पीजीटी की छात्रा के साथ दुष्कर्म व जघन्य हत्या के विरोध में बंद रहा अस्पताल का ओपीडी

अस्पताल परिसर में सांकेतिक मार्च के बाद महामाया चौक से चिकित्सक, नर्सों ने किया पैदल मार्च, गांधी चौक में जलाया कैंडल

अंबिकापुर। पश्चिम बंगाल के आरजी कर मेडिकल कॉलेज के सेमिनार हॉल में 31 वर्षीय द्वितीय वर्ष की स्नातकोत्तर प्रशिक्षु डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और जघन्य हत्या की घटना को लेकर राजमाता श्रीमती देवेंद्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय के जूनियर व सीनियर डॉक्टर, नर्सों ने राष्ट्रीय व राज्य स्तर पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के आह्वान पर शनिवार को आक्रोश रैली निकाली और जमकर नारेबाजी की। चिकित्सकों, नर्सों सहित अन्य स्टाफ के सामूहिक अवकाश में रहने के कारण इस दौरान ओपीडी पूर्णत: बंद रही। काली पट्टी लगाकर चिकित्सकों ने आपातकालीन चिकित्सा परिसर में मरीजों को देखा। शाम को 4 बजे से महामाया चौक में चिकित्सकों, नर्सों की उपस्थिति खराब मौसम के बाद भी देखने को मिली। यहां से पैदल मार्च करते वे संगम चौक, देवीगंज रोड, घड़ी चौक होते गांधी चौक पहुंचे, यहां कैंडल जलाकर जघन्य घटनाक्रम और हत्या की शिकार हुई जूनियर चिकित्सक को श्रद्धांजलि दी। इनके द्वारा रास्ते भर जमकर नारेबाजी की गई। इसके पहले 14 अगस्त को भी घटना के विरोध में सभी जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के आह्वान पर जूनियर चिकित्सक सामूहिक अवकाश पर थे।

इसके पहले पत्रकारों से होटल एवलान में चर्चा करते हुए आईएमए के पदाधिकारी डॉ. योगेन्द्र गहरवार ने कहा कि आरजी मेडिकल कॉलेज में घटित घटना निंदनीय ही नहीं पूरे समाज को मर्माहत करने वाला है। यह घिनौना जुर्म सिर्फ एक प्रशिक्षु चिकित्सक के साथ नहीं हुआ है बल्कि पूरे समाज के साथ हुआ है। आमतौर पर चिकित्सक व मरीजों के स्वजनों के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी होती है, लेकिन आरजी कर मेडिकल अस्पताल में 36 घंटे ड्यूटी के दौरान मौजूद पीजीटी चिकित्सक के साथ अस्पताल के अंदर सेमीनार हॉल में होना शर्मनाक है। वीभत्स हत्या का जो पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आया है, वह चौंका देने वाला है। डॉ. गहरवार ने कहा कि लगभग एक दशक पहले निर्भया हत्याकांड ने देशवासियों को झकझोर दिया था। इसके बाद मेडिकल की पीजीटी छात्रा के साथ हुई इस घटना ने सिर्फ चिकित्सा जगत से जुड़े लोगों को नहीं बल्कि पूरे समाज को हैरत में डाल दिया है। ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए समाज के सभी वर्ग, संगठन को सामने आना चाहिए। उन्होंने कहा अस्पताल के सेमीनार हाल में भीड़ के बीच इस प्रकार की घटना के बाद अपराध पर पर्दा डालने की कोशिश करना आश्चर्य की बात है। इस घटना से यह सामने आ रहा है कि दुष्कर्म व निर्मम हत्या का शिकार हुई जूनियर छात्रा के पास ऐसी कोई जानकारी थी, जिससे पूरा सिस्टम हिल सकता था। स्वतंत्रता दिवस के पूर्व हुई इस घटना ने स्वतंत्रता के मायने ही बदल दिए हैं। उन्होंने कहा अगर पीजी चिकित्सक के स्वजन को न्याय नहीं मिलता है और अपराधियों को पकड़ने में पुलिस की नाकामी सामने आती है तो राष्ट्रीय व राज्य स्तर पर आईएमए के द्वारा बनाई जा रही रणनीति के तहत रक्षाबंधन के बाद देशभर में जूनियर के साथ ही सीनियर चिकित्सक, नर्सिंग, फार्मासिस्ट, डेंटल, फिजियोथेरेपी सहित अन्य विभागों के कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल करेंगे। उन्होंने कहा ऐसे अपराधियों को मृत्युदंड की सजा मिलनी चाहिए। इस दौरान मेडिकल कॉलेज अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. जेके रेलवानी, आईएमए की अध्यक्ष डॉ. अंजु गोयल, डॉ. संजय गोयल, डॉ. पीके सिन्हा, डॉ. सपना, डॉ. काजल, होलीक्रॉस अस्पताल से डॉ. मधु, डॉ. डायना के अलावा निजी अस्पतालों के संचालक नरेंद्र सिंह टूटेजा, विवेक दुबे सहित काफी संख्या में जूनियर व सीनियर डॉक्टर, नर्सें, फार्मासिस्ट सहित अन्य उपस्थित थे।

प्रबंधन ने मृतिका के स्वजन को किया गुमराह  
डॉ. योगेन्द्र गहरवार ने कहा कि किसी भी अस्पताल में 70 प्रतिशत महिलाओं पर काम का भार रहता है। ऐसी जगह में दुर्दांत घटना के बाद सरकार और कानून व्यवस्था के जिम्मेदारों से न्याय की उम्मीद रहती है, लेकिन यहां तो जघन्य घटनाक्रम के बाद मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के द्वारा ही लीपापोती का प्रयास सामने आया है। छात्रा के स्वजनों को उक्त प्रशिक्षु डॉक्टर के द्वारा खुदकुशी करने की जानकारी दी गई, वे 6-7 घंटे तक अपनी ही कलेजे के टुकड़े की बॉडी नहीं देख पाए। घटनास्थल से साक्ष्य को मिटाने की कोशिश की जाने लगी। ऐसी परिस्थिति सामने आने के बाद जब मेडिकल के छात्रों ने शांतिपूर्वक प्रदर्शन शुरू किया तो हाई अलर्ट के बीच 15 अगस्त को हजारों लोग ट्रक, बस में सवार होकर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों पर हमला कर दिया। राज्य की सरकार ऐसे तत्वों को रोकने में विफल रही। इसके बाद लापता एक बालक का शव उसी कैंपस में मिलने की बात सामने आ रही है।

डीन व अधीक्षक भी काली पट्टी बांधकर निकले
शनिवार को चिकित्सकों के साथ ही नर्सों के सामूहिक अवकाश में रहने का असर मरीजों पर पड़ा। हालांकि शनिवार होने के कारण मरीज कम ही संख्या में अस्पताल पहुंच रहे थे, लेकिन आपातकालीन चिकित्सा परिसर में मरीजों की भीड़ उमड़ रही थी। शनिवार को आईएमए के पदाधिकारी, चिकित्सकों, नर्सों सहित अन्य स्टाफ के साथ सीनियर चिकित्सक भी काली पट्टी लगाकर अस्पताल परिसर में नारा लगाते हुए आक्रोश रैली में निकाले और घटनाक्रम की कड़ी निंदा की। इनके साथ मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. रमनेश मूर्ति और अस्पताल अधीक्षक डॉ. आरसी आर्या भी नजर आए। इन्होंने कहा अस्पताल में मरीजों को किसी प्रकार की दिक्कत न हो, इसके लिए आपातकालीन चिकित्सा परिसर में अतिरिक्त व्यवस्था की गई है। वहीं पश्चिम बंगाल में पीजी चिकित्सक के साथ हुए घटनाक्रम की निंदा की।

बेटियों के सुरक्षित भविष्य की चिंता बढ़ी-टुटेजा  
निजी अस्पताल के संचालक नरेन्द्र सिंह टूटेजा  ‘नीटूÓ ने कहा कि घटना की जितनी निन्दा की जाए कम है। पश्चिम बंगाल के मेडिकल कॉलेज में हुई वीभत्स घटना को लेकर पिछले 5-7 दिनों से पूरा राष्ट्र उद्वेलित है। छह साल डॉक्टरी की पढ़ाई के बाद रेसीडेंट डॉक्टर के भावी जीवन की परिकल्पना मेडिकल कॉलेज परिसर के अंदर घृणित अपराध के बीच नेस्तनाबूद हो गई। इस घटना के बाद बेटियों के सुरक्षित भविष्य को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। अस्पताल में रूकने की व्यवस्था नहीं होने के कारण पीजी कर रही जूनियर चिकित्सक 36 घंटे की ड्यूटी के बीच सेमीनार हाल में सो रही थी, इस दौरान अपराधियों ने उसके साथ जिस प्रकार का कृत्य किया वह दिल को दहला देने वाला है। उन्होंने कहा अस्पतालों में पुलिस का समय-समय पर राउंड होना चाहिए, जिससे अपराधियों में दहशत बना रहे।

चिकित्सकों की यह है मांग

आईएमए के पदाधिकारियों का कहना है कि सरकारें नहीं मानती हैं कि अस्पताल में हिंसा हो सकती है। हमारी मांग है कि अस्पताल को एयरपोर्ट की तरह सेफ जोन घोषित किया जाए। निष्पक्ष सुरक्षा एजेंसियां तैनात हों, जिससे वे भयमुक्त वातावरण में काम कर सकें। अपराधियों का जल्द से जल्द से पर्दाफास हो। जिस प्रकार घटना हुई है, इससे घटना को अंजाम देने में बड़े ड्रग्स या सेक्स रैकेट का भी हाथ हो सकता है। अपराधियों को मृत्युदण्ड की सजा दी जाए। रेजीडेंस डॉक्टरों के लिए सरकारी अस्पतालों में अलग से रूम की व्यवस्था हो, जहां वे सम्मानजनक तरीके से रह सकें। 24 से 36 घंटे काम करने वाले चिकित्सकों के लिए अस्पतालों में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। पश्चिम बंगाल में हुई घटना इसका प्रमाण है। मृत जूनियर चिकित्सक के कर्म को देखकर स्वजन को करोड़ों में मुआवजा बांटने वाली सरकार उचित मुआवजा दे।

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