दोपहिया और चारपहिया वाहनों की कोतवाली सहित अन्य थाना में भरमार

गिरिजा ठाकुर

अंबिकापुर। जिले भर के थानों में दशकों से जब्त वाहनों की भरमार देखने को मिल जाएगी। कई कीमती दोपहिया व चार पहिया वाहन शो रूम कंडीशन में खड़ा किए गए, जो धीरे-धीरे कबाड़ में तब्दील होते जा रहे हैं। जब्त वाहनों का प्रक्रिया अनुसार निष्पादन समय पर नहीं होने से कई वाहन तो थाना, चौकी परिसर में वर्षों से खड़े हैं। कोतवाली सहित अन्य थाना परिसर का बड़ा हिस्सा ऐसे दोपहिया और चार पहिया वाहनों से भरा मिल जाएगा। कई चारपहिया वाहन भी जंग खाकर बर्बाद हो गए। कई जब्त वाहन ऐसे हैं, जिनका कागज आज तक वाहन स्वामी पेश नहीं किए। इसके अभाव में दुर्घटनाग्रस्त या अन्य मामलों में जब्त वाहन न्यायालय या थाना से छूट नहीं पाए। ऐसे में थाने में दुर्घटनाग्रस्त, एनडीपीएस सहित अन्य गंभीर मामलों में जब्त दोपहिया व चार पहिया वाहनों की भरमार है। इन्हें खड़ा करने के लिए पुलिस को जगह बनाना पड़ता है।


बता दें कि शहर के कोतवाली, गांधीनगर, मणिपुर थाने सहित जिले के थाना में जब्त की गई वाहनों की कई वर्ष से नीलामी नहीं हो पाई है। न्यायालय या थाना की ओर से वाहन स्वामी को सुपुर्दगी में नहीं दिए जाने या नीलामी प्रक्रिया में शामिल नहीं होने के कारण इन्हें सुरक्षित रखना पुलिस की जिम्मेदारी बन जाती है। शेड का अभाव होने के कारण सैकड़ों वाहनों को खुले में ही रखा गया है, जो धूप, बारिश में रंग तो छोड़ ही दिए, जंग खाकर बर्बाद हो रहे हैं। थाना परिसरों में जगह की कमी होने के कारण बड़ी चार पहिया वाहनों को पुलिस परिवार के निवास से लगे हिस्से तक रखा गया है। पुलिस का कहना है कि जब्त किए गए वाहनों में अधिकतर वाहनों के मालिक अपनी गाड़ियों को छुड़ाने के लिए नहीं पहुंचे। बिना दस्तावेज के पुलिस इन्हें गाड़ी सौंपने की प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ा सकती है।

नीलामी की प्रक्रिया आसान नहीं
पुलिस जब्त किए गए वाहनों को चालान के साथ पहले कोर्ट में पेश करती है। कई बाद कोर्ट के द्वारा अपने मालखाने में ऐसी वाहनों को रखवा लिया जाता है। स्थानाभाव में सुरक्षात्मक दृष्टि से थाना में ही अधिकतर वाहनों को रखने का आदेश जारी किया जाता है। वाहन मालिक संपूर्ण दस्तावेज के साथ यदि न्यायालय में उपस्थित होता है तो उसके सुपुर्दनामे में वाहन दे दिया जाता है। कबाड़ में तब्दील हो रहे वाहनों के नीलामी की लंबी प्रक्रिया होने के कारण पुलिस के पास थाना में जब्त वाहनों को अपने सुरक्षा में रखना ही विकल्प शेष रहता है।

कहते हैं पुलिस अधिकारी
”थानों में जब्त किए गए वर्षों पुराने वाहनों की भरमार है। फिलहाल में जब्त किए गए लगभग 200 दोपहिया व चारपहिया वाहन कोतवाली और गांधीनगर थाना में हैं। इसकी जिम्मेदारी संबंधित थाना पुलिस की है। न्यायालयीन प्रक्रिया के बाद ही वाहनों की नीलामी की जा सकती है।

पुपलेश कुमार
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, सरगुजा

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