भू-अभिलेख से असर्वेक्षित भूमि का नक्शा हटाने का आरोप, राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन

अंबिकापुर। सर्वे पर रोक लगाकर पूर्व आदेशित राजस्व सर्वे के अंतिम प्रकाशन को यथावत रखने की मांग करते हुए सरगुजा कलेक्टर सरगुजा को छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के नाम पत्र काफी संख्या में पहुंचे ग्रामीणों ने सौंपा है। इसमें उल्लेख है कि, अनुविभागीय अधिकारी एवं तहसील कार्यालय से उन्हें कोई भी सुसंगत अभिलेख उपलब्ध नहीं कराते हुए वर्तमान में प्रकाशित भू-अभिलेख से असर्वेक्षित भूमि के नक्शा को हटा दिया गया है। सन 1969 में राजस्व सर्वे दल द्वारा ग्राम पंचायत खैरबार एवं चोरकाकछार का सर्वे किया गया था, जिसमें अधिनियम की अवहेलना करते हुए अपूर्ण सर्वे किया गया। पूर्व से ही खैरबार की भूमि सर्वेक्षित थी, जिसमें खरीदी-बिक्री होते चली आ रही थी। राजस्व एवं वन विभाग द्वारा घूम-घूम कर असर्वेक्षित एवं सर्वेक्षित भूमि का सर्वे कर नक्शा, खसरा, भू-अधिकार अभिलेख तैयार किया गया था।
वन अधिकार समिति के खैरबार अध्यक्ष रवि केरकेट्टा ने बताया कि, खैरबार की भूमि पूर्व सरगुजा महाराज आर.एस. सिंहदेव द्वारा लोकतांत्रिक शासन प्रणाली के दौरान लोगों के मध्य स्टाम्प पेपर पर लिखित अभिलेख के आधार पर खरीदी-बिक्री की गई थी, यह सर्वेक्षित भूमि है। इसके बाद राजस्व सर्वे दल द्वारा प्रथम एवं अंतिम प्रकाशन दिनांक 01.02.2024 को करके भू-अभिलेख तैयार किया गया। अंतिम प्रकाशन के संबंध में विशेष ग्राम सभा आयोजित कर प्रस्ताव भी पारित किया गया है। अंतिम प्रकाशन के उपरांत दावा-आपत्ति आमंत्रित की गई थी और प्राप्त दावा-आपत्तियों का विधिवत निराकरण भी किया गया था। अंतिम प्रकाशन उपरांत तैयार किया गया अधिकार अभिलेख, नक्शा एवं खसरा गुप्त रखा गया है। प्रथम एवं अंतिम प्रकाशन के समय वन विभाग ने कोई भी दावा आपत्ति प्रस्तुत नहीं किया। आरोप है कि, वर्तमान में राजस्व एवं वन विभाग द्वारा 2026 में मौखिक आपत्ति में वन एवं राजस्व सीमा का निर्धारण किया जा रहा है, जिसमें कलेक्टर ने आम ग्रामवासियों के हित को संज्ञान में नहीं लिया है, जबकि अंतिम प्रकाशन के संबंध में 10.05.2026 को विशेष ग्राम सभा आयोजित कर प्रस्ताव पारित किया गया है। उन्होंने बताया कि, अनुविभागीय अधिकारी द्वारा प्रथम एवं अंतिम प्रकाशन एवं ग्राम सभा के प्रस्ताव को नजरअंदाज करते हुए पुन: बिना सुसंगत अभिलेख के सिर्फ सर्वेक्षित भूमि का नक्शा लगाकर प्रारंभिक कार्रवाई की जा रही है, और 03.06.2026 तक दावा-आपत्ति लेने हेतु आदेश प्रकाशित करके टेबल में बैठकर नक्शा तैयार किया जा रहा है। मांग की गई है कि पूर्व में तैयार अधिकार अभिलेख, नक्शा एवं खसरा को ध्यान में रखते हुए अंतिम प्रकाशन को यथावत रखा जाये और वर्तमान प्रकाशन पर यथासंभव कार्रवाई करते हुए प्रथम एवं अंतिम प्रकाशन में तत्काल रोक लगाई जाए।

 

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