बच्चों की समस्याओं व अधिकारों पर चर्चा के लिएस्कूलों एवं गांवों में होगी बाल सभा

छत्तीसगढ़ बाल अधिकार वेधशाला सरगुजा की बैठक में लिए गए कई निर्णय

 

अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ बाल अधिकार वेधशाला सरगुजा की बैठक एमएसएसवीपी कार्यालय में हुई। यूनीसेफ छत्तीसगढ़ के सहयोग से छत्तीसगढ़ में कार्य कर रही सीसीआरओ के माध्यम से प्रदेश भर में सैकड़ों सामाजिक संगठन जुड़कर बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता लाने के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं। आगामी विधानसभा एवं लोकसभा चुनाव को दृष्टिगत रखते हुए विभिन्न राजनैतिक पार्टियों के बनने वाले घोषणा पत्रों में बाल अधिकार को लेकर भी बात हो और बच्चों के मुद्दे भी घोषणा पत्र में शामिल हों, इसे ध्यान में रखते हुए एक बार फिर सीसीआरओ के साथ मिलकर सामाजिक संस्थाएंं अपने-अपने स्तर पर पर स्कूलों एवं गांवों में जाकर, बच्चों से बात कर उनकी समस्याओं को जानेंगी और प्रदेश स्तर पर बच्चों से मिली समस्याओं का एक खाका तैयार कर इसे राजनैतिक पार्टियों को उपलब्ध कराएंगी। राजनैतिक दलों से आग्रह किया जाएगा कि वे बच्चों के मुद्दों को घोषणा पत्र में शामिल करें। सीसीआरओ के प्रदेश प्रभारी एवं एमएसएसवीपी के मनोज भारती ने विभिन्न सामाजिक संस्थाओं से पहुंचे पदाधिकारियों से बात करते हुए कहा कि अब स्कूल खुल गए हैं, हम सबको एक बार फिर से स्कूलों एवं गांवों में बैठकर बाल सभा का आयोजन करना है। बच्चों से उनकी समस्याओं को लेकर बात करनी है, उनके अधिकार बताने हैं। बच्चों से मिलने वाली समस्या व इस कार्यक्रम को जो फीडबैक होगा, उसे राज्य स्तर पर एक साथ लिपिबद्ध कर राजनैतिक पार्टियों को उपलब्ध कराएंंगे। यह कार्यक्रम हम सबको नि:स्वार्थ भाव से बगैर किसी बजट के करना है। विगत वर्ष भी हम सबने सरगुजा संभाग में ग्रामीण एवं शहरी स्तर पर बच्चों के साथ एक अच्छा कार्यक्रम किया था।

 

इस बार भी हम सबको अपने उपलब्ध संसाधनों के साथ अच्छा परिणाम देना है और राज्यभर में सरगुजा को अव्वल रखना है। बैठक में सुरेन्द्र साहू, अनिल मिश्रा, संतोष दास, अफसाना बेगम, अंचल ओझा, फिलिप एक्का, सत्यम द्विवेदी, अंजलुस लकड़ा, रणधीर सिंह, रशीदा खातून, जितेन्द्र बिंदु सहित काफी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थे। ऐसा हो सामाजिक परिवेश कि बच्चों की लोग सुनें सीसीआरओ के सरगुजा प्रभारी मंगल पांडेय ने कहा विगत वर्षों में हम सबने काफी अच्छा कार्य किया है। जब भी चुनाव आता है, राजनैतिक दल अपने घोषणा पत्र में उसी को टारगेट करते हैं, जो मतदाताओं का मुद्दा होता है, बच्चा छूट जाता है। हमें सामाजिक परिवेश में चर्चा बढ़ानी है कि लोग बच्चों की भी सुनें। किसी भी कार्य में बच्चों के साथ मशवरा हो। पंचायतों में बच्चों की सुनी जाए, यह तभी होगा जब लगातार इस पर चर्चा होगी, इनके बीच कोई न कोई गतिविधियां संचालित होगी। पिछले वर्ष हम सबने बिना किसी बजट के सरगुजा संभाग में बेहतर कार्य किया था, जिसकी चर्चा प्रदेश स्तर पर हुई थी, इस बार भी हमें इस पर कार्य करने की जरूरत है। सभी इसमें अपने स्तर पर सहयोग करें, तभी सामाजिक बदलाव की ओर कदम बढ़ाना संभव होगा। घर-स्कूल और मोहल्ले में करेंगे बच्चों से मुलाकात सामाजिक कार्यकर्ता उमाशंकर पांडेय ने कहा कि बच्चों के तीन महत्वपूर्ण स्थल हैं जहां वे अपना पूरा समय व्यतीत करते हैं, पहला उनका घर, दूसरा स्कूल, तीसरा मोहल्ला। हमें इन तीनों ही स्तर पर बच्चों से मुलाकात कर उनकी बातों को सुनना है। उनके घर में क्या समस्या आ रही है, उनके मोहल्ले और स्कूल में क्या समस्या है, जानना होगा। यह समस्या कई स्तर पर हो सकते हैं, जिसे हम नजरअंदाज करते हैं। कई बार ये बड़ी समस्याओं को जन्म दे देती है, इसलिए सभी को इन तीनों ही स्तर पर कार्य करने की आवश्यकता है। कार्यक्रम में सहभागी विभिन्न संगठनों के लोगों ने अपनी बात रखी।

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