल में रहने से कई महत्वपूर्ण सूचनाओं के आदान-प्रदान व अन्य कार्यों में व्यवधान हो रहा है।

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