अंबिकापुर। शरणार्थी प्राथमिक शाला डिगमा का मान्यता निरस्त होने के बाद चली कार्रवाई के बीच वर्तमान में क्या स्थिति है, इसे जानने के लिए संस्था के कार्यकारी अध्यक्ष मिथुन कुमार मंडल ने जिला शिक्षा अधिकारी से किस आदेश के तहत मान्यता निरस्त की गई है, उसकी प्रति उपलब्ध कराने कहा है परंतु इनके द्वारा मौखिक में मान्यता निरस्त होने की बात दोहराई जा रही है। मान्यता निरस्तीकरण आदेश की प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई। नए शिक्षा सत्र की शुरूआत के प्रथम दिन जिला शिक्षा अधिकारी पहुंचकर इनके द्वारा पुन: मान्यता निरस्तीकरण आदेश की प्रति उपलब्ध कराने कहा गया, ताकि वर्तमान शिक्षा सत्र से विद्यालय संचालन प्रारंभ किया जा सके। मान्यता निरस्तीकरण अथवा बहाली से संबंधित कोई आदेश की प्रति उपलब्ध नहीं कराने पर विद्यालय का संचालन प्रारंभ करने की बात कही गई है।

दरअसल शरणार्थी प्राथमिक शाला डिगमा में शिक्षकों द्वारा वास्तविक दर्ज संख्या से अधिक छात्र संख्या दर्शाने व मध्यान्ह भोजन की राशि में हेरा-फेरी के आरोप में जिला शिक्षा अधिकारी अंबिकापुर ने एफआइआर दर्ज करा सभी शिक्षकों को निलंबित कर दिया था और विद्यालय के छात्रों को शासकीय प्राथमिक शाला डिगमा में स्थानांतरित कर दिया गया। इस कार्रवाई के बाद वर्ष 2011 से यह विद्यालय पूर्णत: बंद है। जिला शिक्षा अधिकारी अंबिकापुर द्वारा छत्तीसगढ़ शासन स्कूल शिक्षा विभाग मंत्रालय रायपुर के आदेश वर्ष 2012 के तहत संस्था के खाते का एकल संचालन किया जा रहा था। इसके बाद लोक शिक्षण संचालनालय छत्तीसगढ़ रायपुर ने वर्ष 2014 में निलंबित शिक्षकों को जीवन निर्वाह भत्ते का भुगतान करने हेतु मार्गदर्शन दिया।

इसमें यह लेख किया गया कि पंजीयन बहाली होने की स्थिति में समिति तो जीवित हो गई है, परंतु छात्रों के नहीं होने से शाला बंद है। शिक्षक निलंबित अवस्था में सेवारत हंै। विचाराधीन प्रकरण में प्रथम दृष्टया समिति, जिसे पूर्व से अनुदान दिया जाता था, उसे निलंबित शिक्षकों को जीवन निर्वाह भत्ता भुगतान हेतु अनुदान देय होगा। पंजीयक फम्र्स एवं संस्थाएं छत्तीसगढ़ रायपुर द्वारा आदेश तिथि 24.10.2018 के तहत संस्था में विमल चंद्र मंडल की अध्यक्षीय कार्यकारिणी समिति को मान्य किए जाने के पश्चात संस्था द्वारा वर्ष 2018 से विद्यालय का संचालन प्रारंभ करने पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी आईपी गुप्ता से संपर्क किया गया, जिस पर उन्होंने स्वयं शरणार्थी प्राथमिक शाला डिगमा में उपस्थित होकर कई ग्रामीणों के समक्ष कार्यकारी अध्यक्ष मिथुन कुमार मंडल, उपाध्यक्ष देवाशीष विश्वास को मौखिक निर्देश दिया कि शरणार्थी प्राथमिक शाला डिगमा का मान्यता रद्द है इसलिए मान्यता बहाली बाबत गांव में बच्चों के सर्वे करते हुए जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में आवेदन पत्र प्रस्तुत करें।

इस निर्देश के पालन में संस्था ने सर्वे करते हुए मान्यता बहाली का आवेदन इनके कार्यालय में प्रस्तुत किया गया था, जिस पर तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा विकासखंड शिक्षा अधिकारी अंबिकापुर को पत्र लिखकर मान एवं मानक के अनुरूप विद्यालय का निरीक्षण कार्य पूर्ण करते हुए प्रतिवेदन प्रस्तुत करने निर्देश दिया गया। कहना है कि इसके बाद ना तो विद्यालय के निरीक्षण की कार्रवाई की गई और ना ही मान्यता बहाल की। संचालक लोक शिक्षण संचालनालय ने वर्ष 2021 में अनुशंसा सहित अग्रिम कार्रवाई बाबत पुन: पत्र प्रेषित किया था, तब भी संस्था को मान्यता निरस्तीकरण आदेश की प्रति नहीं दी गई। श्री गुप्ता की सेवानिवृत्ति के बाद जिला शिक्षा अधिकारी संजय गुहे एवं सभी लिपिकों से संपर्क करने पर इनके द्वारा भी मौखिक में शरणार्थी प्राथमिक शाला डिगमा की मान्यता निरस्त होने और मान्यता बहाली के बाद विद्यालय प्रारंभ करने व निलंबित शिक्षकों की बहाली कार्रवाई करने की नसीहत दी गई है। ऐसे में जानबूझकर लोक शिक्षण संचालनालय को गुमराह करते हुए भ्रामक पत्र प्रेषित करने व शिक्षकों को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में संलग्न कर विगत 12 वर्ष से बिना काम के भुगतान जारी करने का आरोप लगाया जा रहा है।

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