टाटा ग्रुप की कंपनियों के शेयर कभी भी बाजार में हवा के वजह से नहीं बढ़ते हैं बल्कि उनके द्वारा किए जा रहे काम की वजह से बढ़ते हैं. अब टाटा ग्रुप ने देश ही नहीं बल्कि विदेश में एक और बड़ा प्रोजेक्ट हासिल कर लिया है जिसका सीधा असर टाटा ग्रुप के कंपनियों पर पड़ेगा.

चार अरब पाउंड का निवेश

टाटा समूह ने गुरुवार को जगुआर लैंड रोवर (जेएलआर) सहित अन्य वाहन कंपनियों के लिए बैटरी बनाने के लिए चार अरब पाउंड (₹42500 करोड़) के निवेश से कारखाना लगाने की घोषणा की है।

 

ब्रिजवॉटर, समरसेट का चुनाव

टाटा संस ने इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी या गीगाफैक्टरी के लिए दक्षिण-पश्चिम इंग्लैंड के समरसेट क्षेत्र में स्थित ब्रिजवॉटर को चुना है।

टाटा का पहला कारखाना

40 गीगावॉट घंटे की इस गीगाफैक्टरी को यूरोप की सबसे बड़ी और भारत के बाहर टाटा का पहला कारखाना होने का दावा किया गया है।

ब्रिटेन सरकार की सहायता

टाटा ने ब्रिटेन से 50 करोड़ पाउंड की सरकारी सहायता मांगी है। यह सहायता समरसेट कारखाने के उच्च ऊर्जा उपयोग, वाहन बदलाव कोष से अनुदान, और साइट पर सड़क सुधार के लिए शामिल है।

नौकरी के अवसर

यह परियोजना सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों नौकरियों को जन्म देगी, जो ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगी।

महत्वपूर्ण जानकारी का सारांश:

कंपनी निवेश स्थान क्षमता सरकारी सहायता नौकरी के अवसर
टाटा संस £4 अरब (₹42500 करोड़) समरसेट, इंग्लैंड 40 गीगावॉट घंटे £50 मिलियन हजारों नौकरियां

 

 

इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बैटरी निर्माण कारखाने की स्थापना टाटा समूह की कई कंपनियों को लाभान्वित कर सकती है। हालांकि, सबसे प्रत्यक्ष प्रभाव शायद टाटा मोटर्स पर होगा, जिसके पास जगुआर लैंड रोवर (JLR) का स्वामित्व है।

यदि बैटरी प्लांट इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण की लागत को कम करने, कार्यक्षमता बढ़ाने या बैटरी की गुणवत्ता में सुधार करने में सहायता करता है, तो इसके परिणामस्वरूप टाटा मोटर्स और JLR द्वारा अधिक प्रतिस्पर्धी इलेक्ट्रिक वाहनों का निर्माण हो सकता है, जिससे बिक्री में वृद्धि हो सकती है और वित्तीय प्रदर्शन में सुधार हो सकता है।

इसके अलावा, टाटा पावर, जिसका इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग अवसंरचना पर बढ़ते ध्यान का प्रमुख हिस्सा है, ऐसी पहलों से इलेक्ट्रिक वाहनों के विस्तार और स्वीकारण से संभावित रूप से लाभान्वित हो सकती है।

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