रामानुजनगर/ जिला पंचायत सूरजपुर  उपाध्यक्ष नरेश रजवाड़े ने राज्य में चल रहे शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण के लिए जारी निर्देश का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने कहा है शासन का ये निर्देश शिक्षा के स्तर को बुरी तरह नीचे ले जायेगा। छत्तीसगढ़ राज्य सदा से ही शिक्षा के लिए सजग रहा है और शिक्षा के स्तर को ऊंचा करने के लिए पिछली कांग्रेस की सरकार ने स्वामी आत्मानंद विद्यालय खोले और बड़े पैमाने पर इस योजना को सफलता प्राप्त हुई। इससे गांव-गांव के गरीब बच्चों को भी अंग्रेजी माध्यम में शिक्षा उपलब्ध हो सका परंतु जब से छत्तीसगढ़ में सत्ता परिवर्तन हुआ भाजपा की सरकार बनी है तब से सरकार शिक्षा के स्तर को गिराने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। वर्तमान में शिक्षकों और विद्यालयों का युक्तियुक्तकरण करना है और इसके लिए जारी दिशा निर्देश में प्राथमिक विद्यालय में 60 बच्चों पर प्रधान पाठक को शिक्षक मानते हुये केवल 2 लोग ही पदस्थ रहेंगे। अब जहां पांच कक्षाएं हैं 60 बच्चे हैं और विद्यालयों में रोज ग़ैर शैक्षणिक  कार्य प्रधान पाठक और शिक्षकों से ही कराए जाते हैं ऐसे में एक शिक्षक तो हमेशा अन्य कार्य में संलिप्त रहेगा फिर एक शिक्षक के भरोसे कैसे आएगी शिक्षा में गुणवत्ता।युक्ति युक्तकरण प्रधान पाठक को छोड़कर 1:30 के अनुपात में प्राथमिक शाला में होना चाहिये, लेकिन युक्तियुक्तकरण की आड़ में सेटअप बदलने की साज़िश तैयार कर दी गयी है।माध्यमिक विद्यालयों में मुख्य विषयों को दरकिनार करते हुये  उन्हें ही अतिशेष किए जाने का प्रावधान बनाया जा रहा है और ओ भी प्रधान पाठक को शामिल करते हुये  तो क्या कला विषय में पदस्थ शिक्षक विज्ञान (अंग्रेजी और गणित) पढ़ाएंगे,ऐसे में कैसे आएगी गुणवत्ता। जिला शिक्षा समिति सूरजपुर के अध्यक्ष में युक्तियुक्तकरण का पुर जोर विरोध करते हुये इसे नए सिरे से नियम बनाए जाने की मांग की है। अब डीपीआई परीवीक्षा अवधि का हवाला देकर युक्ति युक्तिकरण के तहत मूल शाला में पहले से पदस्थ शिक्षकों को अतिशेष कर रही है, ये न्याय के सिद्धांत के खिलाफ है। त्रुटि काउंसलिंग में डीपीआई एवं संयुक्त संचालक शिक्षा कार्यालय के द्वारा की गई।  पद नहीं होते हुए भी कार्यभार ग्रहण प्रधानाध्यापकों एवं विकासखंड शिक्षा अधिकारी एवं जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा कराया गया और उसका खामियाजा वरिष्ठ शिक्षक को भोगना पड़ेगा।गांव गांव में शिक्षा की अलख जगाने के लिए पूर्व की सरकार प्रतिबद्ध थी लेकिन वर्तमान भाजपा सरकार गरीबों को शिक्षा से वंचित करने के लिए स्कूलों को बंद करने की योजना लेकर आई है । अपने घोषणा के मुताबिक शिक्षक की भर्ती न कर पाने की नाकामी को छुपाने के लिए ऐसा कृत्य किया जा रहा है। भाजपा सरकार नही चाहती की गांव के बच्चे पढ़े,क्योंकि उनके पढ़ लिख लेने से इन्हे रोजगार देना पड़ेगा परंतु यहां तो रोजगार के अवसर ही समाप्त किए जा रहे हैं। उन्होंने शासन से मांग की है कि एक सही दिशा निर्देश जारी किया जाए जिससे ज्यादा शिक्षक और विद्यालय इससे प्रभावित न हो। सभी विद्यालयों के लिए 2008 भर्ती एवम् पदोन्नति नियम में एक निर्धारित पद स्वीकृत है जिसके अनुसार ही सभी शिक्षकों को पदस्थापना हुई है अब स्वीकृत पदों के अतिरिक्त यदि शिक्षक होते हैं तो उन्हें अतिषेष माना जाना चाहिए न कि जिनकी पदस्थापना स्वीकृत पद पर हुई है। प्रधान पाठकों को शैक्षणिक पद न मानते हुवे अतिशेष का निर्देश स्वीकृत पद के अनुसार जारी करें और मुख्य विषय वालों को भी अतिशेष की सूची से बाहर रखा जाए।

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