महापौर ने 5.79 अरब का बजट पेश किया, नेता प्रतिपक्ष ने कहा-नियमानुसार बजट पेश नहीं

अंबिकापुर। नगर पालिक निगम के नवनिर्मित प्रशासनिक भवन में हुई पहली सामान्य सभा की बैठक में महापौर मंजूषा भगत ने 2 करोड़ से अधिक के घाटे का बजट दूसरी बार पेश किया। इस दौरान शहर के कई ज्वलंत मुद्दों पर नोक-झोंक के बीच चर्चा चली, अतिक्रमण और तालाबों के सीमांकन का मुद्दा भी गरमाया। सामान्य सभा में प्रश्नकाल के पूर्व ही नेता प्रतिपक्ष ने एक दिन पूर्व शहर के रिहायशी मकानों के बीच हुई भीषण आगजनी की घटना का मुद्दा उठाया और शहर में अवैध तरीके से चल रहे विस्फोटक के कारोबार पर चिंता व्यक्त की। तालाबों को पाटकर कब्जा किए गए स्थल को कब्जाधारकों से मुक्त कराने की आवाज सदन में गूंजी। इन सबके बीच लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय में अंबिकापुर में 100 करोड़ की लागत से गोल बाजार निर्माण, जिला अस्पताल के पास अंडर ग्राउंड ब्रिज का निर्माण, नए स्वीमिंग पुल निर्माण के लिए 10 करोड़ की स्वीकृत, 8 करोड़ की लागत से स्पोर्ट्स कांप्लेक्स निर्माण, 30 करोड़ की लागत से नए स्टेडियम का निर्माण, 25 करोड़ की लागत से सामुदायिक कांप्लेक्स निर्माण के लिए किए गए प्रावधान की जानकारी महापौर ने दी।

महापौर मंजूषा भगत ने अपने बजट भाषण में पूर्व वर्ष के आय-व्यय का लेखा-जोखा देते हुए वित्तीय वर्ष 2026-27 के प्रस्तावित आय 5 अरब 79 करोड़ 24 लाख रुपये और प्रस्तावित व्यय 5 अरब 81 करोड़ 28 लाख रुपये की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बजट में गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों का पूरा ध्यान रखा गया है। बजट भाषण के बाद निगम के नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद ने कहा कि विधि के अनुसार अगर बजट पेश किया होता, तो इस पर चर्चा करने और समझने का अवसर मिलता। उन्होंने अधिनियम का हवाला देते हुए कहा कि, 30 नवम्बर या उससे पहले बजट का प्रारूप तैयार हो जाना चाहिए, ताकि सामान्य सभा में इसे प्रस्तुत करने से पहले एमआईसी इस पर विचार कर सके, और पार्षदों को 15 जनवरी से 15 फरवरी तक का समय बजट को समझने के लिए मिल पाए, तब वे समझ पाएंगे कि, बजट वास्तव में क्या है। इसके बाद 31 मार्च तक बजट पेश करना अनिवार्य है। नियमानुसार बजट पेश नहीं करने की स्थिति में यह सिर्फ एक दस्तावेज साबित होगा। यह पार्षदों के अधिकारों का हनन है। नेता प्रतिपक्ष ने आग्रह किया कि, भविष्य में बजट नियमानुसार पेश हो, इसका ध्यान रखा जाए। उन्होंने होने वाले आय-व्यय का अंकेक्षण रिपोर्ट भी पेश करने के लिए कहा, ताकि नए पार्षदों को भी इसका ज्ञान हो सके। पार्षद शुभम जायसवाल, शिवमंगल सिंह, मो. हसन, विकास पाण्डेय, मो. कलीम अंसारी ने भी अपने-अपने वार्ड की समस्याओं के साथ ही नगरवासियों के हित के मुद्दे को प्रमुखता से सामान्य सभा में उठाया। इस दौरान निगम के सभी विभागों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

लेखा समिति की अनिवार्यता पर दिया जोर

नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद ने लेखा समिति के गठन की अनिवार्यता पर जोर देते हुए कहा कि, प्रथम सम्मिलन के बाद ही इसका गठन होना था, लेकिन आज तक नहीं हो पाया है। शासन के नियमानुसार अंकेक्षण रिपार्ट लेखा समिति को पेश करना है। लेखा समिति यह जांच करेगी कि कहां और किस मद से किस कार्य के लिए कितना खर्च किया गया। खर्च की गई राशि रिकव्हरी योग्य है, या सही है, यह लेखा समिति को तय करने का अधिकार है। उन्होंने कहा है कि जनता के टैक्स के पैसे से निगम की सरकार चलती है, इनके द्वारा दी जाने वाली धनराशि का सदुपयोग हो, इसलिए अधिनियम में लेखा समिति का प्रावधान किया गया है, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के पार्षद रहते हैं। शफी अहमद ने कहा कि निगम की सत्ता में कदम रखे नई पीढ़ी को सही जानकारी मिले, विपक्ष में होने के नाते हमारा काम आईना दिखाना है। आगे का सफर इन्हें तय करना है, इसलिए किसी भी जनप्रतिनिधि को उनके अधिकारों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। निगम के सभापति हरमिंदर सिंह टिन्नी ने इनके द्वारा सदन में रखी गई बातों को स्वीकार करते हुए, लेखा समिति का गठन करने आश्वस्त किया।

निगम के पास विस्फोटक कारोबारियों की सूची नहीं

शहर के रिहायसी इलाके में गुरूवार को बनी विस्फोटक स्थिति पर प्रश्नकाल के पूर्व नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद ने मुद्दा उठाया। सत्ता पक्ष के पार्षद आलोक दुबे ने भी इसे गंभीरता से लेते हुए नगर निगम के आयुक्त से विस्फोटक अधिनियम के तहत जिला प्रशासन के द्वारा नगर में कितने व्यवसायियों को पटाखा बेचने व गोदाम का लाइसेंस जारी किया गया है, इसकी जानकारी मांगी। इस पर निगम आयुक्त डीएन कश्यप ने स्पष्ट किया कि, निगम के पास ऐसी कोई सूची उपलब्ध नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रेड लाइसेंस का पंजीकरण होने के बाद निगम के पास सारे व्यवसायियों की सूची उपलब्ध रहेगी। इस पर आलोक दुबे ने कहा कि, निगम के पास विस्फोटक पदार्थ रखने वालों की सूची का न होना गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि, क्या हम दूसरे गोदाम में आग लगने का इंतजार कर रहे हैं। इसी क्रम में पार्षद मेराज गुड्डू ने रिहायसी इलाके में चल रहे लकड़ी मिलों की ओर ध्यानाकर्षण कराया। वहीं पार्षद शैलेन्द्र सिंह शैलू ने गुदरी बाजार के पास स्थित निजी अस्पताल में लगवाए जा रहे ट्रांसफार्मर को अभी तक नहीं हटाने को सवालों के घेरे में लिया।

अग्निकांड की जांच के लिए कमेटी गठित

सामान्य सभा में शहर में हुए भीषण अग्निकांड के मामले में जांच के लिए निगम के सभापति की सहमति से सात सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया गया है, इसमें सत्ता पक्ष से 4 और विपक्ष से 3 पार्षदों को शामिल किया गया है। महापौर ने जांच टीम में सत्ता पक्ष की ओर पार्षद श्वेता गुप्ता, मनोज गुप्ता, विकास पांडेय, राहुल त्रिपाठी और नेता प्रतिपक्ष ने पार्षद पपिन्दर सिंह, शुभम जायसवाल और बाबर इदरिशी को शामिल किया है। निगम के सभापति हरमिंदर सिंह टिन्नी ने 15 दिवस के अंदर जांच रिपोर्ट पेश करने के साथ निगम के अमले को निर्देशित किया है कि, अगर मिलीभगत से किसी को लाइसेंस जारी किया गया है, तो इसे नियमानुसार निरस्त करने की कार्रवाई की जाए।

तालाब-नालों में कब्जा से बन सकती है भयावह स्थिति

पार्षद अशोक सोनवानी ने भाथुपारा तालाब को पाटकर कब्जा करने और नाला को पाटने की ओर ध्यानाकर्षण कराया। इस पर निगम में लोक निर्माण विभाग के प्रभारी मनीष सिंह ने कहा, तालाबों में कब्जा वास्तव में चिंता का विषय है। इसके सीमांकन के लिए राज्य शासन के पास प्रस्ताव भेजना हित में होगा, ताकि तालाब की भूमि पर कब्जा करने वाले लोगों पर कठोरतम कार्रवाई करते हुए कब्जा को हटाया जा सके। नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद ने कहा जल निकासी को प्रभावित करने के प्रयास पर रोक नहीं लगने पर बारिश के समय बीते वर्ष की तरह भयवाह स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि कुंडला सिटी के पीछे भी मिट्टी पाटा जा रहा है। वरिष्ठ पार्षद आलोक दुबे ने कहा, शहर में 19 तालाब 142 एकड़ में स्थित हैं। हाल में बस स्टैंड के पास रिंग बांध का मुद्दा सामने आया था, जिसका रकबा 6.25 एकड़ का है। यह निस्तार के लिए उपयोगी है। सुप्रीम कोर्ट तक ने कहा है कि वॉटर बॉडी को नया रूप नहीं दे सकते, लेकिन रिंग बांध का रकबा घट गया। ऐसे में जमीन माफिया राजस्व अमले से मिलकर कहीं 142 एकड़ तालाब का अस्तित्व न मिटा दें, इस दिशा में ध्यान देना जरूरी है।

Categorized in: